भारत की छह महिला जलवायु चैम्पियन: सततता की राह पर बढ़ते क़दम

यूएनडीपी इंडिया, रीन्यू और एफआईआईटी के प्रतिनिधियों के साथ छह महिला उद्यमियों का पहला समूह.
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यूएनडीपी इंडिया, रीन्यू और एफआईआईटी के प्रतिनिधियों के साथ छह महिला उद्यमियों का पहला समूह.

भारत की छह महिला जलवायु चैम्पियन: सततता की राह पर बढ़ते क़दम

महिलाएं

नवीनतम मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया अनेक संकटों का सामना कर रही है और इससे मानव विकास प्रभावित हो रहा है. जलवायु परिवर्तन पर अन्तर-सरकारी पैनल (IPCC) की हाल की रिपोर्ट से पता चलता है कि विश्व की लगभग आधी आबादी, ऐसे क्षेत्रों में रहती है जो जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक सम्वेदनशील है. लेकिन जहाँ आपस में गुँथे हुए संकट ख़तरे को बढ़ाने का काम करते हैं, वहीं महिलाएँ इससे निपटने के समाधान पेश करती हैं. मिलिये, भारत की ऐसी छह महिला चैम्पियन्स से जो अपने-अपने क्षेत्रों में असाधारण योगदान कर रही हैं...

जलवायु कार्रवाई के लिये महिलाएँ और लड़कियाँ प्रभावशाली कार्यकर्ता हैं. एक अध्ययन से पता चलता है कि जब महिलाओं की उत्पादक संसाधनों तक समान पहुँच होगी, तो कृषि उत्पादन बढ़ेगा, कम लोग भूखे रहेंगे और उत्सर्जन में कमी आएगी.

भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और रीन्यू पावर ने, जलवायु कार्रवाई में कमियों और महिलाओं के नेतृत्व की क्षमता पहचानते हुए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली के फ़ाउण्डेशन फ़ॉर इनोवेशन एण्ड टैक्नोलॉजी ट्रांसफ़र (FIIT) के साथ मिलकर, वर्ष 2021 में 'महिला जलवायु चैम्पियन्स' :  इम्पैक्ट्स एसडीजी5 एक्सैलेरेटर प्रोग्राम' ( Impacts SDGs accelerator programme) शुरू किया था. इस कार्यक्रम के तहत महिला जलवायु उद्यमियों को उनके उत्पादों में संशोधन करने व व्यावसायिक सलाह एवं परामर्श दिया जाता है.

जलवायु कार्रवाई में महिलाओं का नेतृत्व और निवेश की आवश्यकता  

इस कार्यक्रम के अन्तर्गत, महिला जलवायु चैम्पियन्स को, व्यावसायिक परामर्श व अन्य प्रकार की सहायता मुहैया कराई जाती है.
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इस कार्यक्रम के अन्तर्गत, महिला जलवायु चैम्पियन्स को, व्यावसायिक परामर्श व अन्य प्रकार की सहायता मुहैया कराई जाती है.

अपरिहार्य प्रमाणों के बावजूद,  महिलाओं के नेतृत्व वाले उपक्रमों में निवेश की कमी है. उदाहरण के लिये, ऊर्जा क्षेत्र अत्यधिक पुरुष प्रधान है. विश्व स्तर पर, ऊर्जा उत्पादन और वितरण क्षेत्र में महिलाओं के पास केवल 22 प्रतिशत रोज़गार हैं.

हालाँकि अक्षय ऊर्जा कम्पनियों में महिलाओं की भागेदारी लगभग 32 प्रतिशत है, लेकिन प्रशासनिक पदों को हटाने के बाद ये संख्या काफ़ी कम हो जाती है.

यूएनडीपी व भागीदारों ने जलवायु कार्रवाई में तेज़ी लाने के लिये, महिला उद्यमियों के कौशल निर्माण के लिये शुरू किये गए - 'महिला जलवायु चैम्पियन्स' :  इम्पैक्टएम एसडीजी5 एक्सैलेरेटर प्रोग्राम' ( ImpactAim SDGs accelerator program) की छह लाभार्थी महिलाएँ, सफलता के अनोखे उदाहरण पेश कर रही हैं.

