महिलाएं

मानसिक स्वास्थ्य का बहुत ध्यान ज़रूरी

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में इंसानों के ना केवल शारीरिक वजूद पर चोट की है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरी तरह हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि दुनिया भर में हर जगह, हर इंसान के मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखा जाना बहुत ज़रूरी है और ये अभी के लिए नहीं, बल्कि महामारी पर क़ाबू पाए जाने के बाद के समय के लिए भी सुनिश्चित करना है. वीडियो सन्देश...

सूडान में महिला ख़तना पर प्रतिबंध, मगर रास्ता बहुत कठिन है... (ब्लॉग)

जहाँ पूरी दुनिया कोरोनावायरस महामारी के दौरान एक अदृश्य दुश्मन से जंग लड़ने में में लगी हुई है, वहीं सूडान ने महिला जननांग विकृति पर रोक लगाने के उपायों के तहत इस प्रथा को अपराध क़रार दे दिया गया  है. यह ऐतिहासिक उपाय 1 मई को विश्व मज़दूर दिवस के मौक़े पर लागू हो गया है. लेकिन  इन उपायों के तहत महिलाओं को इस दर्दनाक प्रथा से मुक्ति दिलाना कितना मुश्किल व आसान होगा?  इस विषय पर केनया में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर, सिद्धार्थ चैटर्जी का ब्लॉग...

स्वास्थ्य संकट में जच्चा-बच्चा के लिए गंभीर जोखिम

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने अनुमान ज़ाहिर किया है कि कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 11 करोड़ 60 लाख बच्चों का जन्म हुआ है. संगठन ने इस संदर्भ में तमाम देशों की सरकारों से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायी सेवाओं का संचालन सुनिश्चित करने का आहवान किया है क्योंकि उनके लिए पहले से ही दबाव में काम कर रही स्वास्थ्य सेवाओं और बाधित आपूर्ति श्रंखला के माहौल में ज़्यादा ख़तरा दरपेश है.

संघर्षों व हिंसा के कारण विस्थापित बच्चों की रिकॉर्ड संख्या

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक ताज़ा रिपोर्ट में पाया गया है कि वर्ष 2019 में लड़ाई-झगड़ों और हिंसा के कारण लगभग एक करोड़ 90 लाख बच्चों को अपने ही देशों में विस्थापित होना पड़ा, जोकि किसी भी अन्य साल से ज़्यादा है. इस कारण बच्चे वैश्विक महामारी कोविड-19 के वैश्विक फैलाव के लिए सबसे कमज़ोर तबका बन गए हैं. 

कोविड-19: महिला स्वास्थ्य पर विनाशकारी असर की आशंका

विश्वव्यापी महामारी पर क़ाबू पाने के इरादे से लागू की गई तालाबंदी व अन्य सख़्त पाबंदियों की एक बड़ी मानवीय क़ीमत चुकानी पड़ सकती है. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और साझीदार संगठनों के नए अनुमानों के मुताबिक कोविड-19 से स्वास्थ्य सेवाओं में आए व्यवधान के कारण आने वाले महीनों में अनचाहे गर्भधारण के 70 लाख से ज़्यादा अतिरिक्त मामले सामने आ सकते हैं और महिला ख़तना व बाल विवाह के मामलों में भी बढ़ोत्तरी दर्ज होने की आशंका है.  

कोविड-19 से लड़ने की धुन में टीकाकरण ना छूट जाए

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि साल 2019 में दुनिया भर में लगभग एक करोड़ 30 लाख बच्चों को अनेक तरह की बीमारियों से बचाने वाले टीके नहीं लगवाए गए थे. इसलिए संगठन ने तमाम देशों की सरकारों से टीकाकरण सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए कहा है कि ख़ासतौर से कोविड-19 महामारी के माहौल में टीकाकरण में किसी भी तरह की बाधा बहुत से बच्चों के लिए बेहद ख़तरनाक साबित हो सकती है.

कोविड-19 से मुक़ाबले में महिलाओं व लड़कियों की भलाई पर हो ध्यान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि लैंगिक समानता व महिलाधिकारों के क्षेत्र में पिछले दशकों के दौरान अथक मेहनत से जो प्रगति हासिल की गई है, वो कोविड-19 महामारी के कारण ख़तरे  में पड़ती नज़र आ रही है. यूएन प्रमुख की ये स्पष्ट चेतावनी एक ऐसे नीति दस्तावेज़ में पेश की गई है जिसमें ये विवरण दिया गया है कि मौजूदा महामारी के कारण किस तरह पहले से मौजूद असमानताएँ और भी ज़्यादा गहरी हो रही हैं.

विश्व स्वास्थ्य दिवस: नर्सों और दाइयों को अभिवादन

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 2020 के विश्व स्वास्थ्य दिवस पर नर्सों और दाइयों के योगदान का ख़ास उल्लेख किया है. कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने में सभी स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाएँ बहुत अहम बन गई हैं.

महासचिव का वीडियो संदेश..

कोविड-19 के कारण महिलाओं पर हिंसा में बढ़ोत्तरी

 कोविड-19 पर क़ाबू पाने के प्रयासों के तहत अनेक देशों में तालाबंदी विश्व आबादी का एक बड़ा हिस्सा घरों में सिमट गया है. महासचिव ने इन हालात में महिलाओं व लड़कियों के प्रति घरेलू हिंसा के मामलों में ‘भयावह बढ़ोत्तरी’ दर्ज किए जाने पर चिंता जताई है...

कोविड-19: महिलाओं पर हिंसा के अंत की मुहिम को यूएन का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं व लड़कियों के ख़िलाफ़ हर प्रकार की हिंसा के अंत के लिए तत्काल वैश्विक कार्रवाई की पुरज़ोर अपील की है. विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण तालाबंदी होने से लोग घरों में महदूद रहने के लिए मजबूर हैं जिसके बाद घरेलू हिंसा के मामलों में तेज़ी आई है. हर क्षेत्र में स्थित देशों से अब तक मिली रिपोर्टों के अनुसार आवाजाही पर पाबंदी लगने, सामाजिक जीवन में दूरी बरते जाने, और आर्थिक व सामाजिक दबाव बढ़ने से घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं.