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धर्म आधारित नफ़रत से निपटने के लिए 'शांति संदेशों को बढ़ावा ज़रूरी'

विश्व भर में धर्म और आस्था के आधार पर लोगों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों पर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नफ़रत भरे संदेशों का पुरज़ोर विरोध करने और शांति संदेशों को बढ़ावा देने का आग्रह किया है. संयुक्त राष्ट्र 22 अगस्त को पहली बार धर्म और आस्था पर आधारित हिंसा के पीड़ितों की याद में अंतरराष्ट्रीय दिवस मना रहा है.

एशिया-पैसेफ़िक देशों में प्राकृतिक आपदाओं की विकराल चुनौती

एशिया और पैसेफ़िक क्षेत्र में पर्यावरण क्षरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बदलते स्वरूपों और उनके घातक प्रभावों से ऐसी विनाशकारी घटनाओं के बार-बार होने की आशंका बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में स्थित देशों के लिए ऐसी आपदाओं का समय पर अनुमान लगाना और उनसे निपटने के लिए ज़रूरी तैयारी कर पाना मुश्किल साबित हो रहा है जो भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती का संकेत है.

हर जगह उपस्थित है माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण

माइक्रोप्लास्टिक कहे जाने वाले प्लास्टिक के छोटे कण हमारे पीने के पानी सहित हर जगह फैले हुए हैं और उनसे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों पर चिंता जताई जाती रही है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी (WHO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि यह ज़रूरी नहीं है कि माइक्रोप्लास्टिक के कण मानव स्वास्थ्य के लिए किसी ख़तरे का कारण हों.

कश्मीर में भारत सरकार से प्रतिबंध हटाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत सरकार से उसके प्रशासन वाले कश्मीर में उन प्रतिबंधों को हटाने का आहवान किया है जो अगस्त महीने के आरंभ में लगाए गए थे. इनमें विचार व्यक्त करने पर पाबंदी, सूचना पाने और शांतिपूर्ण तरीक़े से प्रदर्शनों पर प्रतिबंध शामिल हैं. 

आतंकवाद के दिए ज़ख़्म बहुत गहरे होते हैं - महासचिव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि आतंकवाद के दिए हुए ज़ख़्म बहुत गहरे होते हैं, समय बीतने पर उनकी गहराई कुछ कम हो सकती है, मगर वो ज़ख़्म कभी पूरी तरह ख़त्म नहीं होते. बुधवार को आतंकवाद के पीड़ितों की याद और श्रद्धांजलि देने के लिए मनाए गए अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर महासचिव ने ये शब्द कहे. ये दिवस हर वर्ष 21 अगस्त को मनाया जाता है.

यमन में जीवनदायी सहायता कार्यक्रम बंद होने के कगार पर

संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को घोषणा की है कि उसे यमन में धन की कमी की वजह से मानवीय सहायता के अनेक कार्यक्रम बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. सदस्य देशों ने यमन में सहायता कार्यक्रमों के लिए जो रक़म देने का वादा किया था, अभी तक उस रक़म का भुगतान नहीं किया गया है.

मध्य पूर्व में 'संयम और सुलह-सफ़ाई की सख़्त ज़रूरत'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चीफ़ डी कैबिनेट मारिया लुइज़ा वॉयटी ने कहा है कि क्षेत्र में ख़तरनाक टकराव की स्थिति को टालने के लिए संयम और शांति के लिए गंभीर बातचीत बहुत ज़रूरी है, अगर इस टकराव को नहीं रोका गया तो इसके बेहद ख़तरनाक परिणाम हो सकते हैं जिनका क्षेत्र से बाहर भी गंभीर असर हो सकता है.

यमन, वहाँ की जनता और क्षेत्र का ‘भविष्य दांव पर’

यमन में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा है कि हिंसा से बदहाल यमन विघटन के ख़तरे का सामना कर रहा है और उसके पास गँवाने के लिए बहुत ज़्यादा समय नहीं बचा है. यमन में हाल के दिनों में हुई हिंसा और नई चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि देश का भविष्य दांव पर लगा है और इसलिए शांति प्रयासों की सुस्त रफ़्तार को तेज़ किए जाने की आवश्यकता है.

समुद्रों को सहेजकर रखने के लिए समझौते की कोशिश

समुंदरों में ज़ाहिरा तौर पर तो लगभग दो लाख प्रजातियों की मौजदूगी के बारे में जानकारी उपलब्ध है मगर असल में ये संख्या लाखों में होने के अनुमान व्यक्त किए गए हैं. चिंता की बात ये है कि ये समुद्री प्रजातियाँ जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और दोहर के ख़तरों का सामना कर रही हैं.

 

‘जल गुणवत्ता के अदृश्य संकट’ से मानवता और पर्यावरण को बड़ा ख़तरा

विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि जल की गुणवत्ता बदतर होती जा रही है जिससे भारी प्रदूषण के शिकार इलाक़ों में आर्थिक संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा. मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि जल की ख़राब गुणवत्ता एक ऐसा संकट है जिससे मानवता और पर्यावरण के लिए ख़तरा पैदा हो रहा है.