मोनिका झा: टिकाऊ प्रकाश समाधान

भारतीय महिला जलवायु चैम्पियन मोनिका झा
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भारतीय महिला जलवायु चैम्पियन मोनिका झा

सत्ताईस वर्षीय मोनिका झा, Cydee Technologies की संस्थापक हैं. 2017 में शुरू हुई इस कम्पनी ने बिजली का एक नया तरीक़ा विकसित किया है, जिससे किसी भी सड़क या क्षेत्र के भाग को रौशन करने के लिये, 40 प्रतिशत कम प्रकाश की ज़रूरत पड़ती है.

मोनिका बताती हैं, "इसमें नवाचार यह है कि पारम्परिक एलईडी लाइट फ़िक्स्चर की तुलना में, साइडी स्ट्रीट लाइट, फ़िक्स्चर से, प्रकाश का फैलाव कोण 120डिग्री से 160 डिग्री तक होता है. इससे बीम में वृद्धि होने की बदौलत, ज़्यादा रौशनी होती है. इसके अलावा, यह बिजली प्रणाली, आईओटी और ऑटोमेशन क्षमता के साथ-साथ, सौर व हाइब्रिड पावर से चलाई जाती हैं, जिससे परम्परागत प्रणालियों की तुलना में 30 प्रतिशत ऊर्जा बचत होती है.”

मोनिका कहती हैं, “शहर भर में स्ट्रीट लाइट के कवरेज में सुधार लाने की इस सोच के पीछे प्रेरणा यही है कि रात के समय महिलाएँ सुरक्षित महसूस कर सकें."

बेंगलुरू में हुई इस शुरूआत को अब पूरे देश में मान्यता मिल रही है. यह कम्पनी मार्च 2019 से अब तक, देश भर में 740 स्ट्रीट लाइटें लगा चुकी है. इस प्रकाश समाधान से, Co2 उत्सर्जन में लगभग 305t की कमी आई है और बिजली बिलों में 9 लाख भारतीय रुपए की बचत हुई है, क्योंकि किसी भी इलाक़े को स्ट्रीटलाइट से रौशन करने के लिये, इसमें कम लाईटों की आवश्यकता होती है.

2) प्रेरणा गोराडिया: वायु एवं जल से प्रदूषक हटाने का टिकाऊ समाधान

भारतीय महिला जलवायु चैम्पियन डॉक्टर प्रेरणा गोराडिया
UNDP, Sujay Reddy
भारतीय महिला जलवायु चैम्पियन डॉक्टर प्रेरणा गोराडिया

44 वर्षीय सामग्री रसायन विज्ञान विशेषज्ञ, डॉक्टर प्रेरणा गोराडिया को हमेशा से जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में बदलाव लाने की चाह थी. उनकी कम्पनी, एक्सपोसम (Exposome) ने Pur-Safe नामक एक उन्नत वायु निस्पन्दन उपकरण (Advanced Air Filteration Device) विकसित किया है. यह उपकरण, सल्फ़र ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फ़ाइड जैसे वायु प्रदूषकों को हटाने में मदद करता है.

इसी तरह, PureCODe नामक कम्पनी का अपशिष्ट जल उपचार समाधान, प्रदूषणकारी अपशिष्ट को हटाकर या कम करके, कागज़, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण और फ़ार्मास्युटिकल डिस्चार्ज जैसे उद्योगों की मदद करने के लिये, अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करता है.

प्रेरणा कहतीं हैं, " Exposome शब्द का अर्थ है 'मानव शरीर पर पर्यावरण का प्रभाव'. अपनी कम्पनी के ज़रिये मैं, सामग्री रसायन शास्त्र का उत्कृष्ट उपयोग करके, स्वच्छ हवा, अपशिष्ट जल निपटान, संक्रमण नियंत्रण आदि से सम्बन्धित चुनौतियों का समाधान करना चाहती थी."

