रोहिंज्या लोगों की वापसी सुरक्षित और उनकी मर्ज़ी से हो

12 नवंबर 2018

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामलों के लिए शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि म्याँमार से सुरक्षा के लिए भागने को मजबूर होकर बांग्लादेश पहुँचे रोहिंज्या शरणार्थियों की स्वदेश वापसी उनकी इच्छानुसार ही होनी चाहिए. फिलिपो ग्रैंडी ने कहा कि म्याँमार में रोहिंज्या लोगों के मूल निवास स्थानों पर अब भी हालात सुरक्षित नहीं हैं जिससे कि उनकी सम्मानजक और टिकाऊ तरीक़े से वापसी हो सके.

ग़ौरतलब है कि म्याँमार के उत्तरी प्रान्त रख़ाइन में सितम्बर 2017 में भड़की हिंसा के बाद लाखों रोहिंज्या लोग पनाह लेने के लिए बांग्लादेश पहुँचे हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त फिलिपो ग्रैन्डी ने रविवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि रोहिंज्या लोगों की म्याँमार वापसी का कोई भी फ़ैसला उनकी इच्छा और बिना किसी दबाव के लिए गए उनके फ़ैसले पर निर्भर होना चाहिए.

रोहिंज्या लोगों पर सुनियोजित और संगठित हिंसा के आरोप म्याँमार की सेना और सुरक्षा बलों पर लगे हैं जिसकी संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल ने प्रारम्भिक रिपोर्ट भी दी है.

अगस्त 2017 में भड़की हिंसा के बाद से क़रीब नौ लाख 25 हज़ार रोहिंज्या लोग बांग्लादेश में विभिन्न शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. बांग्लादेश में पहले ही रोहिंज्या लोग पनाह लेने के लिए पहुँचे थे और पहले से ही क़रीब 2 लाख रोहिंज्या वहाँ के शरणार्थी शिविरों में रह रहे थे. 

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त फिलिपो ग्रैंडी ने कहा है कि म्याँमार में जिन स्थानों पर रोहिंज्या लोग रह रहे थे और वापसी के बाद जहाँ उन्हें ले जाया जाएगा, वहाँ के हालात की समुचित जानकारी मिलने के बाद ही रोहिंज्या लोगों को सोच-समझकर फैसला करने का मौक़ा दिया जाना चाहिए.

"ये सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीक़ा ये होगा कि रोहिंज्या लोगों को म्याँमार में उन स्थानों पर ख़ुद जाने और हालात को देखने समझने का मौक़ा मिले ताकि वो अपनी मर्ज़ी से कोई फ़ैसला ले सकें."

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार म्याँमार ने क़रीब चार हज़ार 355 रोहिंज्या लोगों के नाम म्याँमार वापसी के लिए मंज़ूर की गई सूची में रखे हैं. हालाँकि इस सूची में शामिल सभी रोहिंज्या लोगों को सूचित नहीं किया गया है. ये भी स्पष्ट नहीं है कि ये सूची किस आधार पर और किस तरीक़े से तैयार की गई है.

हालात बेहतर बनाने की ज़िम्मेदारी म्याँमार सरकार पर 

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त फिलिपो ग्रैन्डी ने ये भी कहा है कि बांग्लादेश से रोहिंज्या लोगों की स्वैच्छिक, सुरक्षित, सम्मानजनक और टिकाऊ वापसी के लिए अनुकूल हालात बनाने की ज़िम्मेदारी म्याँमार सरकार पर है.

फिलिपो ग्रैन्डी ने कहा कि फिलहाल तो ये हालात मौजूद नहीं हैं और उनका कार्यालय UNHCR रोहिंज्या लोगों की वापसी के लिए अनुकूल हालात बनाने में म्याँमार सरकार की मदद करने के लिए संकल्पबद्ध है.

ग़ौरतलब है कि रोहिंज्या लोगों की म्याँमार वापसी के लिए जून 2017 में तीन पक्षों के बीच समझौता हुआ था जिसमें UNHCR, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और म्याँमार सरकार ने शिरकत की थी.

ध्यान दिला दें कि संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद द्वारा गठित एक स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच मिशन ने निष्कर्ष दिया है कि म्याँमार की सेना और सुरक्षा बलों द्वारा रोहिंज्या लोगों पर की गई हिंसा अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत भीषण अपराध के दायरे में आती है.

इस जाँच दल ने रोहिंज्या लोगों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा के मामले को अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) या फिर किसी अन्य ट्राइब्यूनल को सौपने की भी सिफ़ारिश की है ताकि ठोस तरीक़े से जाँच हो सके और ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके. 
 

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड