कॉप24 (COP24): क्‍या है दांव पर और क्‍या जानना है बहुत ज़रूरी

13 दिसम्बर 2018

इधर दुनिया का तापमान बढ़ता जा रहा है, उधर जलवायु कार्रवाई पिछड़ रही है और कुछ करने का अवसर हाथ से निकलता जा रहा है.  2 दिसंबर से पोलैंड के कैटोविच शहर में दो सप्‍ताह का जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन कॉप24 शुरू हुआ, जिसमें संबद्ध पक्ष इस बारे में विचार करेंगे कि इस समस्‍या से तत्‍काल सामूहिक रूप से कैसे निपटा जाए.

हज़ारों विश्‍व नेता, विशेषज्ञ, पर्यावरण समर्थक, रचनात्‍मक चिंतक, निजी क्षेत्रों और स्‍थानीय समुदायों के प्रतिनिधि मिलकर एक सामूहिक कार्य योजना तैयार करेंगे जिससे दुनिया के सभी देशों तीन वर्ष पहले पेरिस में किए गए महत्‍वपूर्ण वायदे पूरे कर सकें.

संयुक्त राष्ट्र समाचार ने कॉप24 के बारे में यह गाइड तैयार की है जिससे आपके मन में उठते कुछ सबसे बड़े प्रश्‍नों के उत्‍तर मिल सकें और आप सबको इसके बारे में साफ-साफ जानकारी मिल सके.

1.   बुनियादी बातें : यूएनएफसीसीसी, यूएनईपी, डब्‍ल्‍यूएमओ, आईपीसीसी, कॉप24, क्‍योतो प्रोटोकाल, पेरिस समझौता….. इनका क्या अर्थ है?

ये संक्षिप्‍त अक्षर और स्‍थानों के नाम उन अंतरराष्‍ट्रीय साधनों और शब्‍दों के प्रतीक हैं जिनकी रचना संयुक्‍त राष्‍ट्र के नेतृत्‍व में दुनिया भर में जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। ये शब्‍द पर्यावरण में स्थायित्व हासिल करने पर हम सबका ध्‍यान केन्द्रित करने में निर्दिष्‍ट और भिन्‍न-भिन्‍न भूमिकाएं निभाते हैं। आइए देखते हैं कैसेः

1992 में संयुक्‍त राष्‍ट्र ने रियो द जनेरो में पृथ्‍वी शिखर सम्‍मेलन नाम से एक बड़ा आयोजन किया जिसमें यूएन फ्रेमवर्क कन्‍वेंशन ऑन क्‍लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) का अनुमोदन किया गया.

इस संधि में देशों ने, वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की सघनता को स्थिर करने पर सहमति दी थी जिससे मानवीय गतिविधियों से जलवायु प्रणाली में हानिकारक हस्‍तक्षेप न होने दिया जाए. अभी तक इस संधि पर 197 देश हस्‍ताक्षर कर चुके हैं. 1994 में यह संधि लागू होने के बाद से हर वर्ष संबद्ध पक्षों का यह सम्‍मेलन - सीओ पी (कॉप)- आगे बढ़ने के तरीकों पर चर्चा के लिए आयोजित किया जाता है. अब तक 23 सम्मेलन हो चुके हैं.  इस वर्ष 24वां यानी कॉप24 होगा.

यूएनएफसीसीसी में अलग-अलग देशों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्‍सर्जन की न तो कोई बाध्‍यकारी सीमा है और न ही उसे लागू कराने का तंत्र, इसलिए इन कॉप सम्‍मेलनों के दौरान इस संधि के अनेक विस्‍तारों को मंजूरी दी गई. इनमें शामिल हैं: 1997 का प्रसिद्ध क्‍योतो प्रोटोकाल जिसमें विकसित देशों के लिए उत्‍सर्जन सीमा तय की गई,‍ जिसे 2012 तक हासिल करना था; और 2015 में अनुमोदित पेरिस समझौता जिसमें दुनिया के सभी देश दुनिया के बढ़ते तापमान को औद्योगिक युग से पहले के स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक सीमित रखने के प्रयास बढ़ाने और जलवायु कार्रवाई के लिए धन की व्‍यवस्‍था में वृद्धि करने पर सहमत हुए थे.

