रोहिंज्या शरणार्थी संकट के मूलभूत कारणों का हल निकालना होगा

26 अगस्त 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थी संकट की तरफ़ ज़्यादा ध्यान दिये जाने का आहवान करते हुए कहा है कि इस संकट की जड़ में बैठे कारणों का हल निकाले की ज़रूरत है. ध्यान रहे कि रोहिंज्या शरणार्थी संकट अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 

यूएन महासचिव के प्रवक्ता द्वारा जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र इस संकट से प्रभावित सभी लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा रहेगा.

साथ ही ये विश्व संगठन म्याँमार में शान्ति, मानवाधिकार और एक टिकाऊ विकास वाले भविष्य के लिये क्षेत्रीय शक्तियों के साथ-साथ अन्य सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करता रहेगा. 

एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थी संकट के मूलभूत कारणों को और ज़्यादा तात्कालिकता के साथ हल किये जाने का आहवान करते हुए कहा कि सभी रोहिंज्या शरणार्थियों की सुरक्षित, स्वैच्छिक, सम्मानपूर्ण और टिकाऊ वापसी के लिये परिस्थितियाँ बनाई जानी चाहियें.  

उन्होंने कहा, “आख़िरी ज़िम्मेदारी तो म्याँमार सरकार की ही है जिसने राख़ीन प्रान्त पर सलाहकार आयोग की सिफ़ारिशें लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है.”

“इनसानों की तकलीफ़ों को तात्कालिक तौर पर दूर करने के समाधन तलाश करने से भी आगे, दीर्घकालीन सुलह-सफ़ाई सुनिश्चित करने के लिये जवाबदेही बहुत ज़रूरी है.”

रोहिंज्या शरणार्थी संकट को 25 अगस्त 2020 को तीन वर्ष हो गए जोकि अल्पसंख्यकों के विस्थापन का ताज़ा सबसे बड़ा मामला है.

इनमें ज़्यादातर शरणार्थी म्याँमार के राख़ीन प्रान्त से विस्थापित हुए मुस्लिम, रोहिंज्या और अन्य समुदाय से सम्बन्ध रखते हैं.

एक जटिल शरणार्थी संकट

ये जटिल संकट अगस्त 2017 में उस समय शुरू हुआ जब म्याँमार के उत्तरी हिस्से में कुछ सशस्त्र गुटों ने कुछ पुलिस चौकियों पर हमले किये थे.

आरोप थे कि  उन सशस्त्र गुटों का सम्बन्ध कथित तौर पर रोहिंज्या समुदाय से था. उसके बाद रोहिंज्या समुदाय के ख़िलाफ़ व्यवस्थित और सुनियोजित तरीक़े से हमले किये गए.

UNHCR/Roger Arnold
बांग्लादेश से लगी सीमा पार करते रोहिंज्या शरणार्थी.

अगले कुछ सप्ताहों के दौरान, लगभग सात लाख रोहिंज्या, जिनमें ज़्यादा संख्या बच्चों, महिलाओं और वृद्ध लोगों की थी, अपने घर छोड़कर सुरक्षा की तलाश में बांग्लादेश पहुँच गए. इनमें से ज़्यादातर लोगों के पास पहने हुए कपड़ों के अलावा और कोई भी सामान नहीं था. 

इतने बड़े पैमाने पर रोहिंज्या लोगों के म्याँमार से भागकर बांग्लादेश पहुँचने से पहले भी वहाँ लगभग दो लाख रोहिंज्या शरणार्थी रह रहे थे जो म्याँमार से विस्थापित हुए थे.

 

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रोहिंज्या शरणार्थियों की एक 'पूरी पीढ़ी की आशाएं दांव पर'

म्यांमार से भागकर बांग्लादेश आने वाले रोहिंज्या शरणार्थी दैनिक जीवन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं जिस वजह से एक पूरी पीढ़ी में हताशा घर कर रही है और आशाएं धूमिल हो रही हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने कहा है कि इस पीढ़ी की उम्मीदों पर खरा उतरने के काम में विफल होने का जोखिम कोई विकल्प नहीं है.

रोहिंज्या लोगों की वापसी सुरक्षित और उनकी मर्ज़ी से हो

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामलों के लिए शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि म्याँमार से सुरक्षा के लिए भागने को मजबूर होकर बांग्लादेश पहुँचे रोहिंज्या शरणार्थियों की स्वदेश वापसी उनकी इच्छानुसार ही होनी चाहिए. फिलिपो ग्रैंडी ने कहा कि म्याँमार में रोहिंज्या लोगों के मूल निवास स्थानों पर अब भी हालात सुरक्षित नहीं हैं जिससे कि उनकी सम्मानजक और टिकाऊ तरीक़े से वापसी हो सके.