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भारत: महिलाओं का सशक्तिकरण, बेहतर भविष्य की बुनावट

उत्तराखंड के बागोरि गांव की एक भारतीय महिला अपनी पीठ पर भेड़ की ऊन से भरी नीली टोकरी ले जा रही है।
© UNDP/Deepak Malik गृहिणी और दो बच्चों कीमाँ, विजेता, भोटिया जनजाति से सम्बन्ध रखती हैं - उनकी आजीविका के मुख्य स्रोत के रूप में भेड़ और बक़रियों को पालते हैं

भारत: महिलाओं का सशक्तिकरण, बेहतर भविष्य की बुनावट

महिलाएँ

उत्तराखंड की निवासी पैंतालिस वर्षीय विजेता, ध्यानपूर्वक बुनाई करते हुए कहती हैं, “मैं दशकों से बुनाई कर रही हूँ, मैंने ये हुनर अपनी माँ से सीखा है. यह उन परम्पराओं में से है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती आ रही है.”

भारत में हिमालय क्षेत्र में स्थित उत्तराखंड प्रदेश के बागोरी गाँव की निवासी विजेता ने, हाल ही में एक नया उद्यमी सफ़र शुरू किया है.

एक गृहिणी और दो बच्चों की माँ, विजेता, भोटिया जनजाति से सम्बन्ध रखती हैं जो एक पशुपालक समुदाय है. भेड़ बकरियों का पालन-पोषण उनका मुख्य पेशा है. भोटिया जनजाति को 'बुदेरा' या 'घुमन्तु जन' के रूप में भी जाना जाता है.

उत्तराखंड के बागोरी में एक दुकान में एक भारतीय महिला ग्राहकों को हथकरघा ऊनी कालीन दिखा रही है।
© UNDP/Deepak Malik

ये समुदाय साल में दो बार, अपना निवास स्थान बदलते हैं. सर्दियों में ऊपरी इलाक़ों से हटकर हिमालयी क्षेत्र के निचले, गर्म क्षेत्रों का रुख़ करते हैं, और फिर गर्मी के महीनों में वापस ऊपरी इलाक़ों में अपने चरागाहों पर पहुँच जाते हैं. वे अपने पशुओं से मिलने वाली ऊन का प्रयोग हथकरघा और कारीगारी में करते हैं और क़ालीन व स्वेटर और शॉल जैसे गर्म कपड़े बनाते हैं.

एक चरवाहा हिमालय के एक ग्रामीण गांव में एक संकरे पहाड़ी रास्ते पर भेड़ों के झुंड के साथ खड़ा है।
© UNDP India

विजेता और उसके गाँव के लोग, इससे पहले, गर्म कपड़े और अन्य उत्पाद पर्यटकों को बेचने के लिए बनाते थे, जो गंगोत्री तीर्थ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में वहाँ आते थे. उत्तराखंड में गंगोत्री एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है.

इस क्षेत्र का नाम भारत की पवित्र नदी गंगा के नाम पर रखा गया है. गंगा नदी का उदगम गंगोत्री से ही होता है और इसीलिए इस स्थान को धार्मिक तीर्थयात्रा के रूप में भी मान्यता प्राप्त है.

हिमालय की बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों से घिरी एक घाटी दिखाई देती है, जिसमें सीढ़ीदार खेत, एक नदी और बादलों से भरे नीले आकाश के नीचे एक छोटा सा गांव बसा हुआ है।
© UNDP India

SECURE हिमालय परियोजना हिमालय के ऊँचाई वाले कुछ क्षेत्रों में काम कर रही है जोकि हिम तेन्दुए का घर भी है. भागेदारी संरक्षण मॉडल के माध्यम से हिम तेन्दुए के आवास की रक्षा के लिए भी काम जारी है.

