महिलाएं

बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिये समन्वित प्रयास

जैसलमेर, भारत के राजस्थान राज्य का सबसे बड़ा ज़िला है, मगर यहाँ स्वास्थ्य ज़रूरतों को पूरा करने, विशेषकर मातृत्व व प्रसव सम्बन्धी सेवाओं के लिये विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती रही है. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने वर्ष 2013 में महिला स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये ज़िला प्रशासन व राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर प्रयास किये, जिसके सकारात्मक नतीजे दिखाई दिये हैं. इस क्षेत्र में हुई प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों व स्वास्थ्यकर्मियों से एक मुलाक़ात....

शान्तिरक्षा मिशन: कौशल निखारने व अनुभव हासिल करने का अवसर

दक्षिण सूडान में यूएन मिशन (UNMISS) में सैन्य पर्यवेक्षक के तौर पर सेवारत, भारतीय शान्तिरक्षक मेजर तेजस्मिता मंजूनाथ का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र मिशन, समुदायों में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान करते हैं. उन्होंने यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि कोविड-19 संकट काल बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है, मगर एक शान्तिरक्षक व सैन्यकर्मी के तौर पर मिली ट्रेनिंग ने उन्हें, निजी मुश्किलों को पीछे छोड़कर, अपनी ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभाने के लिये तैयार किया है...

केनयाई शान्तिरक्षक ‘जैण्डर एडवोकेट ऑफ़ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित

केनया की संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षक स्टैपलिन न्याबोगा को लैंगिक अधिकारों की पैरोकारी के लिये, वर्ष 2020 के संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार (UN Military Gender Advocate of the Year) से सम्मानित किये जाने की घोषणा की गई है. 32 वर्षीया केनयाई शान्तिरक्षक ने हाल ही में सूडान के दार्फ़ूर में यूएन मिशन (UNAMID) में अपना कार्यकाल पूरा किया है, जहाँ लैंगिक मुद्दों पर उत्कृष्ट योगदान देने के लिये उन्हें चुना गया है.

भारत: कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्य रक्षा के लिये सक्रिय युवा छात्राएँ

कोविड-19 महामारी की जानलेवा लहर से जूझ रहे भारत में एक दिन में संक्रमण के लाखों मामले सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है. इन हालात में अग्रिम मोर्चे पर डटे स्वास्थ्य व अन्य सहायताकर्मी लोगों की ज़िन्दगियों की रक्षा करने में जुटे हैं. पिछले एक वर्ष में, कठिन हालात में किशोर स्कूली छात्राओं ने भी इस वायरस और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से अपने समुदायों की रक्षा करने में अपनी ज़िम्मेदारी निभाई है.

विश्व में नौ लाख दाइयों की कमी से उपजी चिन्ता – नई रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और साझीदार संगठनों की एक नई रिपोर्ट, दुनिया में व्यापक स्तर पर दाइयों (Midwives) की कमी को दर्शाती है, जिनकी स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लाखों महिलाओं व नवजात शिशुओं की या तो मौत हो रही है या फिर वे अस्वस्थता के शिकार हो रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2035 तक इन स्वास्थ्य सेवाओं में समुचित निवेश के ज़रिये, हर वर्ष 43 लाख ज़िन्दगियों को बचाया जा सकता है.

शान्ति अभियानों में वर्दीधारी महिलाओं की संख्या वृद्धि – यूएन की अहम प्राथमिकता

संयुक्त राष्ट्र में शान्तिरक्षा अभियानों के प्रमुख ने कहा है कि शान्ति अभियानों में वर्दीधारी महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना, यूएन के लिये एक अहम प्राथमिकता है. अवर महासचिव ज्याँ-पियेर लाक्रोआ ने बुधवार को यूएन ट्रस्ट कोष (UN Elsie Initiative Fund) की शुरुआत के अवसर पर आयोजित एक एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.

ब्रिटेन से सहायता राशि में 85% की कटौती से, महिलाओं व लड़कियों पर गम्भीर प्रभाव

संयुक्त राष्ट्र की यौन व प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी – UNFPA ने गुरूवार को कहा कि ब्रिटेन द्वारा, संयुक्त राष्ट्र के परिवार नियोजन कार्यक्रम को दी जाने वाली सहायता राशि में इस वर्ष 85 प्रतिशत की कटौती करने का जो इरादा ज़ाहिर किया गया है उसके कारण, दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों व उनके परिवारों के लिये भयानक परिणाम होंगे.

उज्ज्वल भविष्य के लिये, लड़कियों को प्रोद्योगिकी से जोड़ना होगा, यूएन का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान, जबकि सूचना और संचार प्रोद्योगिकी (आईसीटी) अति महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है तो आधी दुनिया, इण्टरनेट जुड़ाव से वंचित है. उन्होंने, गुरूवार, 22 अप्रैल को, आईसीटी में लड़कियों के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर अपने सन्देश में कहा कि इण्टरनेट से वंचित रहने वालों में, ज़्यादातर महिलाएँ और लड़कियाँ हैं, और वो भी विकासशील देशों में ज़्यादा.

'शरीर मेरा है, मगर फ़ैसला मेरा नहीं' महिला सशक्तिकरण पर यूएन रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 57 विकासशील देशों की लगभग आधी महिलाओं को गर्भनिरोधक का उपयोग करने, स्वास्थ्य देखभाल की मांग करने या फिर अपनी कामुकता सहित अपने शरीर के बारे में निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.

'मेरा शरीर, मेरा फ़ैसला’

संयुक्त राष्ट्र की एक नई प्रमुख रिपोर्ट में, व्यक्तियों की शारीरिक स्वायत्तता की पुकार लगाई गई है. इस मुद्दे पर पहली बार ध्यान केन्द्रित करते हुए, यूएन जनसंख्या कोष (UNFPA) की प्रमुख रिपोर्ट, ख़ुद के शरीर के बारे में, ख़ुद के निर्णय लेने की शक्ति और पसन्द की पुकार लगाती है. और ये शक्ति, हिंसा के डर के बिना, व किसी अन्य को ये फ़ैसला करने का अधिकार दिये बिना मिले.