यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों की नस्लभेद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक पुकार

15 जून 2020

संयुक्त राष्ट्र के अफ्रीकी या अफ्रीकी मूल के लगभग 20 बहुत वरिष्ठ पदाधिकारियों के एक समूह ने एक ऐसे वक्तव्य पर अपनी निजी हैसियत में हस्ताक्षर किए हैं जिसमें लम्बे समय से और बहुत गहराई से जारी नस्लभेद पर अपनी हताशा ज़ाहिर करते हुए निन्दा करने से भर से कहीं आगे बढ़कर और ज़्यादा कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है. शुक्रवार को जारी इस वक्तव्य पर दस्तख़त करने वाले ये वरिष्ठ पदाधिकारी सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश को रिपोर्ट करते हैं.

हस्ताक्षरकर्ताओं में संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न बड़ी एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल हैं जिनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रोस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस, यूएन एड्स की महानिदेशक विनिया ब्यानयीमा और संयुक्त राष्ट्र की यौन व प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी – यूएनएफ़पीए की अध्यक्ष नतालिया कानेम भी शामिल हैं.

ये वक्तव्य या सम्पादकीय अफ्रीकी मूल के एक काले व्यक्ति जियॉर्ज फ़्लॉयड की मौत से उठे विवाद पर लिखा गया है.

ध्यान रहे कि 25 मई को मिनियापॉलिस में एक पुलिस अधिकारी ने अपना घुटना बहुत दबाव के साथ आठ मिनट से भी ज़्यादा देर तक जियॉर्ज फ़्लॉयड की गर्दन पर टिकाए रखा जिसके कुछ देर बाद पुलिस हिरासत में ही फ़्लॉयड की मौत हो गई थी.

इस सम्पादकीय में लिखा गया है, “अपनी दिवंगत माँ से असहाय गुहार… साँस लेने के लिए तड़प. दया की भीख. पूरी दुनिया में उस दुखद पुकार की आवाज़ सुनी गई.”

इस वक्तव्य में गहरी पीड़ा और पीढ़ियों से जारी तकलीफ़ों का भी ज़िक्र किया गया है जो विशेष रूप से अफ्रीकी मूल के लोगों के ख़िलाफ़ नस्लीय अन्याय के परिणाम स्वरूप जारी रहे हैं. 

निजी हैसियत में लिखे गए इस सम्पादकीय में पुकार लगाई गई है कि अब वक़्त आ गया है कि नस्लवादी गतिविधियों की केवल निन्दा भर कर देने के बजाय कहीं ज़्यादा ठोस कार्रवाई की जाए. उन्होंने नस्लवाद को एक ऐसा अभिशाप क़रार दिया है जिसे सदियों से अंजाम दिया जाता रहा है. 

अब क़दम बढ़ाने का समय

संयुक्त राष्ट्र के इन वरिष्ठ नेताओं ने इस विश्व संगठन से अफ्रीकी मूल व अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के ख़िलाफ़ जारी नस्लभेद को ख़त्म करने के लिए क़दम आगे बढ़ाने व निर्णायक कार्रवाई करने आहवान किया है.

इसके आहवान के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 1 का सन्दर्भ भी दिया गया है जिसमें कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र ठनस्ल, लिंग, भाषा या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना, सभी व्यक्तियों के लिए सभी तरह की बुनियादी स्वतन्त्रताओं व मानवाधिकारों के लिए सम्मान” को प्रोत्साहन व बढ़ावा देता है.

© Melissa Ganz
न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन इलाक़े में प्रदर्शनकारियों ने उन लोगों की याद में 20 मिनट का मौन रखा जिनकी मौत नस्लवादी गतिविधियों के कारण हुई.

सम्पादकीय में दुनिया में नस्लभेद का ख़ात्म करने में संयुक्त राष्ट्र की महती भूमिका का ख़ास ज़िक्र किया गया है. इसमें दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (अपार्थाइड) का ख़ात्मा, पूर्व अफ्रीकी उपनिवेशों की मुक्ति और अमेरिका में नागरिक अधिकारों के लिए आन्दोलनों के लिए समर्थन जैसे क़दम शामिल रहे हैं. 

