आईसिल अब भी एक गंभीर आतंकवादी ख़तरा

7 फ़रवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद निरोधक मामलों के अध्यक्ष व्लादिमीर वोरोन्कॉफ़ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादी समूह आईसिल के ख़िलाफ़ लड़ाई में एकजुट रहने का आहवान करते हुए कहा है कि ये गुट अफ्रीका, योरोप और एशिया तक अपनी पहुँच बनाए हुए है. उन्होंने शुक्रवार को आईसिल पर अपनी ताज़ा रिपोर्ट सुरक्षा परिषद में पेश करते हुए ये अपील की.

आईसिल को आईसिस व दाएश के नाम से भी जाना जाता है. आतंकवाद निरोधक कार्यालय के प्रभारी व्लादिमीर वोरोन्कॉफ़ ने कहा, “आईसिल ख़ुद को वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बनाने के लिए बार-बार अपना क़द बढ़ाने कोशिश ऑनलाइन और ऑफ़लाइन प्रयासों के ज़रिए करता रहा है. इन प्रयासों के ज़रिए उसका मक़सद ख़ुद को जटिल अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाने की क्षमता हासिल करना है.”

UN Photo/Eskinder Debebe
संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद निरोधक विभाग के प्रमुख व अवर महासचिव व्लादिमीर वोरोनकॉफ़ विश्व भर में आतंकवादी गतिविधियों से दरपेश ख़तरों के बारे में सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए.

“आईसिल के क्षेत्रीय सहयोगी गुट या व्यक्ति स्थानीय परेशानियों वाले मुद्दे उठाकर लोगों को संघर्ष वाले क्षेत्रों में घसीटने की रणनीति पर लगातार काम करते हैं.”

विश्व के अनेक देशों के बहुत से लोग आईसिल के समर्थन में सीरिया और इराक़ भी पहुँचे. अनुमान है कि ऐसे लगभग 27 हज़ार लोग अब भी जीवित हैं.

व्लादिमीर वोरोन्कॉफ़ ने कहा कि ऐसे लोग निकट अवधि और दीर्घकालीन अवधि के लिए जोखिम पैदा करते रहेंगे.

उदाहरण के तौर पर, योरोपीय देशों ने आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोपों में दोषी ठहराराए गए लगभग 1000 मुजरिमों के वर्ष 2020 के दौरान रिहा होने पर चिंता व्यक्त की है. इनमें से कुछ लोग विदेशों में आतंकवादी गतिविधियों में शिरकत करके अपने देशों को लौटने वाले भी लोग हैं.

गंभीर अंतरराष्ट्रीय ख़तरा

रिपोर्ट कहती है कि आईसिल ने सीरियाई अरब गणराज्य में मार्च 2019 में अपने नियंत्रण वाला अंतिम इलाक़ा भी खो दिया था और अक्टूबर 2019 में समूह के नेता अल बग़दादी की मौत के बाद नेतृत्व में भी बदलाव हुआ है.

इसके बावजूद रिपोर्ट ये भी कहती है कि ये गुट अब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आतंकवादी ख़तरा पेश करता है. “इस अभिशाप का सामना करने के लिए हम सभी को सतर्क और एकजुट रहने की बहुत ज़रूरत है.”

एक सिविल सोसायटी प्रतिनिधि मना फ्रेइज ने भी सुरक्षा परिषद में अपने विचार रखे. मोना सीरियाई नगर रक़्क़ा की रहने वाली हैं और वो इस समय वहाँ से भाग निकलने में कामयाब हो गई थीं जब सितंबर 2014 में आईसिल के बेतहाशा हथियारों से लैस लड़ाकों ने उनके घर पर धावा बोल दिया था.

उनके एक पड़ोसी ने आईसिल लड़ाकों का ध्यान बँटा दिया जिससे मोना को जान बचाकर भागने में कामयाबी मिल गई. लेकिन उनके परिवार के सदस्यों को बाद में पकड़ लिया गया था, उन्हें प्रताड़ित किया गया जिसके बाद उन सभी को बहुत गहरा सदमा पहुँचा.

UN Photo/Evan Schneider
संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद निरोधक कमेटी की कार्यकारी निदेशक मिशेल कॉनिन्श ने भी आईसिल पर महासचिव की 10वीं रिपोर्ट पर सुरक्षा परिषद के सामने आपनी बात कही. (7 फ़रवरी 2020)

मोना फ्रेइजी 2017 में रक़्क़ा वापिस लौटीं जब वहाँ से दाएश का आतंक ख़त्म हो गया था. उन्होंने याद करते हुए बताया, “महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा गया था और सभी महिलाएँ बहुत ही मुश्किल हालात में थीं.”

“मुझे अनाथ बच्चे मिले... और उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें दाएश में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया, और महिलाओं को दाएश के लड़ाकों के बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर किया गया. अगर वो महिलाओं दाएश के लड़ाकों की यौन गतिविधियों के लिए इनकार कर देती थीं, तो उन्हें दंडित किया जाता था.”

मोना फ्रेइजी ने बताया, “वो महिलाएँ अपने गर्भ को किसी तरह भी रोक नहीं सकती थीं. वो ऐसी बंधक थीं जिनके पास राक्षसों के आदेशों का पालन करने के अलावा और कोई चारा ही नहीं था. यहाँ तक कि आज भी उन महिलाओं के सामने ये चुनौती है कि उनके बच्चों के पिता कौन हैं.”

व्लादिमीर वोरोन्कॉफ़ ने सुरक्षा परिषद को बताया कि इस समय सबसे ज़्यादा तात्कालिक चिन्ता उन लगभग एक लाख लोगों के बारे में जिनका कोई संहबंध आईसिल से है, इनमें मुख्य रूप से महिलाएँ और बच्चे हैं, जिन्हें बन्दीगृहों और विस्थापितों के शिविरों में रखा गया है.

पुनर्वास की दरकार

संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद निरोधक कमेटी की की कार्यकारी निदेशक मिशेल कॉनिन्श ने बताया कि ये महिलाएँ और बच्चे बहुत ही नाज़ुक और भीषण हालात में रहने को मजबूर हैं, जिससे उनके फिर से आतंकवादी माहौल में फँस जाने का भी जोखिम है.

उन्होंने इन महिलाओं और बच्चों को अपने यहाँ पनाह देने वाले देशों के इस क़दम का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि कुछ अन्य देश भी इसी तरह के क़दम उठाएंगे.

मिशेल कॉनिन्श ने कहा, “आईसिल ने पूरे के पूरे समुदाय तबाह कर दिए हैं, परिवारों को उजाड़ दिया है और अपनी दिग्भ्रमित व विषाक्त विचारधारा का प्रचार करके हज़ारों लोगों को गुमराह कर दिया है.”

“आज अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ये मौक़ा है कि आतंकवादी गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदारों पर क़ानूनी कार्रवाई की जाए, प्रभावितों का पुनर्वास किया जाए और आईसिल की हिंसा से तबाह हुए स्थानों में पुनर्निर्माण कार्य करके समुदायों को बसाकर उनकी बेहतरी के उपाय किए जाएँ.”

 

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