यूरोप

नोट्रे डाम चर्च के पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार यूनेस्को

फ्रांस की राजधानी पेरिस के ऐतिहासिक नोट्रे डाम कैथीड्रल में भीषण आग के बाद वहां हुए नुक़सान का जायज़ा लेने और आग से बच गए हिस्से को संरक्षित रखने के प्रयास शुरू हो गए हैं. संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने कहा है कि पुनर्निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए वो एक आपात मिशन भेजने के लिए तैयार हैं.

नोट्रे डाम गिरजाघर में भीषण आग से व्यथित यूएन प्रमुख

फ्रांस की राजधानी पेरिस के प्राचीन नोट्रे डाम कैथेड्रल में भीषण आग लगने और इस ऐतिहासिक धरोहर को नुक़सान  पहुंचने पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुख प्रकट किया है. नोट्रे डाम गिरजाघर को गॉथिक स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण के रूप में देखा जाता है और 1991 में उसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था.

लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद बनी उत्तर मैसेडोनिया गणराज्य नाम पर सहमति

पिछले साल जून महीने में एक ऐतिहासिक समझौते के साथ ही दो देशों, पूर्व यूगोस्लाविया के मैसेडोनिया गणराज्य और ग्रीस, में 27 साल से चले आ रहे विवाद का निपटारा हो गया. इस मुद्दे पर चली वार्ताओं में संयुक्त राष्ट्र की ओर से मैथ्यू निमेत्ज़ ने अहम भूमिका निभाई और दो दशकों से ज़्यादा समय तक वार्ताओं का नेतृत्व किया.

उत्तर मैसेडोनिया गणराज्य पर समझौता राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत

संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में एथेंस और स्कोप्ये में नाम बदलने पर हुए समझौते के प्रभावी होने को ऐतिहासिक करार देते हुए महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि सभी सदस्य देशों को इसका समर्थन करना चाहिए. पूर्व यूगोस्लाविया के मैसेडोनिया गणराज्य को अब उत्तर मैसेडोनिया गणराज्य के नाम से जाना जाएगा. इसके साथ ही दशकों से चले आ रहे विवाद का निपटारा हो गया है. 

'सबसे घातक समुद्री रास्ते' में हर दिन 6 जानें गईं: यूएन रिपोर्ट

सुरक्षित जीवन की तलाश में भूमध्यसागर  सागर को पार कर यूरोप पहुंचने की कोशिश करना सैकड़ों लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ.  संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने अपनी एक नई रिपोर्ट में इसे दुनिया में सबसे घातक समुद्री रास्ता करार देते हुए कहा है कि पिछले साल हर दिन औसतन 6 लोगों की मौतें हुई.  

यूरोपीय नागरिकों की तुलना में विस्थापितों को बीमारियों का ख़तरा अधिक

सुरक्षित देश में शरण लेने के लिए लंबे सफ़र, ख़राब परिस्थितियों में रहने की मजबूरी और जीवनशैली में आए बदलाव से यूरोप में प्रवासियों और शरणार्थियों के स्वास्थ्य को ख़तरे की आशंका बढ़ जाती है. ये निष्कर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से जारी एक नई रिपोर्ट में सामने आए हैं जिसमें पहली बार यूरोप पहुंचने वाले विस्थापितों के स्वास्थ्य से जुड़ी मुश्किलों को समझने का प्रयास किया गया है.