श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने यूएन महासभा के 77वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट को सम्बोधित किया.

श्रीलंका: मज़बूत लोकतांत्रिक व्यवस्था व आर्थिक स्थिरता के लिये सुधारों की तैयारी

UN Photo/Cia Pak
श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने यूएन महासभा के 77वें सत्र के दौरान जनरल डिबेट को सम्बोधित किया.

श्रीलंका: मज़बूत लोकतांत्रिक व्यवस्था व आर्थिक स्थिरता के लिये सुधारों की तैयारी

यूएन मामले

श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने यूएन महासभा के 77वें सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा है कि देश में सामाजिक अशान्ति व विरोध प्रदर्शनों के लम्बे दौर के बाद, लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था व दीर्घकालीन आर्थिक स्थिरता बहाल करने के लिये संस्थागत फ़्रेमवर्क को मज़बूत किया जा रहा है.

विदेश मंत्री ने उच्चस्तरीय जनरल डिबेट के दौरान शनिवार को अपने सम्बोधन में बताया कि राष्ट्रपति रानिल विक्रमेसिंघे ने अगस्त 2022 में संसद में अपने पहले भाषण में सामाजिक व आर्थिक सुधारों को लागू करने का भरोसा दिलाया है.

उन्होंने कहा कि बाहरी (विदेशी) व अन्दरूनी चुनौतियों के मद्देनज़र, यह राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक सुधारों को लागू करने का एक अवसर है, जिससे आम लोगों के लिये पुनर्बहाली व समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है.

विदेश मंत्री साबरी ने कहा कि श्रीलंका के सभी नागरिकों के लिये एक न्यायसंगत, टिकाऊ व समृद्ध भविष्य के सृजन, और बेहतर पुनर्निर्माण की इस यात्रा में, संयुक्त राष्ट्र व अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन महत्वूपूर्ण होगा. 

उन्होंने चिन्ता जताई कि आपस में गुँथे हुए संकटों से जूझ रहे विकासशील देशों व उनकी अर्थव्यवस्थाओं के पास पर्याप्त संसधानों व पूंजी का अभाव है, और निर्धनता, बेरोज़गारी, भूख व शिक्षा में व्यवधान की समस्या बढ़ रही है. 

विदेश मंत्री साबरी ने बताया कि कोविड-19 से बचाव के लिये श्रीलंका द्वारा संचालित टीकाकरण प्रयासों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के लक्ष्यों को पार किया है, मगर देश अब भी वैश्विक महामारी के आर्थिक झटकों से जूझ रहा है.

इसके मद्देनज़र, आर्थिक सुधारों के ज़रिये सर्वाधिक निर्बल समुदायों तक पहुँचने का प्रयास किया जा रहा है, 

पर्यावरणीय संकट

विदेश मंत्री ने पैरिस समझौते के लक्ष्यों के प्रति श्रीलंका के संकल्पों को रेखांकित करते हुए बताया कि उनके देश का लक्ष्य, वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता (नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन) का लक्ष्य हासिल करने का है.

उन्होंने विश्व में सबसे बड़े उत्सर्जक देशों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के अपने संकल्पों को पूरा करने और अनुकूलन व कार्बन उत्सर्जन कटौती प्रयासों में विकासशील देशों को सहायता प्रदान करने का आहवान किया. 

“हम एक द्वीपीय देश के तौर पर, प्रदूषण और महासागर पर जलवायु परिवर्तन के असर के प्रति बहुत चिन्तित व सम्वेदनशील हैं.“

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये कृषि में रूपान्तरकारी बदलाव लाते समय प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल का भी ध्यान रखा जाना होगा.

श्रीलंकाई मंत्री ने डिजिटल जगत में व्याप्त खाई को पाटे जाने और मानव पूंजी निवेश को एक अहम लक्ष्य बताया. उन्होंने ध्यान दिलाया कि मानव विकास श्रेणी में 191 देशों की सूची में देश का स्थान 73वाँ है, जोकि एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में सबसे अधिक है.

🇱🇰 Sri Lanka - Foreign Minister Addresses United Nations General Debate (English) | #UNGA

भावी चुनौतियाँ

उन्होंने निरस्त्रीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि शस्त्र नियंत्रण, अप्रसार व निरस्त्रीकरण के लिये जिन ढाँचों पर सहमति बनी थी, अब वे दरक रहे हैं, और परमाणु हथियारों के अप्रसार पर सन्धि में सम्बद्ध पक्षों के समीक्षा सम्मेलन के दौरान निष्कर्ष दस्तावेज़ पर आम सहमति नहीं बन पाई.  

उन्होंने कहा कि साइबर जगत में नई टैक्नॉलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमता (artificial intelligence) के इस्तेमाल के लिये नियामक व नियामक व्यवस्था का अभाव है, जिसे जल्द दूर किया जाना होगा.

उनके अनुसार श्रीलंका में सूचना व साइबर सुरक्षा रणनीति पहली बार लागू की गई है. साथ ही, बहुराष्ट्रीय साइबर ख़तरों से साइबर जगत की रक्षा करने के लिये, साझेदारी-आधारित तौर-तरीक़ अपनाए जाने अहम होंगे. 

उन्होंने कहा कि श्रीलंका अनेक दशकों तक आतंकवाद की पीड़ित रहा है. इस क्रम में, उन्होंने आतंकवाद और कट्टरपन्थी विचारधाराओं का मुक़ाबला करने के लिये क़ानूनी उपायों व प्रवर्तन तंत्रों का आग्रह किया है.

विदेश मंत्री साबरी ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा में अपना योगदान करने के लिये, श्रीलंका शान्तिरक्षा अभियानों में अपनी भागेदारी बढ़ाने के लिये उत्सुक है.