स्वास्थ्य

ख़सरा के बढ़ते मामलों से बढ़ती चिंता

विश्व भर में ख़सरा के कारण वर्ष 2018 में एक लाख 40 हज़ार से ज़्यादा मौतें हुई हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आशंका जताई है कि 2019 में इस बीमारी से होने वाली मौतों और संक्रमण के मामले पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक हो सकते हैं. यूएन एजेंसी के मुताबिक़ विश्व की जनसंख्या में वैक्सीन कवरेज 95 फ़ीसदी से कम रहने पर बीमारी के व्यापक रूप से फैलने का जोखिम बना रहेगा.  

मलेरिया: बच्चों व गर्भवती महिलाओं की देखभाल पर ज़्यादा ज़ोर

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले के मक़ाबले अब कहीं ज़्यादा संख्या में महिलाएँ और बच्चे मलेरिया से बचाए जा रहे हैं लेकिन मलेरिया के ख़िलाफ़ त्वरित कार्रवाई और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता सुनिश्चित करने के वास्ते और ज़्यादा धन की ज़रूरत है. 

जलवायु संकट: मानव स्वास्थ्य पर गंभीर असर, समुचित तैयारी की कमी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि चरम मौसम की घटनाओं – लू, चक्रवाती तूफ़ानों, बाढ़, सूखा – से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का ख़तरा लगातार बढ़ रहा है लेकिन इसके बावजूद अधिकतर देश इस दिशा में अभी पर्याप्त स्तर पर प्रयास नहीं कर रहे हैं. वहीं यूएन की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने कहा है कि वर्ष 2019 में समाप्त होने वाला दशक अब तक का सबसे गर्म दशक साबित होने की संभावना है. 

काँगो में सशस्त्र गुटों के हमले में ईबोला स्वास्थ्यकर्मियों की मौत

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में हथियारबंद गुटों ने घातक ईबोला बीमारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाकर हमला किया है जिसमें चार की मौत हुई है और पांच अन्य घायल हुए हैं. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक़ ये हमले ऐसे समय हुए हैं जब ईबोला के मामलों में कमी देखने को मिली है लेकिन ऐसी घटनाओं से बीमारी से निपटने की कोशिशों को धक्का लग सकता है.  

अल्बानिया में शक्तिशाली भूकंप के बाद तेज़ी से बचाव कार्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कर्मचारी अल्बानिया में भूकंप के बाद वहाँ अधिकारियों की सहायता करने में लगे हैं. इस भूकंप में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं और 650 से अधिक घायल होने की ख़बरें हैं.

गन्दगी साफ़ करने का अदम्य साहस

अनेक देशों में अब भी मानव मल व कचरा साफ़ करने के लिए स्वच्छता कर्मचारियों की ही सेवाएँ ली जाती हैं. ये कम लोग ही जानते हैं कि ये काम कितना जोखिम भरा है. कई बार तो स्वच्छता कर्मचारियों की मौत भी हो जाती है. और समाज में उनकी इस महत्वपूर्ण सेवा और बुनियादी कार्य को हिकारत की नज़र से देखा जाता है, ये तो किसी से छुपा नहीं है. ऐसे ही कुछ स्वच्छता कर्मचारियों की कहानी...

एचआईवी ग्रस्त लोगों को सशक्त बनाने से ख़त्म होगी ये बीमारी

एचआईवी - एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों की अगुवाई कर रही एजेंसी यूएनएड्स ने कहा है कि एचआईवी के संक्रमित लोगों को जब उनकी ख़ुद की देखभाल करने के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने का मौक़ा मिलता है तो संक्रमण के नए मामले कम होते हैं और ऐसी स्थिति में ज़्यादा संख्या में संक्रमित लोगों को इलाज की सुविधा हासिल होती है.

​​​​​​​एड्स का दैत्य निगल जाता है हर दिन 320 बच्चों व किशोरों को

दुनिया भर में हर साल हर दिन क़रीब 320 बच्चे और किशोर युवा एड्स से संबंधित बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने एचआईवी और एड्स के बारे में एक वैश्विक संक्षिप्त रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार साल 2018 में हर घंटा लगभग 13 बच्चों और युवाओं की जान एड्स की वजह से चली गई.

किशोर उम्र में आलस, दिन में एक घंटा भी कसरत नहीं

विश्व भर में किशोर उम्र में नियमित व्यायाम का घटता रुझान एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है जिससे वयस्क होने पर लोगों के स्वास्थ्य को एक बड़ा ख़तरा पैदा हो सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का एक नया अध्ययन दर्शाता है कि 11-17 वर्ष की उम्र में 80 फ़ीसदी से ज़्यादा किशोर प्रतिदिन 60 मिनट से भी कम शारीरिक गतिविधियों में बिता रहे हैं.

डेंगू पर क़ाबू पाने के लिए नई तकनीक परीक्षण के लिए तैयार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार मच्छरों से फैलने वाले डेंगू बुख़ार से आधी से ज़्यादा दुनिया को ख़तरा है. इसकी गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र इसे जड़ से मिटाने के वैश्विक प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. इन प्रयासों के तहत लाखों की संख्या में बधिया कीटों को छोड़े जाने के असर को मापने की घोषणा की गई है.