मानवीय सहायता

यमन में छीना जा रहा है 'बच्चों के मुंह से निवाला'

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के प्रमुख डेविड बीज़ली ने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि यमन में हुती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों में भूखे बच्चों के मुंह से निवाला छीना जा रहा है. सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अगर समझौतों का सम्मान नहीं हुआ तो कुछ ही दिनों में भोजन सामग्री की सहायता को रोक दिया जाएगा.

दक्षिण सूडान में भोजन की भारी कमी, अकाल जैसे हालात

दक्षिण सूडान में लगभग 70 लाख लोगों के पास रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं बचा है और 20 हज़ार से ज़्यादा लोग भुखमरी के कगार पर पहुँच गए हैं. विश्व खाद्य कार्यक्रम ने शुक्रवार को ये चेतावनी जारी की है.

गुमशुदाओं के परिजनों को सही सूचना और जवाब मिलना ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सशस्त्र संघर्षों और लड़ाई-झगड़ों में लापता हुए लोगों के मुद्दे पर पहली बार कोई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है. मंगलवार को पारित हुए इस प्रस्ताव को सभी 15 सदस्यों ने एकमत से मंज़ूरी दी. इस प्रस्ताव का उद्देश्य तमाम देशों को अपनी मानवीय और क़ानूनी जिम्मेदारियाँ पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करना है.

मोज़ाम्बिक के लिए 1.2 अरब डॉलर की मदद का संकल्प

तबाही लाने वाले चक्रवाती तूफ़ानों से प्रभावित मोज़ाम्बिक में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं ने 1.2 अरब डॉलर की मदद का संकल्प लिया है. बेयरा शहर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संकल्प सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मोज़ाम्बिक को नहीं भूलेगा.  

यमन में दुर्गम इलाक़ों में खाद्य सामग्री पहुँचाने में कामयाबी

यमन में लगातार गहराते जा रहे मानवीय संकट के हालात में संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले उत्तरी इलाक़े निह्म तक पहुँचने में कामयाबी हासिल की है. यमन में 2015 में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब द्वारा समर्थित सरकारी गठबंधन के बीच गृह युद्ध शुरू होने के बाद से ऐसा पहली बार संभव हो सका है.

तूफ़ानों से हुई तबाही से उबरने के लिए मोज़ाम्बिक को 3.2 अरब डॉलर की आवश्यकता

दो चक्रवाती तूफ़ानों से मोज़ाम्बिक में हुई भारी तबाही के बाद मदद जुटाने के उद्देश्य से बेयरा शहर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संकल्प सम्मेलन शुरू हुआ है. ‘इडाई’ और ‘कैनेथ’ नामक  तूफ़ानों से 18 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए, सैकड़ों लोगों की मौत हुई और बेयरा सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर था. इस बर्बादी से उबरने के लिए 3.2 अरब डॉलर की सहायता राशि का अनुमान लगाया गया है.

सीरिया में तबाही और तकलीफ़ों पर खून क्यों नहीं खौलता?

सीरिया में आठ वर्षों के गृहयुद्ध के दौरान जानलेवा हवाई हमलों और आतंकवादी हमलों ने लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया और लाखों अन्य को ज़ख़्मी छोड़ दिया. ऐसे हालात में संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत कार्यों की डिपुटी कॉर्डिनेटर उर्सुला मुएलर ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद के सामने एक चुभने वाला सवाल रखा – क्या से परिषद ऐसे हालात में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकती जब स्कूलों और अस्पतालों पर हमलों को युद्ध की एक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, फिर भी इस पर लोगों का ख़ून क्यों नहीं खौलता?

आम आबादी की सुरक्षा की हालत से गंभीर चिन्ता वाजिब - महासचिव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि आम आबादी की सुरक्षा के लिए उठाए गए क़दम तो पर्याप्त हैं मगर उन पर अमल करने करने की मंशा और अनुशासन में गिरावट आई है जो गंभीर चिन्ता का विषय है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बीस वर्ष पहले आम आबादी की सुरक्षा का मुद्दा अपने एजेंडा में शामिल किया था.

यमन में हिंसा का दंश झेल रहे हैं बच्चे

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख हेनरिएटा फ़ोर ने कहा है कि यमन में विकट परिस्थितियों में फंसे डेढ़ करोड़ से ज़्यादा बच्चे जीवन बचाने की गुहार लगा रहे हैं. सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य देशों को संबोधित करते हुए उन्होंने चार साल से चली आ रही लड़ाई को समाप्त करने के लिए ठोस प्रयासों की अपील की है.

ग़ाज़ा की नाकाबंदी से राहत सामग्री पर निर्भरता दस गुना बढ़ी

दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के लिए पवित्र रमज़ान के महीने के दौरान ग़ाज़ा में आधे से ज़्यादा संख्या ऐसे लोगों की है जो भोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर हैं. फ़लीस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) का कहना है कि नाकाबंदी के बाद से भोजन सामग्री पर निर्भरता में लगभग दस गुना बढ़ोत्तरी देखने को मिली है.