मानवाधिकार

विधवाओं को क़तई बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस के अवसर पर कहा है कि विधवाओं के नाज़ुक हालात के बारे में सभी को संवेदनशील तरीक़े से सोचना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि उनकी आर्थिक व भावनात्मक मुश्किलें कहीं उनके लिए और ज़्यादा मुश्किलें ना पैदा कर दें. अंतरराषट्रीय विधवा दिवस हर वर्ष 23 जून को मनाया जाता है. इस मौक़े पर महासचिव ने सभी का आहवान करते हुए कहा कि ये सभी इंसानों की ज़िम्मेदारी है कि विधवाएं कहीं अकेली और बेसहारा ना रह जाएँ और उन्हें पीछे ना छोड़ दिया जाए.

कार्यस्थलों पर हिंसा और उत्पीड़न पर रोक लगाने वाला ऐतिहासिक समझौता पारित

कार्यस्थल पर कर्मचारियों के साथ हिंसा और उत्पीड़न पर पाबंदी लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता पारित हो गया है. जिनीवा में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के शताब्दी सम्मेलन के दौरान इस समझौते की घोषणा हुई जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सदस्य देशों और अन्य हिस्सेदारों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है.

खशोगी हत्या मामले में सघन जाँच की माँग

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र मानवाधिकार जाँचकर्ता ने कहा है कि सऊदी अरब मूल के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की ज़िम्मेदारी देश के सत्तारूढ़ शाही परिवार के उच्च स्तरीय अधिकारियों पर है.

स्वतंत्र मानवाधिकार जाँचकर्ता ने हत्या के इस अपराध में सऊदी अरब की सरकार को ज़िम्मेदारी ठहराने का आहवान किया है.

'नफ़रत को नोटिस मिल चुका है' - निपटने के लिए नई रणनीति

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नफ़रत फैलाने वाले संदेशों और भाषणों यानी हेट स्पीच पर धावा बोलते हुए सदस्य देशों का आहवान किया है कि सभी को बहुत ज़्यादा मुस्तैदी से काम लेना होगा. मंगलवार को हेट स्पीच पर संयुक्त राष्ट्र की रणनीति और कार्य योजना शुरू करते हुए उन्होंने कहा, “हेट स्पीच को अपने पैर जमाने के लिए कुछ ज़मीन मिल गई है मगर इसे अब नोटिस भी मिल चुका है.”

वृद्धों पर यौन हमले सभ्य समाजों के माथे पर कलंक

वृद्धावस्था में अक्सर लोगों के साथ ख़राब बर्ताव होने के मामले तो पूरी दुनिया में सामने आते हैं मगर उनका यौन शोषण होने के मामले होते तो हैं लेकिन उनका अक्सर पता नहीं चलता. वृद्ध लोगों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शनिवार, 15 जून को विश्व दिवस (World Elder Abuse Awareness Day) मनाया जा रहा है.

सूडान में प्रदर्शनकारियों के साथ बलात्कार की रिपोर्टों पर चिंता

हिंसा और संघर्ष के दौरान यौन हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने सूडान की राजधानी खार्तूम में लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों के विरुद्ध सुरक्षा बलों की कार्रवाई और बलात्कार की रिपोर्टों पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने सैन्य मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा को तत्काल रोके जाने का आग्रह किया है.

रंगहीनता वाले लोगों को चाहिए सामान्य बर्ताव

एल्बीनिज़म यानी रंगहीनता की स्थिति वाले लोगों को अपने जीवन में बहुत से अवरोधों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिससे उनके मानवाधिकार कमज़ोर होते हैं. अंतरराष्ट्रीय एल्बीनिज़्म यानी रंगहीनता जागरूकता दिवस इस स्थिति वाले लोगों को पहचानने, उनके साथ एकजुटता दिखाने और उनके लिए समर्थन जुटाने का एक अवसर है.

यूनीसेफ़ प्रमुख ने सूडान में हिंसा तत्काल रोके जाने की अपील की

सूडान में लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों के विरूद्ध सुरक्षा बलों की कार्रवाई की चपेट में आने से अब तक 19 बच्चों की के मारे जाने की रिपोर्टें है और 49 घायल हुए हैं. लोकतंत्र समर्थकों और अंतरिम सैन्य परिषद में बातचीत विफल होने के बाद सुरक्षा बलों ने इस महीने के शुरू में कार्रवाई शुरू की. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने देश में हिंसा के जारी रहने और उसके बच्चों और युवाओं पर पड़ रहे असर पर गहरी चिंता जताई है.

लीबिया: शरणार्थी और प्रवासी 'भयावह हालात' में रहने को मजबूर

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने चिंता जताई है कि टीबी जैसी घातक बीमारी से पीड़ित प्रवासियों और शरणार्थियों को लीबिया की राजधानी त्रिपोली के एक हिरासत केंद्र में मरने के लिए छोड़ा जा रहा है. लीबिया में राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के बीच प्रवासी और शरणार्थी बेहद विकट परिस्थितियों में रह रहे हैं.

15 साल की उम्र से पहले हुआ दो करोड़ लड़कों का विवाह

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व भर में 11.5 करोड़ लड़कों और पुरुषों का विवाह बचपन में ही कर दिया गया. इनमें 2.3 करोड़ लड़कों की शादी 15 साल का होने से पहले ही कर दी गई. यह पहली बार है जब बाल दूल्हों की समस्या का नज़दीकी सेअध्ययन किया गया है. जो बच्चे इस समस्या का शिकार हुए वे निर्धनतम परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और पढ़े-लिखे नहीं होते.