3) कुंजप्रीत अरोड़ा : निर्माण के लिये टिकाऊ ईंटें

भारतीय महिला जलवायु चैंपियन कुंजप्रीत अरोड़ा... निर्माण के लिए टिकाऊ ईंटें.
UNDP, Sujay Reddy
भारतीय महिला जलवायु चैंपियन कुंजप्रीत अरोड़ा... निर्माण के लिए टिकाऊ ईंटें.

24 वर्षिय कुंजप्रीत अरोड़ा, एक सिविल इंजीनियर से उद्यमी बनीं. वह उदयपुर में, भवन-निर्माण से उत्पन्न कचरे – जैसेकि प्लास्टिक, सीमेंट और ईंटों के अपर्याप्त प्रबन्धन की बढ़ती चुनौती, विशेष रूप से शहर की झीलों के आसपास उसके विक्रय से चिन्तित थीं. ऐसे में, उनकी कम्पनी ‘एंगिरस प्राइवेट लिमिटेड’ ने 'WRICKS' नामक पर्यावरण अनुकूल ईंटों का उत्पादन करने की एक तकनीक विकसित की.

WRICKS, प्लास्टिक और अन्य निर्माण व औद्योगिक कचरे, जैसेकि मलबा, संगमरमर व उड़ने वाली राख जैसे 100% - नवीकरणीय अपशिष्ट सामग्री का उपयोग करके बनाए जाते हैं. WRICKS बनाने के लिये उपयोग की जाने वाली तकनीक, अत्यधिक प्रदूषणकारी ईंट भट्ठा उद्योग में उपयोग की जाने वाली पारम्परिक प्रक्रियाओं का एक विकल्प भी प्रदान करती है.

कुंजप्रीत बतातीं हैं, “WRICKS ईंट की लागत को 20 प्रतिशत तक कम करता है. यह 40 प्रतिशत अधिक मज़बूत है, 80 प्रतिशत कम पानी सोख़ता है, और पारम्परिक मिट्टी की ईंटों की तुलना में इसका वज़न 30 प्रतिशत कम होता है. WRICKS का सभी प्राथमिक भारतीय मानकों पर परीक्षण किया गया है, साथ ही परीक्षण व अंशांकन प्रयोगशालाओं (एनएबीएल) के लिये तीसरे पक्ष की सरकार से मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड के परीक्षण में भी खरा उतरा है. "

4) झानवी राणा: सौर ऊर्जा का उपयोग कर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में योगदान

भारतीय महिला जलवायु चैम्पियन झानवी राणा
UNDP, Sujay Reddy
भारतीय महिला जलवायु चैम्पियन झानवी राणा

24 वर्षीय झानवी राणा, सोलेंस टैक्नोलॉजीज़ में, सौर ऊर्जा का उपयोग करके पानी की कमी के मुद्दे का समाधन निकाल रही हैं. उनकी कम्पनी ने, सौर ऊर्जा द्वारा संचालित अलवणीकरण (desalination) इकाइयाँ शुरू की हैं जो समुद्री जल को एक किफ़ायती दर पर पीने के पानी में परिवर्तित करती हैं.

झानवी कहती हैं, “जब मैंने पानी तक पहुँच की क़िल्लत के कारण महिलाओं को क़तार में लगते देखा, तो मैंने साफ़ पानी तक पहुँच के बारे में सोचना शुरू किया.”

उन्होंने कहा, “इस तकनीक से बहुत अधिक टीडीएस (कुल घुलित ठोस पदार्थ) वाला पानी स्वच्छ होकर उपयोग योग्य हो जाता है. यह नवीन प्रक्रिया के तहत एक पेटेण्ट युक्त सौर रिसीवर का इस्तेमाल किया गया है. जिससे पानी को फ़िल्टर करने की प्रक्रिया की ऑप्टिकल एवं थर्मल दक्षता में वृद्धि होती है."

सोलेंस का लक्ष्य, वर्ष 2023 तक सूरत और उसके आसपास 1000 से अधिक लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है.

