जलवायु और पर्यावरण

ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ़ पर मंडराता ख़तरा - विश्व धरोहर समिति

संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ़ को ऐसी विश्व धरोहरों की सूची में रखने की सिफ़ारिश की है जिन पर ख़तरा मंडरा रहा है. 

मरुस्थलीकरण और सूखा – मानव कल्याण के लिये ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि मानवता ने प्रकृति के विरुद्ध एक आत्मघाती, निर्मम युद्ध छेड़ा हुआ है जिसे रोका जाना होगा. उन्होंने गुरुवार, 17 जून, को मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर आगाह किया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हुए भूमि क्षरण और कृषि, शहरों व बुनियादी ढाँचे के विस्तार से, तीन अरब से अधिक लोगों के जीवन व आजीविका के लिये चुनौती खड़ी हो गई है. 

प्रकृति की पुनर्बहाली हमारी पीढ़ी की नैतिक परीक्षा – यूएन महासभा प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने कहा है कि भूमि, जलवायु, जैवविविधता व प्रदूषण के संकट आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और इन्हें हल करना मौजूदा पीढ़ी के लिये एक बड़ी परीक्षा है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने भावी स्वास्थ्य व पर्यावरणीय ख़तरों से निपटने और भूमि को बहाल किये जाने के लिये वैश्विक प्रयासों को मज़बूत बनाये जाने का आहवान करते हुए महत्वपूर्ण उपायों को साझा किया है.

भारत के 'अदृश्य पर्यावरण कार्यकर्ता' - सफ़ाई साथी

भारत में कोविड-19 महामारी के दौरान, प्लास्टिक कचरे में इस्तेमाल किये गए दस्तानों, मास्क व अन्य सामग्री की मात्रा बढ़ी है जिससे सफ़ाईकर्मियों के संक्रमण का शिकार होने का भी जोखिम बढ़ा है. उनके पास अक्सर ज़रूरी बचाव उपकरणों का अभाव होता है और सामाजिक संरक्षा योजनाओं तक पहुँच नहीं होती. इसके मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने ‘उत्थान’ नामक एक कार्यक्रम शुरू किया है जिसके तहत, सरकारी योजनाओं के दायरे में लाने के लिये, नौ हज़ार सफ़ाई साथियों को राष्ट्रीय पहचान पत्र हासिल करने में मदद मिली है और उनके टीकाकरण के भी प्रयास किये जा रहे हैं.

 

टिकाऊ विकास व भावी पीढ़ियों के लिये महासागरों की स्वास्थ्य-रक्षा की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि बढ़ते प्रदूषण व तापमान और हद से ज़्यादा मछलियाँ पकड़े जाने से महासागर और जैवविविधता पर भीषण असर हो रहा है. उन्होंने इस वर्ष, ‘विश्व महासागर दिवस’ पर अपने सन्देश में आगाह किया है कि कोविड-19 महामारी से पुनर्बहाली प्रयासों में, प्रकृति के विरुद्ध युद्ध का अन्त और भावी पीढ़ियों की भलाई के लिये महासागरों का स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जाना होगा.  

समुद्रों में प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिये ई-लर्निंग पाठ्यक्रम

एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक आयोग (UNESCAP) ने अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर, समुद्रों में प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिये, एक विज्ञान-आधारित ई-लर्निंग पाठ्यक्रम शुरू किया है. मंगलवार, 8 जून, को  'विश्व महासागर दिवस' के अवसर पर पेश इस पाठ्यक्रम के ज़रिये उन अत्याधुनिक टैक्नॉलॉजी और तकनीकों के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी, जिनकी सहायता से शहरी और समुद्री पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे को मापने के साथ-साथ उसकी निगरानी की जा सकती है.

विश्व महासागर दिवस: यूएन महासचिव का सन्देश

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व महासागर दिवस पर अपने सन्देश में प्रकृति के विरुद्ध युद्ध का अन्त करने की पुकार लगाई है. उन्होंने ध्यान दिलाया है कि मौजूदा और भावी पीढ़ियों के लिये, हमारे महासागरों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के मद्देनज़र यह महत्वपूर्ण है...

विश्व पर्यावरण दिवस: यूएन महासचिव का सन्देश

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जारी अपने सन्देश में, ‘पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के यूएन दशक' की शुरुआत की घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि पारिस्थितिकी तंत्र बहाल कर हम ऐसा परिवर्तन ला सकते हैं, जिससे समस्त टिकाऊ विकास लक्ष्‍यों की प्राप्ति में मदद मिलेगी...

विश्व पर्यावरण दिवस: प्रकृति के घावों पर मरहम लगाने का समय

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जारी अपने सन्देश में, ‘पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के यूएन दशक' की शुरुआत की घोषणा की है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया, जैव-विविधता की क्षति, जलवायु व्यवधान और बढ़ता प्रदूषण, तीन पर्यावरणीय संकटों का सामना कर रही है, जिसके मद्देनज़र, यह प्रकृति को पहुँचाये गए नुक़सान की भरपाई करने का समय है.

दक्षिण एशिया में नाइट्रोजन प्रदूषण की रोकथाम ज़रूरी

नाइट्रोजन एक दोधारी तलवार है. यह उर्वरकों का एक प्रमुख तत्व है और गेहूँ व मक्का जैसी आवश्यक फ़सलों के विकास में मदद देता है. मगर, बहुत अधिक नाइट्रोजन से वायु प्रदूषित हो सकती है, मिट्टी नष्ट हो सकती है और समुद्र में बेजान "मृत क्षेत्र" पैदा हो सकता है. पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद शहर के कृषि विश्वविद्यालय में खेती में नाइट्रोजन उपयोग के प्रमुख विशेषज्ञ तारिक़ अज़ीज, 'दक्षिण एशिया नाइट्रोजन हब' के मुख्य भागीदार भी हैं, जो आठ देशों में नाइट्रोजन के टिकाऊ उपयोग का समर्थन करता है. यूएन पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने तारिक़ अज़ीज से इस दिशा में उनके प्रयासों और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के विषय में विस्तार से बातचीत की.