चीन अशान्त दौर में ‘आशान्वित’, ‘एकल चीन’ नीति की पुष्टि भी

चीन गणराज्य के विदेश मंत्री वांग यी, यूएन महासभा के 77वें सत्र की जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए. (24 सितम्बर 2022)
UN Photo/Laura Jarriel
चीन गणराज्य के विदेश मंत्री वांग यी, यूएन महासभा के 77वें सत्र की जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए. (24 सितम्बर 2022)

चीन अशान्त दौर में ‘आशान्वित’, ‘एकल चीन’ नीति की पुष्टि भी

यूएन मामले

यूएन महासभा के 77वें सत्र की उच्चस्तरीय जनरल डिबेट में शनिवार को चीन का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री वांग यी ने करते हुए कहा है कि दुनिया में मौजूदा दौर उथल-पुथल भरा और रूपान्तरकारी है, उसके बावजूद, “आशान्वित होने के कारण” मौजूद हैं.

चीन के विदेश मंत्री ने जनरल डिबेट को सम्बोधित करते हुए कहा, “हम एक ऐसे दौर में हैं जो चुनौतियों से भरा हुआ है. कोविड-19 बार-बार अपना सिर उठा रहा है, वैश्विक सुरक्षा अनिश्चितता का सामना कर रही है, आर्थिक पुनर्बहाली नाज़ुक और विषम है, और विभिन्न तरह के अन्य जोखिम व संकट उभर रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि फिर भी, उथल-पुथल व बदलाव के इस नए दौर में, आशा रखने के भी कारण मौजूद हैं. इस सन्दर्भ में उन्होंने दुनिया में बढ़ते बहु-ध्रुवीकरण, गहराते आर्थिक वैश्वीकरण, और डिजिटल तकनीक का प्रयोग बढ़ने व सांस्कृतिक विविधता की बढ़ोत्तरी वाले समाजों का ज़िक्र किया.

शान्ति की हिमायत, युद्ध का विरोध करें

वांग यी ने कहा, “शान्ति और विकास, हमारे दौर के प्रमुख रुझान बने हुए हैं. प्रगति और सहयोग के लिये लोगों की पुकार और मुखर हो रही है. हम आपने दौर की पुकारों पर क्या प्रतिक्रिया दें, और मानवता के लिये एक साझा समुदाय का निर्माण करने के लिये इतिहास की सवारी कैसे करें.”

यहाँ उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शब्दों का सन्दरभ दिया, जिन्होंने कहा था कि दुनिया को शान्ति की हिमायत में खड़े होना होगा और युद्ध का विरोध करना होगा. “युद्ध से केवल अन्तहीन विवादों का बक्सा खुलता है... हमें मतभेदों को शान्तिपूर्ण तरीक़ों से हल करना होगा.”

एजेण्डा 2030 गति स्थापक

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि सुरक्षा परिषद क एक स्थाई सदस्य और दुनिया का विशालतम विकासरत देश होने के नाते चीन, अन्य देशों के साथ एकजुटता व सहयोग के लिये संकल्पित है.

उन्होंने वैश्विक शान्ति व स्थिरता क़ायम रखने में चीन के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा, “चीन समय के रुझानों पर अमल करेगा और देशों के बहुमत के साझा हितों की ख़ातिर प्रयासरत रहेगा.”

इन प्रयासों में वैश्विक शस्त्र अप्रसार व्यवस्था का पालन करने और यूएन शान्तिरक्षा में योगदान भी शामिल हैं.

मानवाधिकार

विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन वैश्विक विकास में भी योगदान कर रहा है और देश ने वैश्विक औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारू रखने के लिये काम किया है. चीन 130 देशों व क्षेत्रों का प्रमुख व्यापार साझीदार है और जोकि वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे विशाल इंजिन है...  और 2030 एजेण्डा के क्रियान्वयन में गति निर्धारक है. चीन ने निर्धनता में कमी करने का लक्ष्य, निर्धारित समय सीमा से 10 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है.

चीन अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था को क़ायम रखे हुए है और यूएन चार्टर के सिद्धान्तों के लिये प्रतिबद्ध है और यूएन केन्द्रित अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता रहा है.

“चीन हर क्षेत्र में बहुपक्षीय मामलों में शामिल रहा है...अपनी अन्तरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियाँ सदभावना के साथ निभाई हैं. चीन मानवाधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा-पत्र से भी बंधा हुआ है और मानवाधिकारों के संरक्षण और उन्हें मज़बूत करने के लिये, अथक प्रयास किये हैं.”

इस सन्दर्भ में विदेश मंत्री ने कहा कि चीन ने मानवाधिकारों का राजनीतिकरण कियै जाने के प्रयासों का, सख़्ती से विरोध किया और अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार सहयोग के स्वस्थ विकास को प्रोत्साहन देने के लिये काम किया.

मध्यस्थता के प्रमुख ‘हॉटस्पॉट’

विदेश मंत्री वांग यी ने स्वच्छ, हरित विकास पर आधारित विकास के लिये चीन की प्रतिबद्धता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केन्द्रित सहयोग कार्यक्रमों का विवरण देने के बाद कहा कि चीन वैश्विक विवादास्पद मुद्दों में मध्यस्थता भी कर रहा है, और उनमें अहस्तक्षेप के सिद्धान्त का पालन व सम्बद्ध देशों की इच्छा व ज़रूरतों का सम्मान भी कर रहा है.

यूक्रेन में युद्ध के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “चीन इस संकट के शान्तिपूर्ण समाधान के तमाम रचनात्मक प्रयासों का समर्थन करता है...और तमाम पक्षों की वाजिब सुरक्षा चिन्ताओं को दूर करना और एक सन्तुलित, प्रभावकारी व टिकाऊ सुरक्षा ढाँचे का निर्माण करना एक बुनियादी समाधान है.”

उन्होंने कहा, “हम तमाम पक्षों से इस संकट को और बदतर होने से रोकने और विकासशील देशों के वैध और अधिकारों और हितों के संरक्षण का आहवान करते हैं.”

वांग यी ने ताईवान को “प्राचीन काल से चीन का अखण्ड भाग” बताते हुए ज़ोर देकर कहा कि ‘एकल चीन’ नीति, अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों का आधार और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति का आधार बन गई है.

उन्होंने कहा कि उनका देश शान्तिपूर्ण एकीकरण के लिये ईमानदारी से काम करना जारी रखेगा, और इस लक्ष्य क हासिल करने के लिये, उसे अलगाववादी गतिविधियों का मुक़ाबला, मज़बूत इरादे के साथ करना होगा, और बाहरी हस्तक्षेप का मुक़ाबला करने के लिये सर्वाधिक शक्तिशाली क़दम उठाने होंगे.

विदेश मंत्री ने कहा, “केवल जब चीन सम्पूर्ण रूप से एकीकृत हो जाएगा, तभी ताइवान जल मार्ग में टिकाऊ शान्ति क़ायम होगा...चीन के एकीकरण के रास्ते में बाधा डालने वाले कोई भी क़दम, इतिहास के पहियों तले रौंद दिये जाएंगे.”