यूएन प्रवासन एजेंसी: अफ़ग़ानिस्तान के लिये दो करोड़ 40 लाख डॉलर की अपील

26 अगस्त 2021

अफ़ग़ानिस्तान में गहराते मानवीय संकट को ध्यान में रखते हुए, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने गुरूवार को दो करोड़ 40 लाख डॉलर की तत्काल राहत की अपील जारी की है ताकि पिछले दो महीनों में, देश भर में विस्थापित हुए लाखों लोगों तक ज़रूरी सहायता पहुँचाई जा सके.

यूएन प्रवासन एजेंसी के लिये अफ़ग़ानिस्तान में मिशन प्रमुख स्टुअर्ट सिम्पसन ने कहा कि उनका संगठन सबसे अहम, जीवनरक्षक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये अपने कामकाज का स्तर व दायरा बढ़ा रहा है.

उन्होंने ज़रूरतमन्दों के लिये शरण, ग़ैर-भोजन सम्बन्धी सहायता, जल, साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता के साथ-साथ, सीमावर्ती इलाक़ों में स्वास्थ्य, संरक्षण व मानवीय राहत के प्रबन्ध को प्राथमिकता बताया है.

साथ ही आपातकालीन आजीविका समर्थन व सामाजिक जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.

यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमारी मानवीय गतिविधियाँ जहाँ सम्भव हो सके, जारी हैं और यह सुलभता व सुरक्षा पर निर्भर है."

उन्होंने बताया कि हिंसक संघर्ष व सूखे के कारण व्यापक स्तर पर विस्थापन हुआ है जो कि कोविड-19 महामारी के कारण और भी ज़्यादा गम्भीर हो गया है.

बढ़ती निर्धनता और खाद्य असुरक्षा की वजह से देश भर में विशाल स्तर पर मानवीय व संरक्षण सम्बन्धी ज़रूरतें उपज रही हैं.

फ़िलहाल, 55 लाख अफ़ग़ान नागरिक घरेलू विस्थापित हैं, जिनमें वे साढ़े पाँच लाख लोग भी हैं जो कि इसी वर्ष विस्थापित हुए हैं.

इनमें से आधे लोगों ने पिछले दो महीनों में अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर शरण लेने का प्रयास किया है.

"अनुपयुक्त शरण और साफ़-सफ़ाई व स्वास्थ्य केंद्रों की अपर्याप्त सुलभता के परिणामस्वरूप, प्रभावित परिवारों के रहने के लिये चरम स्तर पर ख़तरनाक परिस्थितियाँ बन गए हैं."

यूएन एजेंसी के मिशन प्रमुख ने बताया कि उनकी जवाबी कार्रवाई ज़रूरतमन्दों तक बिना किसी बाधा के पहुँच पाने और सभी कर्मचारियों की सुरक्षा की गारण्टी पर निर्भर है.

बताया गया है कि यूएन प्रवासन संगठन की यह अपील त्वरित जवाबी कार्रवाई और संरक्षण ज़रूरतों की निगरानी कर रही टीम के आँकड़ों व समीक्षा पर आधारित है.

यह एक अरब 30 करोड़ की उस सहायता धनराशि की अपील से अलग है, जिसे अफ़ग़ानिस्तान मानवीय राहत जवाबी कार्रवाई योजना के तहत पेश किया गया था.

एक करोड़ 80 लाख से अधिक अफ़ग़ा नागरिक, यानि देश की लगभग आधी आबादी, को पहले से ही मानवीय सहायता की आवश्यकता थी.

इनमें एक करोड़ बच्चे भी हैं और उनकी संख्या बढ़ने की सम्भावना है.

 

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