जलवायु परिवर्तन के बारे में संयुक्‍त राष्‍ट्र के वैज्ञानिक कार्य को समर्थन देने वाली दो एजेंसियां हैं: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और वर्ल्‍ड मीटियोरोलाजिकल आर्गेनाइजेशन (डब्‍ल्‍यूएमओ). इन दोनों ने मिलकर 1988 में इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्‍लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की स्‍थापना की, जिसमें मौजूद सैकड़ों विशेषज्ञ आंकड़ों का जायज़ा लेने और जलवायु कार्रवाई वार्ताओं के लिए विश्‍वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान करने में जुटे हुए हैं. ऐसी ही वार्ता कैटोविच में होने वाली है.

2.   ऐसा लगता है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र इस बारे में बहुत से सम्‍मेलन और शिखर वार्ताएं कराता है…. क्‍या इनमें से कोई सार्थक रहा है?

इस तरह के सम्‍मेलन एक ऐसे मुद्दे पर वैश्विक सहमति जुटाने के लिए जरूरी हैं जिसका वैश्विक समाधान आवश्‍यक है. यह सच है कि प्रगति आवश्‍यकता की तुलना में बहुत धीमी है फिर भी प्रक्रिया जितनी महत्‍वाकांक्षी है उतनी ही चुनौतियों से भरी हुई है और बेहद भिन्‍न-भिन्‍न परिस्थितियों वाले सभी देशों को एकजुट करने में कारगर रही है. इस सफ़र में हर क़दम में प्रगति हुई है. अब तक उठाए गए कुछ ठोस क़दमों ने एक बात साबित की है: जलवायु कार्रवाई का वास्‍तव में अनुकूल प्रभाव पड़ा है और यह सही अर्थों में भीषण स्थिति को रोकने में हमारी मदद कर सकती है.

अब तक की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

– कम से कम 57 देश अपने ग्रीनहाउस गैस उत्‍सर्जन को घटाकर दुनिया के बढ़ते तापमान पर अंकुश लगाने के लिए आवश्‍यक स्‍तर पर लाने में सफल रहे हैं.

– कम से कम 51 ‘कार्बन प्राइसिंग’ प्रयास चल रहे हैं जिसका अर्थ है कि कार्बन डाइऑक्‍साइड का उत्‍सर्जन करने वालों से प्रति टन उत्‍सर्जन शुल्क लिया जाए.

– 2015 में उच्‍च आय वाले 18 देशों ने विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई के लिए प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर दान करने का संकल्‍प लिया था. अब तक 70 अरब डॉलर से अधिक राशि जुटाई गई है.

3.   हर तरफ पेरिस समझौते की चर्चा क्‍यों है?

पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए दुनिया को एकमात्र व्‍यावहारिक विकल्‍प प्रदान करता है. 184 पक्षों के अनुसमर्थन से यह समझौता नवम्‍बर 2016 में लागू हुआ. इसमें शामिल महत्‍वपूर्ण संकल्प हैं :

– दुनिया में औसत तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना और तापमान वृद्धि‍ को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के प्रयास करना.

– जलवायु कार्रवाई के लिए धन की व्‍यवस्‍था बढ़ाना, कम आय वाले देशों के लिए दाता देशों से 100 अरब डॉलर वार्षिक दिए जाने का लक्ष्‍य.

– 2020 तक स्व-निर्धारित लक्ष्‍यों और उद्देश्‍यों के साथ राष्‍ट्रीय जलवायु योजनाओं का विकास करना.

– जंगलों सहित ग्रीनहाउस गैसों को सोखने वाली लाभकारी पारिस्थितिकी प्रणालियों को संरक्षण देना.

– जलवायु परिवर्तन का सामना करने की शक्ति बढ़ाना और लाचारी कम करना.

– 2018 में समझौते को लागू करने का कार्यक्रम तय करना.

अमेरिका 2016 में समझौते में शामिल हुआ था, लेकिन जुलाई 2017 में उसने इससे हटने के इरादे की घोषणा की. किन्‍तु वह कम से कम नवम्‍बर 2020 तक समझौते से संबद्ध पक्ष है क्‍योंकि वह उससे पहले समझौते से हटने का कानूनी तौर पर अनुरोध नहीं कर सकता.

4.   + 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा महत्‍वपूर्ण क्‍यों‍ है?