वक्तव्य में संयुक्त राष्ट्र से नस्लभेद के उन्मूलन के लिए एक बार फिर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और देशों के समुदाय को मानवता पर लगे नस्लभेद के दाग़ को हमेशा के लिए साफ़ करने के लिए प्रोत्साहित करने का भी आहवान किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र सहित दुनिया में हर स्तर पर जारी संस्थागत नस्लभेद से निपटने में यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश के प्रयासों की सराहना करते हुए पत्र में कहा गया है कि इस विश्व संगठन को मिसाल साबित करनी होगी जिसमें “ये वस्तुनिष्ठ आकलन भी शामिल हो कि हम ख़ुद अपने संस्थान में यूएन चार्टर के मूल्यों को किस हद तक लागू करते हैं”.

आवाज़ बुलन्द करनी होगी

संयुक्त राष्ट्र के इन वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने वक्तव्य में लिखा है, “नस्लीय न्याय के लिए आवाज़ बुलन्द करने वाले समूहों द्वारा और ब्लैक लाइव्स मैटर नामक समूह द्वारा आयोजित शान्तिपूर्ण प्रदर्शनों व संस्थागत नस्लभेद व पुलिस क्रूरता के ख़िलाफ़ होने वाले अन्य जन प्रदर्शनों के लिए एकजुटता व समर्थन जताना अन्तरराष्ट्रीय सिविल सेवक के रूप में पूरीतरह हमारी ज़िम्मेदारियों के दायरे में है. "

"यूएन के वरिष्ठ पदाधिकारी, नेता व नेत्रियों के रूप में यूएन चार्टर के आधारभूत सिद्धान्तों व मूल्यों में हमारा अटूट विश्वास है, जिनकी बदौलत हमारे पास ख़ामोश रह जाने का विकल्प नहीं बचा है.”

हस्ताक्षरकर्ता 

•    टैड्रोस एडेनहॉम गेबरेयेसस, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक
•    महमत सालेह अन्नादीफ़, माली में यूएन शान्ति मिशन (MINUSMA) के मुखिया
•    ज़ैनब हावा बन्गूरा, नैरोबी में यूएन कार्यालय की महानिदेशक
•    विन्नी ब्यानयीमा, यूएन एड्स की कार्यकारी निदेशक
•    मोहम्मद इब्न चम्बस, पश्चिम अफ्रीका व साहेल के लिए यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि
•    एडामा डिएंग, जनसंहार की रोकथाम के लिए यूएन महासचिव के विशेष सलाहकार
•    फ्रेन्कॉइ लाउन्सेनी फ़ॉल, मध्य अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र के क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख
•    बियेन्स गवानास, अफ्रीका पर यूएन महासचिव के विशेष सलाहकार
•    गिलबर्ट हाउंगबो, अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष के अध्यक्ष
•    बिशर ए. हुसैन, यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के महानिदेशक
•    नतालिया कनेम, यूएन जनसंख्या कोष की कार्यकारी निदेशक
•    मुखीसा कितूयी, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन के महासचिव
•    किन्ग्सले ममाबोलो, दारफ़ूर में अफ्रीकी संघ व संयुक्त राष्ट्र संघ के संयुक्त अभियान के अध्यक्ष
•    फ्यूमज़िले मल्माबो-न्गक्यूका, यूएन महिला संस्था की कार्यकारी निदेशक
•    मैनकेयूर न्दियाए, मध्य अफ्रीकी गणराज्य के लिए यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि
•    परफ़ेत ओनान्गा-एनयैन्गा, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका के लिए यूएन महासचिव के विशेष दूत
•    मूसा डी, ओयूमारो, अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के उप महानिदेशक
•    प्रमिला पैटन, संघर्ष वाले क्षेत्रों में यौन हिंसा पर यूएन की विशेष प्रतिनिधि
•    वेरा सोन्गवे, अफ्रीका के लिए यूएन आर्थिक आयोग के कार्यकारी सचिव
•    हाना तेत्तेह, अफ्रीकी संघ के लिये महासचिव के विशेष प्रतिनिधि
•    इब्राहीम चियाव, मरुस्थलीकरण के ख़िलाफ़ यूएन कन्वेन्शन के कार्यकारी सचिव
•    लैला ज़ैरूगुई, काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में यूएन स्थिरता मिशन के मुखिया
 

 

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