मानवाधिकार

कोविड-19: एशियाई देशों से अभिव्यक्ति की आज़ादी को नहीं दबाने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के दर्जन से भी ज़्यादा देशों ने कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों के तहत अभिव्यक्ति की आज़ादी को भी दबाया है जो बहुत चिन्ताजनक है. 

कोविड-19: भेदभाव के कारण अल्पसंख्यकों पर दहला देने वाला असर

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि इस बारे में तुरन्त ठोस क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है कि नस्लीय व जातीय अल्पसंख्यकों पर वैश्विक स्वास्थ्य महामारी कोविड-19 के ग़ैर-आनुपातिक असर ना हो. मानवाधिकार उच्चायुक्त ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 महामारी ने कुछ देशों में चेता देने वाली असमानताएँ उजागर कर दी हैं:

अमेरिका में प्रदर्शनों पर सभी से संयम बरतने की अपील

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने अमेरिका के अनेक शहरों में जारी विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की वो अपील दोहराई है कि किसी भी तरह की शिकायतें शान्तिपूर्ण तरीक़ों से सुनी जानी चाहिए, साथ ही पुलिस व सुरक्षा बलों को भी और ज़्यादा संयम दिखाना होगा. ध्यान रहे कि कुछ स्थानों पर इन प्रदर्शनों के सन्दर्भ में अनेक पक्षों की तरफ़ से हिन्सा भी हुई है.

नेपाल में जातिगत भेदभाव के उन्मूलन के लिए 'और ज़्यादा प्रयासों की ज़रूरत'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार (OHCHR) प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने नेपाल में पिछले सप्ताहान्त कथित रूप से अगड़ी जाति की युवती के साथ प्रेम सम्बन्ध के मामले में पाँच लोगों की मौत पर गहरा दुख जताया है. यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने ध्यान दिलाया है कि जाति-आधारित भेदभाव का अन्त किया जाना टिकाऊ विकास एजेण्डे में किसी को भी पीछे ना छूटने देने के लिए बेहद अहम है.

कोविड-19: प्रवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा की पुकार

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों नें सभी देशों से प्रवासियों और उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा करने का आहवान किया है. उन्होंने ध्यान दिलाया कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान और उसके बाद भी प्रवासियों के दर्जे की परवाह किए बग़ैर उनके मानवाधिकार सुनिश्चित किए जाने होंगे.

कोविड-19: स्वास्थ्य मुश्किलों से परे भी जाती है आदिवासी समुदायों की पीड़ा

वैश्विक महामारी कोविड-19 के दन्श से दुनिया के आदिवासी समुदाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और इस बीमारी के नकारात्मक प्रभाव महज़ उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले तात्कालिक असर तक ही सीमित नहीं है. आदिवासी व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के नए स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ खोसे फ़्रांसिस्को काली ज़ाई ने सोमवार को उनकी मुश्किलों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि उनके जीवन-यापन के लिए ज़रूरी संसाधनों के लिए भी संकट खड़ा हो रहा है.

एलजीबीटीआई: भेदभाव व नफ़रत के ख़िलाफ़ एकजुटता का आहवान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोविड-19 महामारी के दौरान एलजीबीटीआई लोगों के साथ भेदभाव और नफ़रत की घटनाओं पर क्षोभ ज़ाहिर करते हुए उनके आज़ाद व समान अधिकारों के साथ जीवन के अधिकार के प्रति समर्थन जताया है. यूएन प्रमुख ने 'होमोफ़ोबिया, बाइफ़ोबिया और ट्राँसफ़ोबिया के ख़िलाफ़ अन्तरराष्ट्रीय दिवस' पर एलजीबीटीआई समुदाय के लिए गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने और हिंसा व यातना से संरक्षण की पुकार लगाई है. 

पाबन्दियाँ हटाने में सावधानी, नहीं तो बढ़ सकता है विनाश

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कोविड-19 वायरस के फैलाव को नियन्त्रित करने के लिए लागू की गई पाबन्दियाँ और तालाबन्दी को हटाने के सम्भावित ख़तरों के प्रति आगाह किया है. ध्यान रहे कि कुछ देश ये पाबन्दियाँ और तालाबन्दी हटाने पर विचार कर रहे हैं.

भोपाल जैसी त्रासदियों की रोकथाम के लिए 'मानवाधिकारों पर काम करे' रसायन उद्योग जगत

संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ मानवाधिकार विशेषज्ञ बास्कुट तुनचक ने कहा है कि भारत में पिछले सप्ताह एक रासायनिक संयन्त्र (कैमिकल प्लान्ट) में घातक गैस का रिसाव होना रसायन उद्योग जगत को नीन्द से जगा देने वाली घण्टी है. उन्होंने आगाह किया है कि मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए व्यवसायों को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी. 7 मई को आन्ध्र प्रदेश राज्य के विशाखापट्टनम शहर के पास स्थित एक रसायन फ़ैक्ट्री से स्टायरीन गैस रिस जाने से 12 लोगों की मौत हो गई थी और एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी. 

कोविड-19: जवाबी कार्रवाई और वैश्विक एकजुटता में धर्मगुरुओं की अहम भूमिका

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 की आँच में झुलस रही दुनिया को राहत दिलाने में धार्मिक नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन चार प्रमुख क्षेत्रों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है जिनमें एकजुट कार्रवाई को बढ़ावा देने में धर्मगुरू अपना सहयोग दे सकते हैं.