आईपीसीसी ने वैज्ञानिक अनुसंधान का जितना आकलन किया है उसके अनुसार दुनिया में तापमान वृद्धि को औद्योगिक युग से पहले के स्‍तरों के वैश्विक औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर तक सीमित रखने से  पृथ्‍वी और उसके निवासियों के लिए विनाशकारी स्‍थायी क्षति को रोकने में मदद मिलेगी. इस स्‍थायी क्षति में शामिल हैं : आर्कटिक और अंटार्कटिक में पशुओं के लिए पर्यावास की अपरिवर्तनीय क्षति; बहुत ज़्यादा घातक भीषण गर्मी जल्दी-जल्दी पड़ना; 30 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित कर सकने वाली जल की कमी; समूचे समुदायों और समुद्री जीवों के लिए आवश्‍यक प्रवाल भित्तियों का गायब होना; सभी लघु द्वीपीय देशों के भविष्‍य और अर्थव्‍यवस्‍था को निगलने को तैयार समुद्र का बढ़ता जल स्‍तर आदि.

कुल मिलाकर संयुक्‍त राष्‍ट्र का अनुमान है कि यदि हम वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस की बजाय 1.5 डिग्री तक सीमित रखने में सफल रहे तो 42 करोड़ लोगों को जलवायु परिवर्तन की मार से बचाया जा सकेगा.

हम अब भी कार्बन शून्‍य भविष्‍य की राह में महत्वपूर्ण पड़ाव के बहुत दूर हैं और आगे बढ़ने की आवश्‍यकता पहले से कहीं अधिक है. आंकड़े बताते हैं कि अब भी जलवायु परिवर्तन को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना संभव है. किन्‍तु कुछ कर पाने का अवसर हाथ से निकलता जा रहा है और इसके लिए समाज के सभी पहलुओं में अभूतपूर्व परिवर्तन लाना होगा.

5.  कॉप24 महत्‍वपूर्ण क्‍यों है?

इस वर्ष काटोविच पोलैंड में आयोजित कॉप24 विशेष रूप से महत्‍वपूर्ण है क्‍योकि पेरिस समझौते पर हस्‍ताक्षर करने वाले देशों ने इसमें किए गए संकल्‍पों पर अमल की कार्य योजना अपनाने के लिए 2018 की समय-सीमा तय की थी. इसके लिए एकमात्र सबसे महत्‍वपूर्ण आवश्‍यकता है सभी देशों के बीच परस्पर विश्‍वास.

इस दिशा में जिन गुत्थियों को सुलझाए जाने की आवश्‍यकता है उनमें से एक दुनिया भर में जलवायु कार्रवाई के लिए धन की व्‍यवस्‍था है. जलवायु परिवर्तन तेज़ी से बढ़ रहा है. अब दुनिया और वक्‍त नहीं गंवा सकती. हम सबको मिलकर एक साहसिक, निर्णायक, महत्‍वाकांक्षी और जवाबदेह राह पर सहमत होना पड़ेगा.

6.   सीओपी24 वार्ताओं में क्‍या प्रमाण इस्‍तेमाल किए जाएंगे?

सभी चर्चाएं वर्षों से एकत्र और विशेषज्ञों द्वारा आकलित वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होंगी. इनमें मुख्‍य रूप से निम्‍नलिखित रिपोर्ट शामिल हैं :

– आईपीसीसीसी द्वारा अक्‍तूबर में जारी खतरे की घंटी रिपोर्ट ऑन ग्‍लोबल वार्मिंग ऑफ 1.5 डिग्री सेल्सियस।

– यूएनईपीई द्वारा 2018 एमीशन गैप रिपोर्ट।

– डब्‍ल्‍यूएमओ का 2018 बुलेटिन ऑन ग्रीनहाउस गैस कन्सन्ट्रेशन

– डब्‍ल्‍यूएमओ और यूएनईपी द्वारा किया गया 2018 ओजोन डिप्‍लीशन असेसमेंट

7.   कॉप24 की चर्चाओं की नियमित जानकारी कैसे ली जा सकती है?

इन सारी चर्चाओं के साथ जुड़े रहने के कई तरीके हैं :

– हमारे Climate Change newsletter को यहां सब्‍सक्राइब करें तो आपको प्रतिदिन पोलैंड से यूएन न्‍यूज की सुर्खियां मिलेंगी.

