अफ़ग़ानिस्तान

अफीम का पौधा अफ़ग़ानिस्तान में व्यापक रूप से उगाया जाता है.
Oneclearvision

अफ़ग़ानिस्तान: अफ़ीम की खेती में एक तिहाई वृद्धि, मुनाफ़ा व क़ीमतें भी बढ़े

संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स व अपराध निरोधक कार्यालय - UNODC ने मंगलवार को कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान अलबत्ता, तालेबान के शासन और मानवीय व आर्थिक संकटों के दौर का सामना कर रहा है, इसके बावजूद इस वर्ष अफ़ीम (Opium) की फ़सल अनेक वर्षों की तुलना में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है और उसकी क़ीमतें भी बढ़ी हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में, मौजूदा मानवीय संकट से, महिलाएँ व बच्चे, सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं.
UNAMA/Shamsuddin Hamedi

अफ़ग़ानिस्तान: दस साल का आर्थिक विकास, केवल 12 महीनों में उलट गया

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के शासन की एक साल की अवधि में, देश की अर्थव्यवस्था सिलसिलेवार संकटों से गुज़र रही है, जिसे केवल मानवीय सहायता से नहीं सुलझाया जा सकता है.

17 वर्षीय मुरसल फासिही को अफगानिस्तान में माध्यमिक विद्यालय में जाने की अनुमति नहीं है
UNFPA Afghanistan

अफ़ग़ानिस्तान: आपबीती - जबरन स्कूल से बाहर होने के बावजूद शिक्षा छोड़ने से इनकार

अफ़ग़ानिस्तान में अगस्त 2021 में तालेबान की सत्ता वापसी के बाद से, प्रशासन ने 12 से 18 साल की लड़कियों को घर पर ही रहने और उनकी शिक्षा रोकने का आदेश जारी किया था. संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक कार्यक्रम की मदद से लड़कियों को इस परिस्थिति में प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यहाँ लड़िकयाँ अपनी साथियों को तब तक की शिक्षा के लिये तैयार कर रही हैं जब तक कि औपचारिक स्कूली शिक्षा में उनकी वापसी नहीं हो जाती.

काबुल में एक तेरह वर्षीय लड़की घर पर पढ़ती हुई, जब तालिबान ने घोषणा की थी कि 7-12 ग्रेड में अफगान लड़कियों के लिए स्कूल फिर से नहीं खुलेंगे.
UNICE/Mohammad Haya Burhan

अफगानिस्तान: तालेबान से हाई स्कूल छात्राओं की शिक्षा फिर शुरू किये जाने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर क़ाबिज़ तालेबान से आग्रह किया है कि माध्यमिक स्तर पर लड़कियों की स्कूलों में जल्द से जल्द वापसी सुनिश्चित की जानी होगी. तालेबान द्वारा हाई स्कूल छात्राओं की पढ़ाई रोकने के लिये सरकारी आदेश जारी किये जाने का एक वर्ष पूरा होने पर महासचिव की ओर से यह अपील जारी की गई है. 

कुछ महिलाएँ अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन (IOM) के एक मनोसामाजिक काउंसलर द्वारा आयोजित एक सत्र में, एक दूसरे के हाथों में हाथ थामे हुए - लम्बी साँस खींंचते हुए.
Photo: IOM/Léo Torréton

आपबीती: अफ़ग़ान महिलाओं को सदमों से उबरने में मदद का सिलसिला

*नजीबा, एक माँ हैं, एक काउंसलर हैं, विश्वविद्यालय में लैक्चरर रह चुकी हैं, वो अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं को सदमों से उबरने में मदद करती हैं...

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में पुल-ए-ख़ेश्ती मस्जिद.
UNAMA/Freshta Dunia

अफ़ग़ानिस्तान: काबुल मस्जिद में घातक हमले की निन्दा, अनेक हताहत

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने राजधानी काबुल में गुरूवार को हुए एक घातक हमले की निन्दा की है.

अफ़ग़ानिस्तान के हेरान्त प्रान्त में एक ऐतिहासिक मस्जिद के पास से गुज़रती दो महिलाएँ.
UNAMA

आपबीती: अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन; दिल टूटा है, लेकिन उम्मीद क़ायम

ज़रीना* एक युवा अफ़ग़ान महिला उद्यमी हैं. नवाचार के जज़्बे और बेकिंग के जुनून के कारण, आज वो अफ़ग़ानिस्तान की सबसे युवा उद्यमियों में से एक हैं. उनका व्यवसाय अभी भी चल रहा है, लेकिन ग्राहक मुश्किल से ही मिल पा रहे हैं. साथ ही, व्यवसाय के विस्तार की उनकी योजना भी अधर में लटक गई है.

अफ़ग़ानिस्तान के बाल्ख़ प्रान्त में, एक बाज़ार में, महिलाएँ अपना सामान बेचते हुए.
© WFP/Julian Frank

आपबीती: ‘अफ़ग़ान औरतें अब भी संघर्षरत हैं. और मैंने उनमें शामिल रहने का रास्ता चुना है.

36 वर्षीय नसीमा* अफ़ग़ानिस्तान में एक शान्ति निर्मात्री और महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं. अगस्त 2021 में तालेबान द्वारा देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने के बाद से, नसीमा देश में ही रहकर काम कर रही हैं, जबकि देश के हालात दुनिया की सर्वाधिक जटिल मानवीय आपदाओं में शामिल होते जा रहे हैं. नसीमा की आपबीती...

अफ़ग़ानिस्तान में आए भीषण भूकम्प में, सात वर्षीया आयशा का पूरा परिवार ख़त्म हो गया.
© UNICEF/Ali Nazari

अफ़ग़ानिस्तान: महिला अधिकारों की चिन्ताजनक स्थिति, दृढ़ समर्थन व सहायता की पुकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय उच्चायुक्त (OHCHR) मिशेल बाशेलेट ने अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं व लड़कियों के मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर क्षोभ व्यक्त करते हुए, उनकी सहायता के लिये तत्काल, दृढ़ कार्रवाई की पुकार लगाई है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि जल्द हालात नहीं बदले, तो देश में महिलाओं का भविष्य और अधिक अंधकामरय हो जाने की आशंका है.

अफ़ग़ानिस्तान के पक्तिका और ख़ोस्त प्रान्तों में 5.9 तीव्रता वाले भूकम्प के बाद हुए व्यापक विनाश के बाद, बहुत से लोगों को प्लास्टिक की चादरों से बने शिविरों में सोना पड़ रहा है, जिनमें बच्चे भी हैं.
© UNICEF/Ali Nazari

अफ़ग़ानिस्तान: घातक भूकम्प के बाद, देशों से मदद बढ़ाने की पुकार

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी डॉक्टर रमीज़ अल अकबरोफ़ ने देश में बीते सप्ताह आए विनाशकारी भूकम्प से बुरी तरह प्रभावित समुदायों का एक दिवसीय दौरा करने के बाद रविवार को, देश के लिये अधिक से अधिक अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की गुहार लगाई.