शहरी और स्थानीय निकायों को 'लोक-कल्याण सुनिश्चित करना होगा'

बुर्किना फ़ासो जैसे विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अतिरिक्त मदद की ज़रूरत है.
©UNICEF/Vincent Tremeau
बुर्किना फ़ासो जैसे विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अतिरिक्त मदद की ज़रूरत है.

शहरी और स्थानीय निकायों को 'लोक-कल्याण सुनिश्चित करना होगा'

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बाँडे ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 फैलाव का ऊँचा स्तर और उसकी गम्भीरता विकसित और विकासशील देशों में समान रूप में महसूस की जा रही है, लेकिन जवाबी कार्रवाई में विश्व की दो-तिहाई आबादी का विशेष ध्यान रखा जाना होगा जो इस लड़ाई में पीछे छूट जाने के जोखिम का सामना कर रही है. 
 

टिकाऊ विकास पर उच्चस्तरीय राजनैतिक मंच की बैठक के दौरान एकजुट शहर और स्थानीय सरकार (United Cities and Local Government) विषय पर सोमवार को एक फ़ोरम में चर्चा हुई.

इस वर्चुअल फ़ोरम को सम्बोधित करते हुए यूएन महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बाँडे ने कहा, “हमें विशिष्ट कार्रवाई पर ध्यान कन्द्रित करने की ज़रूरत है जिससे विकासशील देशों में लोगों और दुनिया भर में वंचितों के कल्याण और आजीविका पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके.”  

“हमें पुनर्बहाली की प्रक्रिया के दौरान उनकी विशिष्ट ज़रूरतों को पूरा करने की आवश्यकता है.”

एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2050 तक विश्व की 68 फ़ीसदी जनसंख्या शहरी होने की सम्भावना है. और विकासशील देशों में शहरी आबादी दोगुनी हो जाएगी.   

इसके अलावा शहरों का क्षेत्रफल वर्ष 2030 तक बढ़कर तीन गुना हो सकता है लेकिन अनेक लोग अनौपचारिक बस्तियों में रहने के लिए मजबूर होंगे. 

महासभा प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि भावी रुझानों और उनसे उपजने वाली समस्याओं से असरदार ढँग से निपटने के लिए टिकाऊ विकास लक्ष्यों को सरकारी रणनीतियों में सबसे आगे रखना होगा. इससे समुदायों को होने वाली कठिनाइयों पर पार पाने में मदद मिलेगी और सुदृढ़ प्रणालियाँ बनाई जा सकेंगी. 

उन्होंने कहा कि विकास के लिये वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से ‘अदीस अबाबा एक्शन एजेण्डा’ के लिए फिर से संकल्प लेना होगा और उसके साथ-साथ धन के ग़ैरक़ानूनी लेनदेन पर लगाम कसनी होगी क्योंकि उससे सामुदायिक विकास के लिए ख़तरा पैदा होता है. 

नेपाल की राजधानी काठमाँडू की एक व्यस्त सड़क का दृश्य.
World Bank/Simone D. McCourtie
नेपाल की राजधानी काठमाँडू की एक व्यस्त सड़क का दृश्य.

यूएन महासभा प्रमुख ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि 152 देशों ने टिकाऊ शहरीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शहरी नीतियाँ अपनाई हैं जोकि शहरी समुदायों के भविष्य की रक्षा के नज़रिये से अहम हैं. 

तटीय इलाक़ों पर शहरीकरण की गति तेज़ हो रही है लेकिन जलवायु परिवर्तन का ख़तरा कम नहीं हुआ है. पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है.

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उन्होंने जलवायु परिवर्तन के जोखिम के मद्देनज़र जलवायु सहनशील शहरी प्रबन्धन के समानान्तर संस्कृति व नवप्रवर्तन (Innovation) से भी मदद लेने की पुकार लगाई है. 

महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बाँडे ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75वीं वर्षगाँठ, महिलाओं पर विश्व सम्मेलन की 25वीं वर्षगाँठ और टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिये कार्रवाई के दशक की शुरुआत की पृष्ठभूमि में वर्ष 2020 को एक बेहद अहम साल क़रार दिया. 

“लेकिन इसे एक ऐसे वर्ष के रूप में याद किया जाएगा जब दुनिया कोरोनावायर के ख़िलाफ़ एकजुट हो गई ताकि उन लोगों की रक्षा हो सके जिनकी हम सेवा करते हैं.”

उन्होंने विश्व समुदायों को भरोसा दिलाया कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में महासभा उनके साथ है और प्रतिभागियों से आग्रह किया कि इस आयोजन का उपयोग अन्य लोगों से जुड़ने और टिकाऊ विकास पर कार्रवाई की रफ़्तार को तेज़ करने के लिये किया जाना चाहिए.