मानवाधिकार

मानव तस्करों ने, अदन की खाड़ी में, प्रवासियों को समुन्दर में फेंका, कम से कम 20 की मौत

संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन मामलों सम्बन्धी एजेंसी -IOM ने गुरूवार को कहा है कि जिबूती से यमन को जाने वाले रास्ते में, मानव तस्करों ने, नाव में सवार अनेक प्रवासियों को समुन्दर में फेंक दिया जिसके कारण, कम से कम 20 लोगों की डूबकर मौत हो गई.

‘महामारी’ के रूप में उभरती मुस्लिम-विरोधी नफ़रत, कार्रवाई का आग्रह 

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा है कि इस्लाम के नाम पर किये गए  11 सितम्बर, 2001 के हमलों और अन्य भयावह आतंकवादी कृत्यों को अंजाम दिये जाने के बाद से, मुसलमानों को संदिग्ध नज़र से देखे जाने की समस्या महामारी का आकार ले रही है. धर्म या आस्था की आज़ादी पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर अहमद शहीद ने, गुरुवार को, मानवाधिकार परिषद को सम्बोधित करते हुए, देशों का आहवान किया है कि मुसलमानों के साथ भेदभाव पर अंकुश लगाने के लिये उपाय सुनिश्चित किये जाने होंगे. 

म्याँमार: सेना से प्रदर्शनकारियों की 'हत्याएँ' और 'क्रूर बल प्रयोग' रोकने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने गुरूवार को कड़े शब्दों में कहा है कि म्याँमार में सेना को, शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अपना “क्रूर और हिंसक दमन” रोकना होगा. मानवाधिकार उच्चायुक्त का ये सख़्त बयान ऐसी ख़बरों को बीच आया है कि 1 फ़रवरी को सेना द्वारा तख़्तापलट किये जाने के बाद 54 लोग मारे जा चुके हैं, इनमें से 38 लोगों की मौत, बुधवार को केवल एक दिन में हुई है.

म्याँमार: विरोध प्रदर्शनों के दौरान, एक दिन में, 38 लोगों की मौत ‘स्तब्धकारी’ 

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत, क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने बुधवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि देश में हालात से क्षेत्रीय स्थिरता के लिये चुनौती पैदा हो रही है, और मौजूदा संकट वास्तव में एक युद्ध में तब्दील हो सकता है. म्याँमार में सेना द्वारा सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने के बाद जारी विरोध प्रदर्शनों में, बुधवार को 38 लोगों की मौत हुई है. 

सीरिया: जेलों में बन्द लाखों आम लोगों का भाग्य अब भी अनिश्चित

संयुक्त राष्ट्र के जाँचकर्ताओं ने कहा है कि सीरिया में गृहयुद्ध को 10 वर्ष से भी अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब भी वहाँ की कुख्यात जेलों या बन्दीगृहों में रखे गए, लाखों आम लोगों का भविष्य और भाग्य स्पष्ट नहीं है.

बांग्लादेश: हिरासत में रखे गए लेखक की मौत की पारदर्शी जाँच की माँग 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने बांग्लादेश में अदालती कार्रवाई शुरू होने से पहले, 9 महीने तक हिरासत में रखे गए एक लेखक मुश्ताक़ अहमद की मौत की पारदर्शी जाँच कराए जाने की मांग की है. लेखक मुश्ताक़ अहमद को कोविड-19 पर सरकार की जवाबी कार्रवाई की आलोचनात्मक टिप्पणियाँ, सोशल मीडिया पर साझा करने और एक लेख प्रकाशित करने के लिये हिरासत में लिया गया था. 

म्याँमार: प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा की निन्दा, 'बुनियादी अधिकारों का सम्मान हो'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने म्याँमार में बढ़ती हिंसा की कड़े शब्दों में निन्दा की है और बल प्रयोग पर तत्काल रोक लगाए जाने की माँग की है. म्याँमार में सेना द्वारा सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने के बाद, विरोध-प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 18 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है.  

मलेशिया: प्रवासियों को म्याँमार वापिस भेजे जाने के फ़ैसले की आलोचना

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने, हिरासत में रखे गए, एक हज़ार से ज़्यादा प्रवासियों को, संकटग्रस्त म्याँमार वापिस भेजे जाने के मलेशियाई सरकार के फ़ैसले की आलोचना की है. मलेशिया की एक अदालत ने न्यायिक समीक्षा होने तक, प्रवासियों को देश वापिस भेजे जाने रोक लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद इन प्रवासियों को निर्वासित किया गया है. 

कोविड-19: पुनर्बहाली सर्वजन के लिये मानवाधिकार सुनिश्चित करने का ‘ऐतिहासिक अवसर’

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सचेत किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया भर में मानवाधिकारों को नुक़सान पहुँचा है, लेकिन महामारी से पुनर्बहाली की प्रक्रिया, यथास्थितिवाद को पीछे छोड़ने और सर्वजन के लिये गरिमा सुनिश्चित करने का एक अवसर है. यूएन प्रमुख ने वर्ष 2020 में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिये कार्रवाई किये जाने की पुकार लगाई, जिसके एक वर्ष बाद महासभा में, उन्होंने देशों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया है.

ग्वान्तनामो बन्दीगृह में मानवाधिकार हनन के मामलों पर ध्यान देने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा है कि अमेरिका सरकार द्वारा, क्यूबा में कुख्यात ग्वान्तनामो बे बन्दीगृह को बन्द करने पर विचार किये जाने की घोषणा के बाद, यह भी ज़रूरी है कि वहाँ अब भी बन्द लगभग 40 क़ैदियों के ख़िलाफ़ हो रहे मानवाधिकार हनन के मामलों पर ध्यान दिया जाय.