मानवीय सहायता

लेबनान को तत्काल सहायता मुहैया कराने में लगीं यूएन एजेंसियाँ

लेबनान की राजधानी बेरूत में मंगलवार को हुए घातक बम विस्फोट हज़ारों लोग घायल हुए और लाखों लोगों को बेघर भी होना पड़ा, तबाही के स्तर को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र ने प्रभावितों के लिये राहत कार्य तत्काल और बहुत तेज़ी से शुरू किये. संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसियों का व्यापक नैटवर्क एक जुट होकर राजधानी बेरूत में प्रभावित लोगों की मदद करने में लग गया है ताकि लोगों को फिर से उनके पैरों पर खड़ा किया जा सके. अगर आप भी बेरूत के लोगों की मदद करने के बारे में सोच रहे हैं तो हमने यहाँ यूएन एजेंसियों द्वारा किये जा रहे सहायता व राहत कार्यों के बारे में कुछ विवरण प्रस्तुत किया है और आप चाहें तो किस तरह योगदान कर सकते हैं.

लेबनान: जीवितों की तलाश के बीच विशाल ज़रूरतों की चेतावनी 

लेबनान के बेरूत शहर में भारी तबाही का सबब बनने वाले भीषण विस्फोट के बाद यूएन एजेंसियों ने शुक्रवार को कहा है कि मौजूदा हालात में ज़रूरतों का दायरा और स्तर बहुत व्यापक हैं और तत्काल व्यापक सहायता उपलब्ध करानी होगी. इस विस्फोट में अब तक 150 से ज़्यादा लोगों के मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग घायल व बेघर हुए हैं. राहत और बचाव अभियान के बीच हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. 

लेबनान: भीषण विस्फोट के पीड़ितों के लिये मानवीय सहायता के संगठित प्रयास

लेबनान की राजधानी बेरूत के बन्दरगाह में भीषण विस्फोट से हुई तबाही की व्यापकता जैसे-जैसे स्पष्ट हो रही है, प्रभावितों तक मदद पहुँचाने के प्रयास भी तेज़ हो रहे हैं. संकट की इस घड़ी में लेबनान में स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षमता मज़बूत करने के उद्देश्य से 20 टन मेडिकल सामग्री व आपूर्ति से भरा विमान बेरूत पहुँचा है. लेबनान में मानवीय राहत समन्वयक व यूएन प्रतिनिधि ने कहा है कि इस तबाही से उबरने के लिये लेबनान को वैश्विक समर्थन की ज़रूरत है. 

लेबनान: भीषण विस्फोट के बाद अस्पतालों की मदद करना यूएन की शीर्ष प्राथमिकता

संयुक्त राष्ट्र  लेबनान की राजधानी बेरूत में मंगलवार को हुए भीषण विस्फोट के बाद स्थानीय प्रशासन को राहत अभियान में नज़दीकी सहयोग प्रदान कर रहा है. बेरूत के बन्दरगाह पर हुए इस धमाके से पूरा शहर थरथरा उठा और अनेक इलाकों में व्यापक नुक़सान हुआ है. अब तक इस घटना में 130 लोगों की मौत हुई है, हज़ारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं.     

दक्षिण एशियाई देशों में विनाशकारी बाढ़ से लाखों बच्चे प्रभावित

बांग्लादेश, भारत और नेपाल में कई हफ़्तों से हो रही मूसलाधार बारिश, बड़े पैमाने पर आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के कारण लाखों बच्चे और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के मुताबिक 40 लाख से ज़्यादा बच्चों को तत्काल जीवनरक्षक सहायता प्रदान किये जाने की ज़रूरत है और मौजूदा हालात में अन्य लाखों बच्चों पर भी जोखिम मंडरा रहा है. 

बांग्लादेश, भारत और नेपाल में बाढ़ से हालात विकट

बांग्लादेश में बाढ़ से बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित हुआ है और हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है. भारत के असम राज्य और पड़ोसी देश नेपाल में भी मॉनसून की बारिश के बाद बाढ़ से हालात गम्भीर हैं. 40 लाख से ज़्यादा लोग अभी तक विस्थापित हुए हैं और 189 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है. 
 

कोविड-19: निर्बल देशों में विनाशकारी संकटों से बचने के लिये सहायता बढ़ाने का आहवान

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 और उससे उपजी आर्थिक मन्दी के कारण पिछले तीन दशकों में पहली बार वैश्विक ग़रीबी में वृद्धि दर्ज किये जाने की आशंका प्रबल हो गई है. मानवीय राहत मामलों में समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCHA) के प्रमुख मार्क लोकॉक ने एक चेतावनी जारी करते हुए इस वर्ष के अन्त तक 26 करोड़ से ज़्यादा लोगों के भुखमरी के कगार पर पहुँच जाने का ख़तरा व्यक्त किया है और जी-20 समूह के देशों से ठोस कार्रवाई करने की पुकार लगाई है.

सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित – सीरिया को मदद की अवधि बढ़ी

तुर्की से सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े में मानवीय राहत पहुँचाने की व्यवस्था जारी रखने के लिए एक अहम प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में शनिवार को पारित किया गया है. प्रस्ताव 2533 के ज़रिये बाब अल-हावा सीमा चौकी से होकर अगले एक वर्ष तक भोजन, दवाएँ और अन्य जीवनरक्षक सामग्री  ज़रूरतमन्दों तक भेजी जानी सम्भव हो सकेगी. मानवीय राहत पहुँचाने के लिए बाब अल-हावा एक अहम पड़ाव है जहाँ से इदलिब तक सहायता सामग्री पहुँचाई जा सकती है. 

सीरिया: जीवनरक्षक मानवीय राहत जारी रखने के लिए अनुमति अधर में

तुर्की से पश्चिमोत्तर सीरिया में भोजन और जीवनदायी मानवीय राहत पहुँचाने के लिए समयसीमा शुक्रवार को समाप्त हो रही है लेकिन सुरक्षा परिषद में इस अवधि को बढ़ाने के लिए इस सप्ताह तीसरा प्रयास भी विफल हो गया. 

 

अफ़ग़ानिस्तान - 40 वर्षों के संघर्ष की मार

अफ़ग़ानिस्तान के लोग 40 से अधिक वर्षों से भीषण संघर्ष से जूझ रहे हैं. इससे अब तक 46 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं. 

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर अफ़ग़ानिस्तान में विश्व बैंक, पाकिस्तान व ईरान जैसे पड़ोसी देशों के साथ मिलकर लाखों विस्थापितों की मदद करने में जुटी है.  एक वीडियो फ़ीचर...