सर्बिया व बोसनिया हर्ज़ेगोविना में, बढ़ती नफ़रत घटनाओं के ख़िलाफ़ चेतावनी

14 जनवरी 2022

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने शुक्रवार को आगाह करते हुए कहा है कि सर्बिया और बोसनिया हर्ज़ेगोविना में, सरकारों को, राष्ट्रीय, नस्लीय या धार्मिक घृणा की हिमायत करने से बचना होगा और उसकी निन्दा भी करनी होगी.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता लिज़ थ्रोसेल ने कहा कि ये कार्यालय दोनों ही देशों में,  हाल के समय में ऐसी घटनाएँ देखकर बहुत विचलित और व्यथित है जिनमें कुछ लोगों को, अत्याचारों से सम्बन्धित अपराधों और युद्धापराधों में दोषी पाए गए अपराधियों को महिमामण्डित करते हुए और कुछ समुदायों को निशाना बनाकर नफ़रत की भड़काऊ भाषा का प्रयोग करते हुए देखा गया है. 

कुछ मामलों में तो सीधे तौर पर हिंसा करने की पुकार लगाते हुए भी देखा गया है.

प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को कुछ राजनैतिक हस्तियों के नफ़रत भरे व भड़काऊ बयानों से हवा मिलती है, और आगामी चुनावों के मद्देनज़र ऐसा विषैला माहौल बढ़ने का डर है. 

लिज़ थ्रोसेल ने कहा, “जैसाकि हमने बार-बार रेखांकित किया है कि घृणा व द्वेषपूर्ण भाषा के प्रयोग में बढ़ोत्तरी, नरसंहार व अन्य अत्याचार अपराधों का खण्डन और पश्चिमी बालकन्स में युद्धापराधों को महिमा मण्डित किया जाना, अतीत के मुद्दे को व्यापक तरीक़े से सुलझाने में नाकामी को दर्शाता है.”

पीड़ितों का असम्मान

इस तरह की घटनाएँ बीते सप्ताहान्त धार्मिक अवकाशों के दौरान घटित हुई हैं, और ये बोसनिया हर्ज़ेगोविना में सर्बों द्वारा संचालित स्थलों के साथ-साथ, सर्ब नगरों में भी हुई हैं.

इन घटनाओं में भारी संख्या में लोगों के समूहों को, मशाल जुलूसों के दौरान, युद्धापराधों के लिये दोषी ठहराए गए और बोसनिया में पूर्व सर्ब सैनिक कमाण्डर - रातको म्लादिच के समर्थन में नारेबाज़ी करते हुए सुना गया है. 

साथ ही, ऐसे गीत गाते हुए भी सुना गया जिनमें पूर्व यूगोस्लाविया के अनेक स्थानों पर फिर से नियंत्रण स्थापित करने की पुकार लगाई गई है.

एक घटना में तो कुछ लोगों ने, एक मसजिद के पास से गुज़रते हुए, हवा में गोलियाँ भी चलाई हैं.

प्रवक्ता ने कहा, “इनमें से कुछ घटनाएँ ऐसे स्थानों पर हुई हैं जहाँ बोसनिया हर्ज़ेगोविना में युद्ध के दौरान, बड़े पैमाने पर अत्याचार वाले अपराध हुए थे... ये घटनाएँ पीड़ितों का घोर असम्मान हैं, उनके लिये भी जो लड़ाई ख़त्म होने के बाद अपने घरों को वापिस लौटे थे.”

निष्पक्ष जाँच

प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की घटनाओं की रोकथाम और उन पर प्रतिबन्ध लगाने में नाकामी, भरोसा बहाल करने व सुलह-सफ़ाई और मेल-मिलाप के रास्ते में एक बड़ी बाधा है.

“इस तरह की गम्भीर घटनाओं की तत्काल, प्रभावशाली और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिये, ताकि इनकी पुनरावृत्ति ना हो, अधिकारियों व संस्थानों में, और समुदायों के दरम्यान, जन विश्वास बढ़ाया जा सके. सामाजिक भाईचारा व शान्ति पूर्ण समाजों के निर्माण के लिये, ऐसा किया जाना बहुत ज़रूरी है.”

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय को ये देखकर कुछ सन्तुष्टि हुई है कि कुछ वरिष्ठ राजनैतिक व धार्मिक हस्तियों ने, इन कृत्यों की निन्दा की है और पुलिस ने भी जाँच-पड़ताल शुरू की है.

पुनरावृत्ति रोकें

मानवाधिकार प्रवक्ता लिज़ थ्रोसेल ने दोनों देशों में सरकारों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि उन्हें सत्य, न्याय और भरपाई सुनिश्चित करने की, अपनी अन्तरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियों का पालन करना होगा.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारों को, इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और मेल-मिलाप के प्रयासों को बढ़ावा देने के उपाय करने होंगे.

“हम दोनों देशों की सरकारों से, किसी भी तरह की राष्ट्रीयता वाली, नस्लीय या धार्मिक नफ़रत की निन्दा करने और उससे दूर रहने की पुकार लगाते हैं.” 

उन्होंने याद दिलाते हुए ये भी कहा कि सिविल और राजनैतिक अधिकारों पर अन्तरराष्ट्रीय प्रतिज्ञा-पत्र (International Covenant on Civil and Political Rights) के पक्ष - तमाम देशों की ये ज़िम्मेदारी है कि वो भेदभाव, शत्रुता और हिंसा के लिये भड़काव पर, क़ानून और क्रियान्वयन पर रोक सुनिश्चित करें. सर्बिया व बोसनिया हर्ज़ेगोविना भी इस प्रतिज्ञा-पत्र के पक्ष देश हैं.

उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्यों के ज़िम्मेदार तत्वों को न्याय के कटघरे में अवश्य लाया जाना होगा.

 

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