प्रवासी और शरणार्थी

'राष्ट्रवाद का ख़तरनाक रूप' राष्ट्रविहीनता से निपटने में बड़ा अवरोध

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रमुख फ़िलिपो ग्रैन्डी ने कहा है कि नफ़रत भरी बोली व भाषणों और पथ से भटके हुए राष्ट्रवाद की वजह से राष्ट्रविहीनता की समस्या से निपटने में मुश्किलें पेश आ रही हैं. उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह एक ऐसे समय में हो रहा है जब सार्वजनिक स्तर पर इस चुनौती को पहचाना जा चुका है और लोग इस समस्या को भली-भांति समझते हैं.

राष्ट्रविहीनों का सहारा बनने वाले वकील को सम्मान

राष्ट्रविहीनता के शिकार लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे किर्गिस्तान के एक वकील अज़ीज़बेक अशुरोफ़ को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के ‘2019 नेन्सेन रैफ़्यूजी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है. अशुरोफ़ ने पूर्व सोवियत संघ के विघटन के बाद 10 हज़ार राष्ट्रविहीन लोगों को किर्गिस्तान की नागरिकता दिलाने में मदद की है.

ग्रीस के द्वीपों पर शरणार्थियों की संख्या बढ़ने से चिंता

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने कहा है कि ग्रीस के द्वीपों पर शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए बनाए गए केंद्रों पर ज़बरदस्त भीड़ है जिससे वहां हालात बिगड़ने का ख़तरा पैदा हो गया है. इन हालात के मद्देनज़र यूएन एजेंसी ने ग्रीस सरकार से अपील की है कि शरण मांग रहे लोगों की जल्द सुनवाई करते हुए उन्हें उन द्वीपों से तत्काल देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाना चाहिए.

बुज़ुर्गों की बढ़ती आबादी की ज़रूरतें पूरी करना ज़रूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दक्षिण पूर्वी एशियाई क्षेत्र में बुज़ुर्ग आबादी बढ़ रही है. इस क्षेत्र में मुख्य रूप से 11 देश शामिल हैं जिनके नाम हैं – भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, म्यांमार, मालदीव, भूटान, थाईलैंड, उत्तर कोरिया (डीपीआरके) और तिमोर लेस्टे.

प्रवासी संख्या में जनसंख्या वृद्धि की गति से भी तेज़ बढ़ोत्तरी

दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या बढ़कर 27 करोड़ 20 लाख हो गई है जिसने विश्व  की जनसंख्या वृद्धि की दर को भी पीछे छोड़ दिया है. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) की नई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर क्षेत्र में प्रवासियों की संख्या बढ़ने का रुझान सामने आ रहा है.

रोहिंज्या शरणार्थियों की एक 'पूरी पीढ़ी की आशाएं दांव पर'

म्यांमार से भागकर बांग्लादेश आने वाले रोहिंज्या शरणार्थी दैनिक जीवन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं जिस वजह से एक पूरी पीढ़ी में हताशा घर कर रही है और आशाएं धूमिल हो रही हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने कहा है कि इस पीढ़ी की उम्मीदों पर खरा उतरने के काम में विफल होने का जोखिम कोई विकल्प नहीं है.

राजनीति के बजाय बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भूमध्य सागर में दो जहाज़ों पर सवार 130 बच्चों के भविष्य को राजनैतिक फ़ायदे के लिए जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए. यूएन की ओर से यह बयान गुरूवार को ऐसे समय में आया जब इन जहाज़ों को इटली में प्रवेश करने की अनुमति मिलने पर अनिश्चितितता बनी हुई थी.

बांग्लादेश में रोहिंज्या शरणार्थियों को बायोमैट्रिक पहचान-पत्र

बांग्लादेश में रह रहे रोहिंज्या शरणार्थियों के लिए बायोमैट्रिक पंजीकरण अभियान के तहत स्थानीय प्रशासन और यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की ओर से पहचान-पत्र जारी किए गए हैं. उम्मीद जताई गई है कि शरणार्थियों पर सटीक जानकारी एकत्र करने से उन्हें लक्षित ढंग से मदद मुहैया कराई जा सकेगी.

कोलंबिया में वेनेज़ुएला के बच्चों को मिला नागरिकता अधिकार

संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी (IOM) ने कोलंबिया के उस निर्णय का स्वागत किया है जिसमें वहां जन्म लेने वाले वेनेज़ुएला के 24 हज़ार से ज़्यादा बच्चों को कोलंबिया की नागरिकता का अधिकार दिए जाने की घोषणा की गई है. वेनेज़ुएला में राजनैतिक संकट की वजह से लाखों लोगों ने कोलंबिया में शरण ली हुई है और इस क़दम से उन माता-पिता को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है जिनके बच्चे कोलंबिया में पैदा हुए हैं.  

प्रवासन व जलवायु संकट: टिकाऊ समाधान की तलाश

पूरे मानव इतिहास पर नज़र डालें तो प्रवासन और जलवायु को हमेशा एक दूसरे से जुड़ा हुआ पाएंगे लेकिन आधुनिक दौर में मानव निर्मित जलवायु संकट के गंभीर प्रभाव पूरी मानव जाति के रहन-सहन का सिलसिला व्यापक रूप से बदलने वाले हैं.