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विशेष
जलवायु और पर्यावरण
भारत की साढ़े 7 हज़ार किलोमीटर लम्बी तटरेखा पर महिलाएँ, जलवायु परिवर्तन से प्रभावित समुदायों को नए तरीक़ों से सहारा दे रही हैं. कहीं वे मैन्ग्रोव बहाल कर रही हैं, कहीं धान की खेती को अधिक टिकाऊ बना रही हैं, और कहीं समुद्र से नई आजीविका के अवसर पैदा कर रही हैं.
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भारत में लैंगिक समानता के लिए यूएन एजेंसियों के साझा मिशन
भारत में संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने एक संयुक्त प्रदर्शनी के माध्यम से अपनी वो परियोजनाएँ प्रस्तुत कीं, जो देशभर में महिलाओं और लड़कियों के लिए नए अवसर सृजित कर रही हैं, उनके अधिकारों को मज़बूत कर रही हैं, और लैंगिक समानता को आगे बढ़ा रही हैं. ये कहानियाँ दिखाती हैं कि साझा प्रयासों से महिलाओं और लड़कियों के लिए किस तरह अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और सशक्त जीवन का रास्ता तैयार किया जा सकता है.
ये भी ख़बरों में
मानवाधिकार
नागरिक समाज के लिए सिकुड़ते स्थान, बढ़ती असमानता, टैक्नॉलॉजी के ज़रिए समाज में आ रहे बदलावों के बीच, मानवाधिकारों के लिए चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं. इस पृष्ठभूमि में, यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने ‘मानवाधिकारों के लिए वैश्विक गठबन्धन’ नामक पहल को पेश किया है, जिसका उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया, नेतृत्व और दैनिक गतिविधियों में मानवाधिकारों को फिर से केन्द्र में लाना है.
स्वास्थ्य
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि सीमापार फैलने वाले पशु रोग (TADs) दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा, व्यापार और आजीविका के लिए बढ़ता ख़तरा बनते जा रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारियों के फैलने के पीछे के कारण भी अब अधिक जटिल होते जा रहे हैं. पशुओं, लोगों और उत्पादों की बढ़ती आवाजाही, बदलती उत्पादन प्रणालियाँ, पर्यावरणीय दबाव तथा पशु-चिकित्सा और निगरानी क्षमताओं में असमानता मिलकर रोगों और कीटों के लिए नए प्रसार मार्ग बना रही हैं.