प्रवासी और शरणार्थी

2020 का नेनसेन शरणार्थी पुरस्कार कोलम्बिया की मानवाधिकार कार्यकर्ता को

कोलम्बिया में शरणार्थियों की भलाई के लिये काम करने और बच्चों व किशोरों को यौन शोषण से बचाने में, दो दशक तक असाधारण काम करने के लिये मेयर्लिन वरगारा पेरेज़ को नेनसेन शरणार्थी पुरस्कार के लिये चुना गया है.

फँसे हुए प्रवासियों को सुरक्षित व गरिमामय वतन वापसी की दरकार – यूएन समिति

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक आयोग ने गुरुवार को आग्रह किया है कि सरकारों को उन प्रवासी कामगारों की मुश्किलों का तत्काल समाधान करना होगा जिन्हें अमानवीय परिस्थितियों में हिरासत में रखा गया है. इन प्रवासी कामकारों पर कोरोनावायरस फैलाने का दोष भी मढ़ा गया है.

कोविड-19: महामारी के बाद की दुनिया में प्रवासी श्रमिकों का अनिश्चित भविष्य

कोविड-19 महामारी के कारण प्रवासन पर बड़े पैमाने पर रोक लग गई है, लेकिन क्या मौजूदा संकट ख़त्म होते ही लोगों का आवागमन फिर शुरू हो जाएगा? संयुक्त राष्ट्र श्रम एजेंसी (ILO) के एक वरिष्ठ अधिकारी गैरी रिनहार्ट यूएन न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में बताते हैं कि अभी क्यों "सामान्य" हालात बहाल होने की सम्भावना नहीं है. साथ ही, हो सकता है कि प्रवासियों को एक बहुत ही अलग तरह के श्रम बाज़ार का सामना करना पड़े.

ग्रीस द्वीप में नई आग लगने से बचे-कुछे आवास भी नष्ट, हज़ारों लोग बेघर

ग्रीस के एक द्वीपीय केन्द्र लेसबॉस में नए सिरे से लगी आग ने वहाँ ठहराए गए हज़ारों शरणार्थियों व प्रसावियों के लिये आवासों को नष्ट कर दिया है. इससे पहले मंगलवार शाम को भी वहाँ आग लग चुकी है जिसमें बड़ी संख्या में इन शरणार्थियों व प्रवासियों के आवासों को नुक़सान पहुँचा था.

कोविड-19: शरणार्थी बच्चों की शिक्षा पर विनाशकारी प्रभाव

शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने अपनी एक नई रिपोर्ट ‘Coming Together for Refugee Education’ में आशंका जताई है कि स्कूल बन्द होने, ज़्यादा फ़ीस होने या दूरस्थ शिक्षा के लिए तकनीक तक पहुँच ना होने के कारण बड़ी संख्या में शरणार्थी बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ होंगे. एक वीडियो रिपोर्ट...
 

राहत का अभाव 'घातक' साबित हुआ - समुद्र में फँसे अनेक रोहिंज्या शरणार्थियों की मौत

अंडमान सागर में छह महीने से ज़्यादा समय तक फँसे रहने के बाद तीस से ज़्यादा रोहिंज्या शरणार्थियों की मौत होने की आशंका जताई गई है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने कहा है मुश्किल हालात से जूझ रहे लोगों को शरण देने के लिये देशों की सामूहिक अनिच्छा के परिणामस्वरूप यह घटना हुई है. 

कोविड-19: शरणार्थी बच्चों की शिक्षा पर विनाशकारी असर से निपटने की पुकार 

कोरोनावायरस संकट काल में दुनिया के हर देश में शिक्षा हासिल करना बच्चों के लिये चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है लेकिन शरणार्थी बच्चे इससे ख़ास तौर पर प्रभावित हुए हैं. शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट पेश करते हुए आशंका जताई है कि बड़ी संख्या में शरणार्थी बच्चे स्कूल बन्द होने, ज़्यादा फ़ीस होने या घर पर रहकर पढ़ाई करने के लिए टैक्नॉलॉजी तक पहुँच ना होने के कारण अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाएँगे. 

भूमध्यसागर में फँसे शरणार्थियों को जहाज़ो से सुरक्षित उतारे जाने की पुकार 

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि भूमध्यसागर में बचाव एवँ तलाश अभियान के दौरान बचाए गए लोगों को तटों तक सुरक्षित पहुँचाने के लिये जल्द से जल्द प्रयास किये जाने होंगे. ग़ौरतलब है कि 400 से ज़्यादा शरणार्थी व प्रवासी तीन जहाज़ों पर मौजूद हैं और उनमें से कुछ लोग कई हफ़्तों से वहाँ फँसे हुए हैं.  अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने शरणार्थियों व प्रवासियों को सुरक्षित ढँग से उतारे जाने के लिये एक क्षेत्रीय समझौते की ज़रूरत को भी रेखांकित किया है.

रोहिंज्या संकट का स्थायी समाधान ढूँढने की आवश्यकता पर बल

शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने विस्थापित और राष्ट्रविहीन रोहिंज्या समुदाय के लिये अपील जारी करते हुए कहा है कि म्याँमार और अन्य देशों में रह रहे रोहिंज्या समुदाय के लोगों की पीड़ाओं को ना भुलाकर उनकी मुश्किलों का स्थायी हल निकाला जाना होगा. तीन वर्ष पहले अगस्त 2017 में म्याँमार में दमनकारी सैन्य अभियान शुरू होने के बाद लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश में शरण ली थी. लेकिन उनके समक्ष आज भी चुनौतियाँ हैं जिन्हें कोविड-19 महामारी ने और भी गम्भीर बना दिया है.

कोविड-19: प्रवासी कामगारों की मदद के लिए नए दिशा-निर्देश

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ सामूहिक जवाबी कार्रवाई के तहत प्रवासी कामगार अग्रिम मोर्चों पर डटे हैं लेकिन वे अनेक चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं. मौजूदा हालात के मद्देनज़र अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और इन्टरनेशनल चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स ने नियोक्ताओं (Employers) के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं ताकि प्रवासी कामगारों को सहायता प्रदान करने के लिए उपायों को अपनाया जा सके.