दुनिया को वैश्विक आर्थिक मन्दी के गर्त में जाने से बचाना होगा

30 सितम्बर 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक स्वास्थ्य महामारी कोविड-19 के आर्थिक व सामाजिक परिणाम उतने ही भयावह हैं जितनी हमें आशंका थी. उन्होंने चेतावनी भरे अन्दाज़ में कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को अगर वैश्विक आर्थिक मन्दी से बचना है तो, ठोस कार्रवाई अभी करनी होगी, नहीं तो दशकों में हासिल किया गया विकास ग़ायब हो सकता है.

महासचिव एंतोनियो गुटेरश ने मंगलवार को कोविड-19 और उससे आगे के दौर के लिये विकास के लिये धन जुटाने के विषय पर हुए एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम में कहा कि अलबत्ता, देशों ने वैश्विक संकट का सामना करने के लिये तेज़ी से कार्रवाई की है, और इसके तहत वैश्विक स्तर पर लगभग साढ़े 11 ट्रिलियन डॉलर की रक़म जुटाई गई. लेकिन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का इसमें कम ही हिस्सा है.

ये ऐसी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश हैं जहाँ ज़रूरत सबसे ज़्यादा है और संकट का सामना करने के लिये संसाधन बहुत कम हैं व उनकी क्षमताएँ भी बहुत कमज़ोर हैं.

यून प्रमुख ने जी-20 संगठन द्वारा क़र्ज़ अदायगी को स्थगित किये जाने की पहल का स्वागत किया जिसकी बदौलत विश्व के निर्धनतम देशों में कुछ वित्तीय राहत का माहौल बना है.

लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इस पहल के तहत, दरअसल कोविड-19 संकट की गम्भीरता का समुचित ध्यान नहीं रखा गया है.

उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते, तो हम एक ऐसी आर्थिक मन्दी का सामना करेंगे जो दशकों के दौरान हासिल की गई प्रगति को ख़त्म कर देगी, और 2030 के लिये टिकाऊ विकास एजेण्डा पहुँच से पूरी तरह बाहर कर देगी.”

यूएन महासचिवन  इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन, कैनेडा और जमैका के प्रधानमन्त्रियों के सहयोग से किया. इसमें विश्व नेताओं को मई 2020 में इसी विषय पर हुई बैठक के बाद पाँच महीने में हुए कामकाज पर नज़र डालने का मौक़ा मिला.

मई 2020 के बाद...

मई 2020 की बैठक के बाद देशों के वित्त मन्त्रियों, संयुक्त राष्ट्र, अन्तरराष्ट्रीय संगठनों और दुनिया के शीर्ष अर्थशास्त्रियों के बीच बातचीत जारी रही, जिसके नतीजे कुछ महत्वपूर्ण नीति विकल्पों के रूप में सामने आए. 

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एक पीढ़ीगत अवसर 

यूएन महासचिव ने अपनी टिप्पणी का समापन करते हर किसी का आहवान किया कि वो अपने भविष्य को बेहतरी के लिये आकार देने की ख़ातिर इस पीढ़ीगत अवसर का भरपूर फ़ायदा उठाएँ.

उन्होंने साथ ही, टिकाऊ विकास के सिद्धान्तों का एकाकरण करने और वित्तीय निर्णय प्रक्रिया में सामाजिक व आर्थिक समावेश को शामिल करने की बात भी दोहराई.
उन्होंने कहा, “कोविड-19 के कारण बहुत से नए विचार और रचनाशीलता सामने आए हैं, और उन्होंने ये भी दिखा दिया है कि महत्वाकाँक्षी कार्रवाइयाँ और परिवर्तनशील बदलाव सम्भव हैं.”
“ये महामारी हमें, कठिन सवालों के जवाब देने, असहज तथ्यों का सामना करने और असाधारण बदलाव करने के लिये मजबूर कर रही है.”

 

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