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ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस में स्थित अल-अमाल अस्पताल का कुछ हिस्सा, बमबारी में क्षतिग्रस्त हुआ है.
UN News

ना दवा, ना कोई उम्मीद: ग़ाज़ा में इसराइली हमलों के तले में बेबस ज़िन्दगी

संचार व्यवस्था नहीं, दवा नहीं, और कोई उम्मीद भी नहीं. भीषण लड़ाई की मार झेल रहे ग़ाज़ा के एक अस्पताल में ऐसी परिस्थितियों में काम हो रहा है. ख़ान यूनिस के अल अमाल अस्पताल की घेराबन्दी के बीच वहाँ चिकित्सकों का एक समूह पिछले कई हफ़्तों से फँसा है, जिन्होंने यूएन न्यूज़ को बताया कि यहाँ जीवन कितना कठिन हो गया है.

स्पेन के मैड्रिड हवाई अड्डे का एक दृश्य. कोविड महामारी के दौरान हुई हानि से उबरने के आसार हैं.
© Unsplash/John Oswald

हवाई सफ़र में उछाल, कोविड के दौर नुक़सान से उबरने के आसार

हवाई यातायात में हाल के समय में, इस क़दर उछाल आया है कि उसने वर्ष 2019 में कोविड-19 महामारी शुरू होने से पहले के समय के स्तर को भी पीछे छोड़ दिया है.

यूक्रेन से रवाना की गई आपात खाद्य सहायता सूडान के तटीय शहर पोर्ट सूडान पहुँची है.
© WFP/Abubaker Garelnabei

सूडान में युद्ध से प्रभावित लोगों के लिए, युद्धग्रस्त यूक्रेन से अनाज सहायता

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बताया है कि युद्ध से जूझ रहे यूक्रेन ने साढ़े सात हज़ार टन गेहूँ का दान किया है, जिससे सूडान में हिंसक टकराव से पीड़ित 10 लाख लोगों के लिए एक महीने का भोजन मुहैया कराने में मदद मिलेगी. 

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का एक दृश्य.
© Unsplash/Mohammad Husaini

अफ़ग़ानिस्तान: ‘क्रूर, अमानवीय’ सार्वजनिक मृत्युदंड की घटनाओं पर गहरा क्षोभ

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने अफ़ग़ानिस्तान में पिछले सप्ताह, स्टेडियम में लोगों को सार्वजनिक रूप से मौत की सज़ा दिए जाने की घटनाओं पर गहरा क्षोभ प्रकट किया है, और ऐसी सज़ा दिए जाने पर तुरन्त विराम लगाने की अपील की है.

युद्ध, यूक्रेन के बच्चों और उनके परिवारों के लिए विनाशकारी साबित हुआ है.
© UNICEF

यूक्रेन में बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का पहाड़

युद्धग्रस्त यूक्रेन मेंबच्चे पिछले दो वर्षों के दौरानहवाई हमलों के डर से 3,000 से 5,000 घंटे, यानि लगभग चार से 7 महीने, भूमिगत स्थलों में स्थित आश्रयों में बिताने के लिए मजबूर रहे हैं, जिससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पहाड़ जैसा असर पड़ा है.

पिछले 20 सालों से शिल्पा एक सफ़ाईकर्मी के रूप में काम कर रही हैं.
UNDP India

भारत: शिल्पा तटकरे को कहाँ से मिली उम्मीद की किरण

भारत में सफ़ाई कर्मियों को अनौपचारिक अपशिष्ट अर्थव्यवस्था का हिस्सा होने के कारण, अक्सर सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इन्हीं मुद्दों पर ध्यान देने के लिए, भारत में यूएनडीपी ने उत्थान परियोजना चलाई है. सफ़ाई साथी, शिल्पा तटकरे के लिए, उत्थान परियोजना एक उम्मीद की किरण है...

 

ग़ाज़ा युद्ध में रफ़ाह में तबाह हुई एक बस्ती का दृश्य.
UN News/Ziad Taleb

'ग़ाज़ा में सभी पक्ष, सम्भावित युद्धापराधों के लिए ज़िम्मेदार'

ग़ाज़ा युद्ध के सभी पक्षों ने अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का स्पष्ट उल्लंघन किया है जिसमें सम्भावित युद्ध अपराध भी शामिल हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार अधिकारी वोल्कर टर्क ने बुधवार को चेतावनी भरे शब्दों में यह बात कही है.

पश्चिमोत्तर सीरिया में बमबारी से प्रभावित बच्चों ने एक अस्थाई केन्द्र में शरण ली है.
© OCHA/Bilal Al Hammoud

मध्य पूर्व में भड़के तनाव में तुरन्त कमी लाए जाने की अपील

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने सचेत किया है कि मध्य पूर्व में हिंसक टकराव और सीरिया में जारी लड़ाई का स्थानीय आबादी पर विनाशकारी असर हो रहा है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने क्षेत्र में व्याप्त तनाव में तुरन्त कमी लाने की अपील की है.

ग़ाज़ा में अकाल के आसन्न संकट पर विचार करने के लिए, सुरक्षा परिषद की एक बैठक (27 फ़रवरी 2024).
UN Photo

'ग़ाज़ा में सहायता नहीं बढ़ी तो अकाल निश्चित', सुरक्षा परिषद में चर्चा

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कर्मियों ने कहा है कि ग़ाज़ा में, पाँच लाख से अधिक लोग, अकाल से बस एक क़दम दूर हैं. हर दिन बढ़ते अकाल जोखिम पर चर्चा के लिए, मंगलवार को सुरक्षा परिषद की एक बैठक हुई है. यूएन मानवीय सहायता समन्वय मामलों के उप प्रमुख रमेश राजसिंघम ने राजदूतों को बताया है कि ग़ाज़ा में अगर मानवीय सहायता के स्तर और गति को नहीं बढ़ाया जाता है तो, अकाल को रोकना "लगभग असम्भव" होगा.

बोस्निया में एक लड़की ऑनलाइन पढ़ाई कर रही है.
© UNICEF/Almir Panjeta

मोबाइल कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिए, 9 अरब डॉलर का निवेश

विश्व भर में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के इरादे से मोबाइल फ़ोन उद्योग जगत की ओर से, नौ अरब डॉलर से अधिक धनराशि का निवेश करने का संकल्प लिया गया है. अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की महासचिव डॉरीन बोगडान-मार्टिन ने, स्पेन के बार्सिलोना शहर में आयोजित ‘मोबाइल विश्व काँग्रेस’ के दौरान यह घोषणा की है.