अफगानिस्तान: तालेबान से हाई स्कूल छात्राओं की शिक्षा फिर शुरू किये जाने का आग्रह

19 सितम्बर 2022

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर क़ाबिज़ तालेबान से आग्रह किया है कि माध्यमिक स्तर पर लड़कियों की स्कूलों में जल्द से जल्द वापसी सुनिश्चित की जानी होगी. तालेबान द्वारा हाई स्कूल छात्राओं की पढ़ाई रोकने के लिये सरकारी आदेश जारी किये जाने का एक वर्ष पूरा होने पर महासचिव की ओर से यह अपील जारी की गई है. 

यूएन प्रमुख ने रविवार को अपने एक ट्वीट सन्देश में कहा कि बीते 12 महीने उस एक वर्ष को दर्शाते हैं जिसमें लड़कियों ने ज्ञान व ऐसे अवसर खोए हैं, जो उन्हें कभी वापिस नहीं मिल पाएंगे. 

अफ़ग़ानिस्तान में यूएन मिशन ने महासचिव गुटेरेश की अपील दोहराते हुए, माध्यमिक स्तर की छात्राओं की पढ़ाई पर लगाई गई पाबन्दी को तुरन्त वापिस लेने की मांग की है.

संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) के कार्यवाहक प्रमुख मार्कस पोटज़ेल ने क्षोभ व्यक्त किया कि स्कूली पढ़ाई में अवरोध का एक वर्ष पूरा होने का पड़ाव "दुखद, शर्मनाक है और इसे पूरी तरह से टाला जा सकता है." 

उन्होंने कहा कि माध्यमिक स्कूल की कक्षाओं से लड़कियों को बाहर रखे जाने का कोई भी औचित्य नहीं है और दुनिया में इसकी मिसाल कहीं भी नज़र नहीं आती है. 

ग़ुम हो रही पीढ़ी

यूएन मिशन प्रमुख ने कहा कि पिछले वर्ष अगस्त महीने में काबुल पर नियंत्रण स्थापित करने के तुरन्त बाद तालेबान लड़ाकों द्वारा लिया गया यह निर्णय, लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी और अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य के लिये बहुत हानिकारक था.

अफ़ग़ानिस्तान में पिछले साल 18 सितम्बर को लड़कों के लिये हाई स्कूल फिर से खोल दिये गए थे. मगर, तालेबान प्रशासन ने 12 से 18 साल की लड़कियों को घर पर ही रहने के आदेश जारी किये, जिससे कक्षा सात से 12 तक की छात्राएँ प्रभावित हुईं.

अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर निन्दा और तालेबान प्रशासन द्वारा स्थिति में सुधार के आश्वासनों के बावजूद, एक अनुमान के अनुसार, पिछले एक साल में 10 लाख से अधिक लड़कियों की हाई स्कूल स्तर की पढ़ाई-लिखाई प्रभावित हुई है. 

अवसरों का अभाव 

अफ़ग़ानिस्तान के लिये संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा नियुक्त उप विशेष प्रतिनिधि पोटज़ेल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने फिर से तालेबान से आग्रह किया है कि अफ़ग़ान महिलाओं और लड़कियों को उनके मूल अधिकारों से वंचित करने वाले और उनकी स्वतंत्रता पर पाबन्दी लगाने वाले आदेशों को पलटा जाना होगा. 

"अवसर की खिड़की संकीर्ण हो रही हो सकती है, लेकिन हम उनसे ठोस कदम उठाने का आग्रह करते हैं - जैसेकि लड़कियों को हाई स्कूल में वापस लौटने के लिये सक्षम बनाना - जो अफ़ग़ानिस्तान को आगे ले जा सकता है और लोगों को नई आशा दे सकता है."

अफ़ग़ान विशेषज्ञ और अनुभवी राजनीतिज्ञ मार्कस पोटज़ेल हाल के समय तक, अफ़ग़ानिस्तान में जर्मनी के राजदूत के रूप में सेवारत रह चुके हैं.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि "शान्ति, समावेशन, सुरक्षा, मानवाधिकार और आर्थिक सुधार के लिये अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करने की ज़िम्मेदारी अब तालेबान पर है.” 

यूएन मिशन प्रमुख ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय "अपने सभी लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली और उनके अधिकारों का सम्मान करने वाली सरकार" का समर्थन करने के लिये तैयार है.

 

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