रोहिंज्या शरणार्थी संकट

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मुझे इसमें क़तई सन्देह नहीं है कि रोहिंज्या लोग दुनिया भर में सबसे ज़्यादा भेदभाव का शिकार हुए समुदायों में से एक रहे हैं. उनके बिल्कुल बुनियादी अधिकारों को भी पहचान और मान्यता नहीं मिली है, यहाँ तक कि उनके अपने देश मयनमार ने रोहिंज्या लोगों के नागरिकता के अधिकार को भी स्वीकार नहीं किया है.

बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों का 2 जुलाई 2018 को दौरा करने के दौरान प्रेस से बातचीत में महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश.

एक नज़र में

मयनमार के रख़ाइन प्रान्त में अगस्त 2017 में भड़की हिंसा की वजह से एक गम्भीर मानवीय संकट पैदा हो गया जिसने लाखों रोहिंज्या लोगों के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है. मई 2018 तक ही नौ लाख से ज़्यादा रोहिंज्या लोग शरणार्थी के रूप में बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार पहुँच चुके हैं. जिस रफ़्तार से रोहिंज्या लोगों को मयनमार से सुरक्षा की तलाश में बांग्लादेश पहुँचे हैं, उसे देखकर ये दुनिया भर में सबसे तेज़ी से बढ़ता शरणार्थी संकट बन गया है. शरणार्थियों की भारी संख्या के मद्देनज़र कॉक्सेस बाज़ार का शरणार्थी शिविर दुनिया भर में सबसे ज़्यादा घनी आबादी वाला इलाक़ा बन गया है. बांग्लादेश पहुँचने वाले शरणार्थियों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं और सभी बहुत सदमे में हैं. कुछ रोहिंज्या शरणार्थी तो ज़ख़्मी हालत में बांग्लादेश पहुँच रहे हैं. ये ज़ख़्म उन्हें बन्दूकों की गोलियों, छर्रों, आगज़नी और बारूदी सुरंगों की वजह से मिले हैं.

रोहिंज्या संकट पर जाँच दल की रिपोर्ट

मयनमार पर स्वतंत्र जाँच दल की रिपोर्ट - A/HRC/39/64

24 मार्च 2017 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने मयनमार में सेना और सुरक्षा बलों द्वारा रोहिंज्या लोगों के मानवाधिकारों के कथित तौर पर बड़े पैमाने पर उल्लंघन और उनके साथ क्रूर ज़्यादतियों के हालात और तथ्यों की जाँच के लिए एक अन्तरराष्ट्रीय स्वतंत्र जाँच दल भेजने का निर्णय लिया. ये विशेष रूप से रख़ाइन प्रान्त में हुआ. रोहिंज्या मुसलमानों के साथ ये ज़्यादतियाँ मनमाने तरीक़े से गिरफ़्तारियाँ, प्रताड़ना और अमानवीय बर्ताव, लड़कियों और महिलाओं के साथ बलात्कार और अन्य तरीक़े की यौन हिंसा के रूप में हुईं. जाँच दल को ये ज़िम्मेदारी सौंपी गई कि वो रोहिंज्या लोगों के साथ इस अमानवीय व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार पक्षों की निशानदेही करके पीड़ितों के लिए न्याय का रास्ता भी बताए. इस जाँच दल को अपनी मौखिक रिपोर्ट 36वें सत्र में और लिखित व विस्तृत रिपोर्ट 37वें सत्र में पेश करने का अनुरोध किया.  

मानवीय नज़रिया

रोहिंज्या लोगों की तकलीफ़ों पर मानवीय नज़रिया

© UNHCR/Andrew McConnell

रोहिंज्या लोगों की स्थिति को इतिहास में सबसे बदतर बताया गया है कि उन्हें अपने ही देश म्याँमार में नागरिकता और बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा गया है.

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