टिकाऊ और समावेशी विकास में शहरों की अहम भूमिका

11 अक्टूबर 2019

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘C-40 वर्ल्ड मेयर्स समिट’ को संबोधित करते हुए ध्यान दिलाया है कि टिकाऊ और समावेशी विकास को हासिल करने के प्रयासों में दुनिया भर में शहर अग्रिम मोर्चे पर खड़े हैं. डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन में गुरुवार को शुरू हुई यह शिखर वार्ता दो दिन तक चलेगी जिसमें C-40 गठबंधन के सदस्य शहरों ने टिकाऊ खाद्य नीतियों को लागू करने का संकल्प लिया है ताकि जलवायु आपात स्थिति से निपटा जा सके.

शहरों का 'C-40 गठबंधन' विश्व के 94 बड़े शहरों को जोड़ता है ताकि निडर जलवायु कार्रवाई और स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य को संभव बनाया जा सके. शहरों में विश्व की आधी आबादी रहती है और कार्बन उत्सर्जन में उनकी बड़ी भूमिका है जिसे कम करने के लिए इन शहरों के मेयरों ने हाथ मिलाए हैं.

यह शिखर वार्ता एक ऐसा मंच है जहां सदस्य शहर वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को रोकने के लिए अपने प्रयासों को प्रस्तुत करते हैं.  महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि शहरी नागरिक अपने मेयरों से अपेक्षा करते हैं कि वे शहरों को विविधतापूर्ण, सामाजिक जुड़ाव और रोज़गार सृजन की पनाहगाह बनाएं.

उन्होंने बैठक में एकत्र प्रतिनिधियों को जलवायु आपात स्थिति से मानवता को उपजते ख़तरे के प्रति आगाह किया जिससे निपटने के लिए सभी स्तरों पर जलवायु कार्रवाई में प्राण फूंकने को रेखांकित किया गया है.

सितंबर 2019 में न्यूयॉर्क में जलवायु कार्रवाई शिखर वार्ता में लगभग 70 देशों और 100 शहरों ने वर्ष 2020 तक नुक़सानदेह उत्सर्जन को घटाने के लिए अपनी राष्ट्रीय योजनाओं को पेश किया था.

लेकिन अब भी ऐसे कुछ देश हैं जिन्होंने व्यापक पैमाने पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार होने के बावजूद वर्ष 2050 तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन को सुनिश्चित करने का संकल्प नहीं लिया है.

व्यवासायिक क्षेत्र, शहरों और समाजों की ओर से होने वाली जलवायु कार्रवाई की रफ़्तार सरकारी प्रयासों से ज़्यादा दिखाई दे रही है. इसी संदर्भ में यूएन प्रमुख ने शहरी नेताओं का आहवान किया है कि राष्ट्रीय प्रशासन पर जलवायु कार्रवाई की महत्वाकांक्षा बढ़ाने के लिए दबाव बनाया जाए.  

शहर कार्बन उत्सर्जन घटाने के प्रयासों के केंद्र में हैं और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखे बग़ैर होने वाले विकास के गहरे नतीजे होंगे. महासचिव गुटेरेश ने C-40 गठबंधन के सदस्य शहरों को स्वस्थ, जलवायु अनुरूप खान-पान और वायु प्रदूषण घटाने के लिए प्रयास करने का स्वागत किया.

उन्होंने कम कार्बन उत्सर्जन वाले भविष्य की दिशा में न्यायोचित ढंग से आगे बढ़ने की अहमियत पर बल देते हुए कहा कि जनमत भी ‘कार्बन न्यूट्रैलिटी’ हासिल करने के लिए होने वाली पहलों के समर्थन में है. इससे तात्पर्य ऐसी सामाजिक नीतियों से हैं जहां उन लोगों की बेचैनियों का ख़याल रखा जाए जिन पर जलवायु कार्रवाई से असर पड़ने की आसंका है. उदाहरण के तौर पर, जीवाश्म ईंधन से चलने वाले उद्योगों पर आश्रित लोग.

इस बैठक में 14 सदस्य शहरों ने टिकाऊ खाद्य नीतियों को लागू करने का संकल्प लिया है ताकि जलवायु आपात स्थिति से निपटा जा सके.

बड़े शहरों के मेयर अपने नागरिको के साथ मिलकर काम करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि वर्ष 2030 तक सभी के लिए स्वस्थ, संतुलित और पोषक भोजन के सपने को सुनिश्चित किया जा सके. इसमें संस्कृति, भौगोलिक स्थिति और उनके नागरिकों की जनसांख्यिकी का ख़याल रखा जाएगा.

जून 2019 में C-40 शहरों के गठबंधन की ओर से कराई गई रिसर्च के नतीजे दर्शाते हैं कि टिकाऊ आहार का सेवन करने और खाने की बर्बादी रोकने से भोजन से संबधित कार्बन उत्सर्जन को 60 फ़ीसदी तक कम किया जा सकता है.

 

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