जलवायु परिवर्तन

तत्काल जलवायु कार्रवाई की ज़रूरत को रेखांकित करते नए आंकड़े

संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान संस्था (WMO) की ओर से जारी नए आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले चार साल आधिकारिक रूप से अब तक के सबसे गर्म साल रहे हैं. इस जानकारी के सामने आने के बाद यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु कार्रवाई के लिए प्रयास तेज़ करने और महत्वाकांक्षा बढ़ाने की ओर ध्यान आकृष्ट किया है. सितंबर में वह इसी सिलसिले में जलवायु शिखर वार्ता भी आयोजित कर रहे हैं. 

मुश्किल समय में आशा की उजली किरण:यूएन महासचिव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में कहा है कि दुनिया कई खतरों से जूझते हुए एक मुश्किल दौर से गुजर रही है .  पिछले साल 2018 के आगमन पर दिए अपने संदेश में जारी एक रेड अलर्ट की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उस समय की कई चुनौतियां आज भी बनी हुई हैं लेकिन आशा का दामन थामे रखने के भी कई कारण हैं. 

कॉप24 (COP24): क्‍या है दांव पर और क्‍या जानना है बहुत ज़रूरी

इधर दुनिया का तापमान बढ़ता जा रहा है, उधर जलवायु कार्रवाई पिछड़ रही है और कुछ करने का अवसर हाथ से निकलता जा रहा है.  2 दिसंबर से पोलैंड के कैटोविच शहर में दो सप्‍ताह का जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन कॉप24 शुरू हुआ, जिसमें संबद्ध पक्ष इस बारे में विचार करेंगे कि इस समस्‍या से तत्‍काल सामूहिक रूप से कैसे निपटा जाए.

ग्रीनहाउस गैसों का स्तर रिकॉर्ड ऊँचाई पर

वातावरण में तापमान बढ़ाने वाली ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है. संयुक्त राष्ट्र के मौसम विज्ञान संस्थान ने गुरूवार को एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस चलन में कमी आने के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे हैं. इसी कारण से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, महासागरों का अम्लीकरण हो रहा है और मौसम का मिज़ाज प्रतिकूल हो रहा है.

ओज़ोन परत में बेहतरी से उम्मीद मज़बूत हुई

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में दिखाया गया है कि ओज़ोन परत में लगातार सुधार हो रहा है. इन ताज़ा परिणामों की ये कहते हुए भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है कि विश्व स्तर पर एकजुट प्रयासों के ज़रिए कितनी बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है. साथ ही इन आँकड़ों को जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप विश्व तापमान में बढ़ोत्तरी को रोकने के प्रयासों में एक प्रेरणा के रूप में भी पेश किया जा रहा है. 

क़ुदरती हादसों से खरबों का नुक़सान

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले क़रीब 20 वर्षों के दौरान भूकम्प और सूनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से क़रीब 13 लाख लोगों की जान जा चुकी है.