5) शैवी मलिक: टिकाऊ शीतलन ट्रक

भारतीय महिला जलवायु चैम्पियन शैवी मलिक
UNDP, Sujay Reddy
भारतीय महिला जलवायु चैम्पियन शैवी मलिक

XLR Technologies की सह-संस्थापक 24 वर्षीय शैवी मलिक, धातु सामग्री (hardware) पर काम करती हैं. IIT दिल्ली की छात्रा, शैवी, उन ट्रकों की प्रशीतन यूनिट के विद्युतीकरण में डीज़ल का इस्तेमाल कम करने पर काम कर रही हैं, जो कोल्ड स्टोरेज के लिये काम में लाए जाते हैं.

शैवी बतातीं हैं, “प्रशीतन ट्रक, आवश्यक दवा उत्पादों, जैसे टीकों/दवाओं और डेयरी/माँस/फलों जैसे ख़राब होने वाले सामान को लाने-ले-जाने का काम करते हैं. अपने इस नवाचार में, हम प्रशीतन इकाई के शक्ति स्रोत को, डीज़ल इंजन के बजाय अपने स्मार्ट इलैक्ट्रिक पावरट्रेन में बदल देते हैं, जिससे न केवल कोल्ड लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों को कुल ईंधन ख़र्च का 15-25 प्रतिशत बचाने में, बल्कि जलवायु कार्रवाई में भी योगदान देने में मदद मिलेगी.”

6) करिश्मा शाह: प्लास्टिक पेपर के कचरे से उपयोगी उत्पादों का निर्माण

भारत की एक अग्रणी जलवायु महिला चैम्पियन - करिश्मा शाह - प्लास्टिक पेपर कचरे को प्रयोग करने योग्य उत्पादों में परिवर्तित करना
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भारत की एक अग्रणी जलवायु महिला चैम्पियन - करिश्मा शाह - प्लास्टिक पेपर कचरे को प्रयोग करने योग्य उत्पादों में परिवर्तित करना

प्लास्टिक कचरा हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, और करिश्मा शाह को इसके बारे में जानकर बहुत धक्का लगा. उनकी कम्पनी EnvoProtect ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो पेपर मिलों में उत्पन्न प्लास्टिक कचरे को, तरल और गैसीय ईंधन में परिवर्तित करती है.

इसका उपयोग बॉयलर, फ़र्नेस, थर्मस पैक और स्पेस हीटिंग जैसे औद्योगिक हीटिंग अनुप्रयोगों के लिये किया जा सकता है. यह प्लास्टिक कचरे को इष्टिकाओं (briquettes) में भी परिवर्तित करता है, जिसे कोयले की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है.

करिश्मा बताती हैं , “भारत में क़ागज़ का लगभग एक तिहाई उत्पादन, क़रीब 1.5 करोड़, बेकार कागज़ पर आधारित है जिसमें हमेशा प्लास्टिक, धातु और अवशिष्ट फ़ाइबर जैसी सामग्री होती है. ऐसी मिलें बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करती हैं.”

मौजूदा संयंत्र को प्रतिदिन 12 मीट्रिक टन ठोस कचरा संभालने के लिये डिज़ाइन किया गया है, और इसमें प्रतिदिन 2,000 लीटर ईंधन और 6 मीट्रिक टन ब्रिकेट का उत्पादन करने की क्षमता है.

भविष्य की राह

जलवायु परिवर्तन के प्रबन्धन के लिये, भारत में तेज़ी से काम हो रहा है. ऐसे में इन जैसी महिला जलवायु उद्यमियों के योगदान से, देश को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है.

यूएनडीपी - भारत, इस पहल का विस्तार करने और महिला जलवायु चैम्पियन्स का एक कैडर बनाने के प्रयासों में लगा है.

यह कार्यक्रम, पर्यावरण के क्षेत्र में महिला उद्यमियों को आपस में जोड़ने और बेहतर अवसर पैदा करने के लिये इस क्षेत्र के अन्य संगठनों के साथ साझेदारी करेगा.

यह लेख यहाँ प्रकाशित हो चुका है.