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अफ़ग़ानिस्तान: महिलाओं के अधिकारों पर पाबन्दियों से आर्थिक बदहाली गहराने की आशंका

अफ़ग़ानिस्तान में एक लड़की तरबूज़ बेचते समय अपनी पढ़ाई भी कर रही है.
UNAMA/Farzana Zeba Kalam
अफ़ग़ानिस्तान में एक लड़की तरबूज़ बेचते समय अपनी पढ़ाई भी कर रही है.

अफ़ग़ानिस्तान: महिलाओं के अधिकारों पर पाबन्दियों से आर्थिक बदहाली गहराने की आशंका

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा और कामकाज पर लगाई गई पाबन्दियों की वजह से, देश में अति-गम्भीर सामाजिक-आर्थिक हालात उपजे हैं, जिसके स्थानीय आबादी के लिए विनाशकारी नतीजे होने की आशंका है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने मंगलवार को Afghanistan Socio-Economic Outlook 2023, शीर्षक वाली नई रिपोर्ट जारी की, जिसमें अगस्त 2021 में देश की सत्ता पर तालेबान का नियंत्रण स्थापित होने और उसके बाद उसके शासन से उत्पन्न हुई परिस्थितियों की समीक्षा की गई है.

रिपोर्ट बताती है कि सत्ता पर तालेबान के क़ब्ज़े के बाद अफ़ग़ान अर्थव्यवस्था ढह गई थी, जिसके कारण, पहले से ही कठिनाइयों से जूझ रहे इस देश के निर्धनता के गर्त में धँसने की गति तेज़ हो गई.

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एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के लिए यूएन विकास कार्यक्रम की क्षेत्रीय निदेशक कन्नी विग्नराजा ने सचेत किया कि अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक जीवन में, महिलाओं की सक्रिय भागेदारी के बिना, देश टिकाऊ पुनर्बहाली के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ सकता है.

इनमें ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय राहत पहुँचाना और आजीविका बचाने पर लक्षित परियोजनाएँ हैं.  

उन्होंने कहा कि केवल लड़कियों की शिक्षा को पूर्ण रूप से जारी रखकर और महिलाओं के लिए कामकाजी अवसर सुनिश्चित करके ही, वास्तविक प्रगति की आशा को जीवित रखा जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान की आबादी चार करोड़ है और वर्ष 2021 में देश का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 14.3 अरब डॉलर आँका गया.

इन आँकड़ों के आधार पर अफ़ग़ानिस्तान, विश्व में सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाले देशों में है और देश की लगभग 85 फ़ीसदी आबादी, निर्धनता रेखा से नीचे जीवन गुज़ार रही है.

कुछ लोगों को अपने घर, ज़मीन, और आय प्रदान करने वाली सम्पत्ति बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि अन्य लोग अपने ही परिवार के सदस्यों के ज़रिए, आमदनी का साधन ढूंढ रहे हैं. बच्चों से मज़दूरी कराई जा रही है और लड़कियों की कम उम्र में ही शादी की जा रही है.

अन्तरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भरता

रिपोर्ट में देश की अर्थव्यवस्था में कुछ उत्साहजनक संकेत साझा किए गए हैं, जिनमें निर्यात में वृद्धि, राजकोषीय राजस्व में आठ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की सम्भावना, विनिमय दर में स्थिरता, और मुद्रास्फीति में आई गिरावट है.

मगर, यह स्पष्ट किया गया है कि इसकी एक बड़ी वजह विशाल स्तर पर प्राप्त हो रही अन्तरराष्ट्रीय सहायता धनराशि है, जोकि 2022 में तीन अरब 70 करोड़ डॉलर थी. इनमें से तीन अरब 20 करोड़ डॉलर, संयुक्त राष्ट्र वर्ष 2022 में प्रदान किए.

यह देश में हालात की दीर्घकालिक बेहतरी का संकेत नहीं है. प्रति व्यक्ति आय में इस वर्ष और 2024 में गिरावट आने की सम्भावना है.

यूएन विकास कार्यक्रम के अनुमान के अनुसार, यदि सहायता धनराशि में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जाती है, तो मुद्रास्फीति 2024 में 10 प्रतिशत के आँकड़े को छू सकती है और औसत आय में 40 प्रतिशत की कमी आने की आशंका है.

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अन्तरराष्ट्रीय सहायता में किसी भी प्रकार की गिरावट से अफ़ग़ानिस्तान के लिए आर्थिक सम्भावनाएँ बद से बदतर हो जाएंगी और अत्यधिक निर्धनता अनेक दशकों तक बनी रह सकती है.

अफ़ग़ानिस्तान के कन्दाहार में एक पोलियो अभियान के तहत, बच्चे का टीकाकरण किया जा रहा है.
© UNICEF/Frank Dejongh

संयुक्त राष्ट्र ने 2023 में चार अरब 60 करोड़ डॉलर की अन्तरराष्ट्रीय सहायता की अपील जारी की है, जोकि ज़रूरतमन्द अफ़ग़ान नागरिकों के लिए न्यूनतम आवश्यक उपाय है.

यूएन रिपोर्ट में चिन्ता जताई है कि कठिन हालात का सामना कर रहे अफ़ग़ान नागरिक गुज़र-बसर के लिए हताशा भरे निर्णय लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में यूएन विकास कार्यक्रम

- यूएन विकास कार्यक्रम, अफ़ग़ानिस्तान में पिछले पाँच दशकों से अधिक समय से जलवायु परिवर्तन व सहन-सक्षमता, लैंगिक मुद्दों, शासन व्यवस्था, स्वास्थ्य, आजीविका, क़ानून के राज समेत अन्य क्षेत्रों में सक्रिय है.

- टिकाऊ विकास लक्ष्यों के वृहद फ़्रेमवर्क, और अन्य यूएन एजेंसियों के साथ नज़दीकी समन्वय में, यूएन विकास कार्यक्रम, अफ़ग़ान नागरिकों की शान्ति, समृद्धि और सततता की आकांक्षाओं को समर्थन प्रदान कर रहा है.

- यूएन विकास कार्यक्रम द्वारा फ़िलहाल संकट प्रतिक्रिया कार्रवाई कार्यक्रम लागू किया जा रहा है, जोकि अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था को बदहाली से बचाने और मानवीय संकट की रोकथाम पर लक्षित हैं.