– इस पेज को नियमित रूप से देखते रहें। यहां काटोविच से प्राप्‍त सभी प्रमुख रिपोर्ट संकलित होंगी.

– ट्विटर पर हैशटैग #ClimateAction को फॉलो करें.

8.   हम कैसे चर्चाओं में हिस्‍सा ले सकते हैं और जलवायु कार्रवाई में अपनी भूमिका निभा सकते हैं?

आप Climate Action ActNow.bot  के साथ जुड़ सकते हैं, जो हर रोज़ हमारी पृथ्‍वी को बचाने के लिए दैनिक उपायों के सुझाव देगा और की गई कार्रवाई की गिनती करने के बाद ये दर्शाएगा कि इस सामूहिक कार्रवाई से कितना प्रभाव पड़ता है.

अपने जलवायु कार्रवाई प्रयासों की जानकारी सोशल मीडिया पर देकर आप दूसरे लोगों को भी कार्रवाई के लिए प्रोत्‍साहित करने में मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा यूएनएफसीसीसी सचिवालय द्वारा शुरू किया गया People’s Seat initiative सुनिश्चित करता है कि आप सीओपी24 (COP24) वार्ता में सीधे योगदान कर सकते हैं | तो आप भी #Take Your Seat के साथ जुड़ कर अपनी बात कहें!

9.   जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रयासों के कुछ उदाहरण क्‍या हैं?

संयुक्‍त राष्‍ट्र अपने सभी कार्यों में पर्यावरण की संवहनीयता को मुख्‍यधारा में ला रहा है। यूएन न्‍यूज द्वारा यूएनईपी या संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास कार्यक्रम यूएनडीपी के समर्थन से चल रहे कई कार्यक्रमों के कुछ उदाहरण दिए गए हैं जिनसे जलवायु कार्रवाई की राह दिखाई देती है:

– पूर्वी यूरोप के गांवों में किसान और उद्यमी पीटलैंड्स को बहाल कर उत्‍सर्जन कम कर रहे हैं;

– लेक चाड क्षेत्र में सूखा सहने में सक्षम हजारों पेड़ लगाए जा रहे हैं; ग्‍वाटेमाला में छोटी जोत में कोकोआ की खेती फिर शुरू करने से आर्थिक और पर्यावरण संबंधी दोनों समस्‍याओं के समाधान में मदद मिल रही है;

– भूटान में आजीविकाओं और प्रकृति के संरक्षण को समर्थन देने के लिए पारंपरिक ज्ञान की शक्ति का उपयोग किया जा रहा है;

– तिमोर-लिस्‍ते में नए प्रकार का पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढांचा खड़ा किया जा रहा है;

– कांगो लोकतांत्रिक गणराज्‍य में आचरण में छोटे-छोटे बदलाव बड़ा प्रभाव छोड़ रहे हैं।

10.   संयुक्‍त राष्‍ट्र भी 2019 में जलवायु परिवर्तन शिखर सम्‍मेलन क्‍यों आयोजित करने वाला है?

कॉप24 (COP24) के परिणामों को आगे बढ़ाने और उच्‍चतम संभव स्‍तर पर जलवायु कार्रवाई एवं महत्‍वाकांक्षा को मजबूती देने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंतॉनियो गुटेरेश अगले वर्ष सितंबर में एक जलवायु परिवर्तन शिखर सम्‍मेलन आयोजित कर रहे हैं.

देशों को 2020 तक अपनी राष्‍ट्रीय जलवायु योजनाएं तय कर लेनी हैं, उससे पहले इस शिखर सम्‍मेलन में उत्‍सर्जन सीमित करने और शक्ति बढ़ाने के व्‍यावहारिक प्रयासों पर ध्‍यान दिया जाएगा.

शिखर सम्‍मेलन में सारा ध्‍यान छः क्षेत्रों में कार्रवाई करने पर होगा : धीरे-धीरे नवीकरणीय ऊर्जा अपनाना; जलवायु कार्रवाई के लिए धन जुटाना और कार्बन प्राइसिंग; उद्योगों से उत्‍सर्जन कम करना; प्रकृति को समाधान बनाना; संवहनीय शहर एवं स्‍थानीय कार्रवाई; और जलवायु परिवर्तन को सहने की शक्ति.

 

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