बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने न्यूयॉर्क में यूएन महासभा के 77वें सत्र को सम्बोधित किया.

बांग्लादेश: रोहिंज्या समुदाय की मौजूदगी से उपजी चुनौतियाँ, संयुक्त राष्ट्र से समर्थन का आग्रह

UN Photo/Laura Jarriel
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने न्यूयॉर्क में यूएन महासभा के 77वें सत्र को सम्बोधित किया.

बांग्लादेश: रोहिंज्या समुदाय की मौजूदगी से उपजी चुनौतियाँ, संयुक्त राष्ट्र से समर्थन का आग्रह

यूएन मामले

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने कहा है कि म्याँमार के साथ द्विपक्षीय बैठकों व बातचीत के बावजूद, रोहिंज्या विस्थापितों में से एक भी व्यक्ति की अभी तक अपने पैतृक घरों तक वापसी सम्भव नहीं हो पाई है. प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने शुक्रवार को यूएन महासभा के 77वें सत्र के दौरान उच्चस्तरीय जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए चिन्ता जताई कि बांग्लादेश में रोहिंज्या समुदाय की मौजूदगी से गम्भीर चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं और इस संकट को सुलझाने के लिये यूएन के समर्थन की दरकार है.

उन्होंने कहा कि विस्थापित रोहिंज्या लोगों की देश वापसी, म्याँमार में राजनैतिक उठा-पटक और सशस्त्र संघर्ष के कारण और भी कठिन हो गई है. 

प्रधानमंत्री हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में रोहिंज्या समुदाय की मौजूदगी से अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक स्थिरता के लिये गम्भीर परिणाम हुए हैं.

“उनकी देश वापसी पर अनिश्चितता से व्यापक स्तर पर हताशा पनपी है. मानव और मादक पदार्थों की तस्करी समेत सीमा-पार संगठित अपराध उभार पर हैं. इन हालात में कट्टरपंथ के भड़कने की आशंका है.”

उन्होंने चिन्ता जताई कि अगर यह समस्या और अधिक खिंचती है, तो इससे पूरे क्षेत्र की और उससे परे भी सुरक्षा व स्थिरता पर असर होगा.

वर्ष 2017 में, म्याँमार से बड़ी संख्या में रोहिंज्या समुदाय के लोगों ने जान बचाकर बांग्लादेश में शरण ली थी, जिसे अगस्त 2022 में पाँच वर्ष पूरे हुए हैं. 

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कहा कि म्याँमार, यूएन व साझीदार संगठनों के साथ बातचीत के बावजूद, एक भी रोहिंज्या व्यक्ति की स्वदेश देश वापसी नहीं हो पाई है. उन्होंने इस मुद्दे पर, संयुक्त राष्ट्र की एक कारगर भूमिका की उम्मीद जताई.

कोविड-19 से पुनर्बहाली

प्रधानमंत्री हसीना ने कोविड-19 महामारी के प्रभावों से उबरने में अपनी राष्ट्रीय नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश, विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ रही पाँच अर्थव्यवस्थाओं में है. सकल घरेलू उत्पाद के मामले में इसका स्थान 41वाँ है. 

मगर, रूसी महासंघ-यूक्रेन युद्ध, आर्थिक प्रतिबन्धों के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आया है और ईंधन, भोजन व उपभोक्ता वस्तुओं में भारी वृद्धि हुई है.

इन परिस्थितियों में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर भीषण दबाव है. 

उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके बावजूद वर्ष 2026 तक बांग्लादेश सबसे कम विकसित देशों की श्रेणी से निकल कर, विकासशील देशों की श्रेणी में अपनी जगह बनाने में सफल होगा. 

प्रधानमंत्री हसीना ने रूसी महासंघ और यूक्रेन के बीच युद्ध के अन्त की पुकार लगाई और कहा कि इससे सभी देशों में लोगों की ज़िन्दगियों व आजीविकाओं के लिये जोखिम उत्पन्न हुए हैं और मानवाधिकारों को धक्का लगा है. 

उन्होंने संकटों को सुलझाने के लिये पारस्परिक संवाद पर बल देते हुए, यूएन के वैश्विक संकट प्रतिक्रिया समूह में बांग्लादेश की भागीदारी को रेखांकित किया.

🇧🇩 Bangladesh - Prime Minister Addresses UN General Debate, 77th Session (English) | #UNGA

वैश्विक चुनौतियाँ और बांग्लादेश 

प्रधानमंत्री हसीना ने कहा कि बांग्लादेश ने, जलवायु संवेदनशीलता के लिये फ़ोरम की अध्यक्षता के दौरान, ‘मुजीब जलवायु समृद्धि योजना’ शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन सहनक्षमता को बढ़ावा देना है. 

इसके तहत, जलवायु आपदाओं से निपटने के लिये नीतियाँ, तैयार करते समय, लैंगिक परिप्रेक्ष्य का भी ध्यान रखा जाएगा. 

बांग्लादेश की नेता ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ समुद्री सीमाओं को शान्तिपूर्ण ढंग से सुलझाए जाने के बाद, वो अपने वैश्विक साझीदारों के साथ समुद्री संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल, संरक्षण व प्रबन्धन के लिये प्रतिबद्ध हैं, ताकि सामाजिक-आर्थिक विकास की गति को बढ़ाया जा सके. 

उन्होंने अनेक विकासशील देशों समक्ष मौजूदा वैश्विक संकटों के असर से निपटने के लिये, लक्षित समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि डिजिटल खाई को पाटे जाने के कार्य को एक प्राथमिकता के रूप में देखा जाना होगा. 

प्रधानमंत्री हसीना ने कहा कि बांग्लादेश, आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के विरुद्ध शून्य-सहिष्णुता की नीति का पक्षधर है, और देश की भूमि को किसी के भी आतंकी कृत्यों से भड़काने या दूसरों को नुक़सान पहुँचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.