विजेता, कोविड महामारी के समय को याद करते हुए कहती हैं, “हमारा व्यापार पर्यटकों पर निर्भर करता है लेकिन महामारी के समय बिक्री शून्य हो गई थी. हम अपनी गुज़र-बसर करने के लिए भी संघर्ष कर रहे थे.”

पारंपरिक पोशाक पहने पांच महिलाएं एक कार्यशाला में एक पैटर्न वाले कालीन पर बैठी हैं, जिसके पृष्ठभूमि में हथकरघा बुनाई के फ्रेम दिखाई दे रहे हैं।
© UNDP/Deepak Malik

वर्ष 2020 में, भारत सरकार और वैश्विक पर्यावरण सुविधा के साथ साझेदारी में, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के समर्थन से SECURE Himalaya परियोजना ने, विजेता और समुदाय के अन्य स्दस्यों की मदद के लिए सम्पर्क साधा, ताकि इन लोगों को अपने बनाए गए सामान को बेचने के लिए एक नया मंच मिल सके.

पारम्परिक ज्ञान प्रणाली और आजीविकाओं को फिर से ताज़ा करने व उनकी रक्षा करने से मनुष्यों की, पशुओं की और वन्य जीवन के आपस के तालमेल को क़ायम रखा जा सकता है.

एक नोटबुक में हाथ से की गई गणनाओं के बगल में एक स्मार्टफोन कैलकुलेटर रखा है, जिसमें 72,400 का योग दर्शाया गया है।
© UNDP/Deepak Malik

भेड़ पालन और ऊन से गर्म कपड़े बुनने जैसी प्रकृति आधारित आजीविकाओं में मूल्य संवर्धन करके, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम किया जा सकता है. इससे साथ ही स्थानीय समुदायों को अपने आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए प्रोत्साहन भी सृजित किया जा सकता है.

इस पहल के ज़रिए, 190 सदस्यों वाले गंगोत्री - SECCURE बहुउद्देशीय सहकारिता, नामक एक उत्पादक संगठन (OFPO) की स्थापना की गई थी, जोकि एक बहु-क्षेत्रीय स्वनिर्भर सहकारिता संगठन है.

OFPO के सदस्यों ने पैकेजिंग, बहीखाता पद्धति और बिक्री के क्षेत्रों अपने कौशल सुधार के लिए, इन प्रशिक्षण व कौशल निर्माण कार्यशालाओं में हिस्सा लिया. प्रतिभागियों को ऊन व्यापार में नवीनतम तकनीकों के बारे में भी अधिक जानकारी दी गई.

अवसरों का विस्तार

इस परियोजना के ज़रिए सहकारी उत्पादों की खुदरा बिक्री के लिए, 'बुडेरा हिमालयी शिल्प’ ब्रैंड विकसित किया गया था. विजेता, वर्ष 2021 में, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा आयोजित एक हथकरघा मेले में भाग लेने नई दिल्ली भी गई थीं.

एक महिला घर के अंदर लकड़ी के करघे पर बुनाई कर रही है।
© Unsplash/Nishant Jadhav

ये पहली बार था जब विजेता ने अपने घर परिवार को बच्चों के भरोसे छोड़कर, गाँव से बाहर क़दम रखा था.

और इस तरह विजेता को ख़ुद पर विश्वास बढ़ने लगा. उन्होंने दिल्ली के बाद देहरादून में जापान अंतरराष्ट्रीय सहकारिता एजेंसी द्वारा आयोजित एक अन्य प्रदर्शनी में भाग लिया.

वर्ष 2022 में, विजेता ने बुडेरा हिमालयी शिल्प का हिस्सा बनकर, राजधानी दिल्ली के निकट नोएडा में, हस्तशिल्प के लिए भारत की निर्यात प्रोत्साहन परिषद (India’s Export Promotion Council) द्वारा आयोजित -भौगोलिक संकेतक प्रदर्शनी (Geographic Indication Expo) में भाग लिया, जिसे 'सर्वश्रेष्ठ स्टाल' (Best Stall) पुरस्कार मिला.

राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह समारोह के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस समूह की सराहना की थी.

विजेता कहती हैं, “इन पुरस्कारों से हमारा बहुत हौसला बढ़ता है.”

“ये हमें विश्वास दिलाते हैं कि हम कुछ अच्छा और सार्थक काम कर रहे है. हम में से कुछ महिलाओं ने तो कभी गाँव से बाहर क़दम ही नहीं रखा है. अब जब हम देश भर से आए लोगों से मुलाक़ात करते हैं तो हमें अपनी बनाई चीज़ो की अहमियत का अहसास होता है.”

‘Essence of Himal’ नामक एक वेबसाइट विकसित की गई है, और अब इस वैबसाइट के संचालन के लिए, OFPO के सदस्यों को प्रशिक्षित किया जा रहा है.

संगठन को वर्ष 2023 तक अपनी सदस्यता 190 से बढ़ाकर 500 से अधिक होने की उम्मीद है. प्रति वर्ष आय में, 10 हज़ार डॉलर की बढ़ोत्तरी करने वाली एक व्यवसाय योजना पर भी काम किया जा रहा है.

विजेता गंगा नदी में ऊन की अपनी गठरियों की धुलाई करती हैं, और इस नदी के प्राचीन जल के लिए बहुत आभारी हैं जो उन्हें सहारा देती है. इस क्षेत्र में समुदायों के लिए, प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र अत्यधिक पूजनीय हैं और बेहतर आजीविकाएँ ये सुनिश्चित करती हैं कि प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन यापन हो सकता है.

विजेता बर्फ़ से ढके पहाड़ों के बीच से बहती हुई, बलखाती नदी को निहारते हुए कहती हैं, “नई जगहों पर जाना रोमांचक हो सकता है, लेकिन इन पहाड़ों की ख़ूबसूरती का कोई मुक़ाबला नहीं.”

भारत के उत्तराखंड के बागोरि गांव में दो महिलाएं, जिनमें एक बुजुर्ग महिला लाल पगड़ी पहने हुए है और एक युवा महिला है, एक पारंपरिक लकड़ी के करघे पर काम कर रही हैं।
© UNDP India

नागरिक विज्ञान और पर्वतारोहण, संचार, टिकाऊ कृषि और स्थानीय उत्पाद प्रबन्धन पर, महिलाओं के लिए परियोजना -समर्थित प्रशिक्षणों के ज़रिए, अनुमानित 700 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से लाभ हुआ है.

कुल 227 परिवार, हथकरघा आधारित उत्पादों की श्रृंखला में सुधार लाने के प्रयासों की बदौलत लाभान्वित हुए हैं. इन परिवारों में 112 महिलाओं की वार्षिक औसत आय में लगभग दो-तिहाई की वृद्धि हुई है.

और साथ ही, विभिन्न क्षेत्रों में इस परियोजना को समर्थन मिलने की वजह से, स्थाई आजीविका के आय में भी वृद्धि देखी गई है, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन, समुद्री हिरन का सींग प्रसंस्करण, बिछुआ फ़ाइबर प्रसंस्करण इत्यादि शामिल हैं.

इस परियोजना के कारण महिलाओं के पास अब अतिरिक्त आजीविका विकल्प हैं.  महिलाएँ अब संरक्षण क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि करते हुए, वित्त मदद के लिए सम्भावित स्रोतों के बारे में अवगत हो रही हैं.

यूएन विकास कार्यक्रम (UNDP) ये समझता है कि समावेशी, मानवाधिकार-आधारित और लिंग-उत्तरदाई दृष्टिकोण, स्थाई विकास पर केन्द्रित होना चाहिए, और साथ ही निर्णय लेने व कार्रवाई में स्थानीय समुदायों, महिलाओं और युवाओं की पूर्ण भागेदारी को भी अहमियत देता है.