यमन: अंसार अल्लाह गुट पर अमेरिकी कार्रवाई से अकाल की आशंका

14 जनवरी 2021

संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिका द्वारा, यमन में हूथी विद्रोहियों के अंसार अल्लाह गुट को एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किये जाने के निर्णय से मौजूदा मानवीय संकट के और ज़्यादा गहराने की आशंका जताई है. यूएन के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद की एक वर्चुअल बैठक के दौरान आगाह किया है कि यमन एक स्याह दौर से गुज़र रहा है.  

ग़ौरतलब है कि यमन में दिसम्बर, 2020 में, नवगठित कैबिनेट पर घातक हमला हुआ था और लाखों लोगों के सामने अकाल की चुनौती भी मँडरा रही है. 

यूएन दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने भरोसा दिलाया कि इन हालात के बावजूद शान्ति अब भी बहाल की जा सकती है. 

उन्होंने 30 दिसम्बर को अदन हवाई अड्डे पर हुए हमले की निन्दा की है जिसमें सऊदी अरब से आए सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया गया. इस हमले में अनेक आम लोगों, राहतकर्मियों और एक पत्रकार की मौत हुई थी.  

“सरकार ने अदन हमले की जाँच शुरू की थी और गुरूवार को इसके निष्कर्ष सार्वजनिक किये हैं कि इस हमले के पीछे अंसार अल्लाह का हाथ है.”

शान्ति प्रयासों पर असर

पाँच वर्षों से ज़्यादा समय से यमन में अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार और हूथी विद्रोहियों के बीच हिंसक संघर्ष जारी है. यमन सरकार को सऊदी नेतृत्व वाले गठबन्धन से समर्थन हासिल है. 

अमेरिका ने, रविवार, 10 जनवरी 2021 को घरेलू क़ानून के अन्तर्गत अंसार अल्लाह गुट को विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किये जाने की घोषणा की थी. 

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा कि उनके मिशन को चिन्ता है कि इस घोषणा के बाद से सभी पक्षों को एक साथ लाने के प्रयासों पर असर होगा. 

यमन में दुनिया का सबसे ख़राब मानवीय संकट है. राहत कार्यों के लिये धनराशि के अभाव के बीच एक करोड़ 60 लाख से ज़्यादा लोगों के भुखमरी का शिकार होने की आशंका है.

मानवीय राहत मामलों के लिये संयुक्त राष्ट्र अधिकारी और आपात राहत समन्वयक मार्क लोकॉक ने ज़ोर देकर कहा है कि देश में व्यापक स्तर पर अकाल की रोकथाम करना तात्कालिक प्राथमिकता है. 

उन्होंने आतंकवादी गुट के रूप में चिन्हित किये जाने की घोषणा को पलटने की अपील की है, और मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने भी इसका समर्थन किया है.

मार्क लोकॉक ने ध्यान दिलाया कि इस निर्णय से देश में उन राहत कार्यक्रमों पर असर होगा जोकि भोजन के आयात पर काफ़ी हद तक निर्भर है.

बदहाल हालात

रिपोर्टों के अनुसार मौजूदा हालात से आशंकित यमनी नागरिक बाज़ारों में जाकर खाद्य सामग्री जुटा रहे हैं जबकि व्यापारियों ने आशंका जताई है कि अमेरिका के इस फ़ैसले का उनके कामकाज पर असर पड़ेगा.

उनके मुताबिक आपूर्तिकर्ता, बैंक, बीमा सेवाएँ और जहाज़रानी उद्योग से जुड़े लोग यमनी साझीदारों को फोन करके वहाँ से कारोबार समेटने की बात कह रहे हैं. 

उनका मानना है कि जोखिम ज़्यादा है और वे अमेरिका द्वारा नियामन कार्रवाई में नहीं फँसना चाहते, चूँकि इससे उनके व्यापार पर असर पड़ने या उनके जेल जाने की आशंका है.

अमेरिका ने कहा है कि कुछ राहत कार्य व आयात जारी रखने के लिये लाइसेंस दिये जाने की योजना है, लेकिन इस सम्बन्ध में अभी कोई विवरण उपलब्ध नहीं है जबकि 19 जनवरी 2021 से ताज़ा घोषणा लागू हो जाएगी. 

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के प्रमुख डेविड बीज़ली ने भी कहा है कि हूथी विद्रोहियों या अंसार अल्लाह को आतंकवादी गुट के रूप में चिन्हित किये जाने की घोषणा से पहले ही राहत कार्यों में मुश्किलें आ रही थीं. 

इस घोषणा के बाद हालात और विनाशकारी होने की आशंका है जोकि लाखों लोगों के लिये मृत्युदण्ड के समान होंगे. इसके मद्देनज़र उन्होंने इस फ़ैसले की फिर से समीक्षा किये जाने और इसे पलटे जाने का अनुरोध किया है.

 

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