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अफ़ग़ानिस्तान: महिला कर्मचारियों पर पाबन्दी के बाद, यूएन ने शुरू की अपने कामकाज की समीक्षा

मानवीय राहत मामलों में संयोजन के लिए यूएन एजेंसी की एक महिला कर्मचारी, पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में विस्थापित महिलाओं से मिल रही है.
© UNOCHA/Charlotte Cans
मानवीय राहत मामलों में संयोजन के लिए यूएन एजेंसी की एक महिला कर्मचारी, पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में विस्थापित महिलाओं से मिल रही है.

अफ़ग़ानिस्तान: महिला कर्मचारियों पर पाबन्दी के बाद, यूएन ने शुरू की अपने कामकाज की समीक्षा

मानवाधिकार

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र ने अपने कामकाज की समीक्षा किए जाने की घोषणा की है और यूएन के अफ़ग़ान कर्मचारियों को फ़िलहाल घर पर ही रहने के लिए कहा गया है. देश में तालेबान प्रशासन द्वारा अफ़ग़ान महिलाओं पर संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने पर लगाई गई पाबन्दी के कुछ दिनों बाद इस आशय की जानकारी दी गई है.

अफ़ग़ानिस्तान में यूएन कार्यालय ने मंगलवार को जारी अपने एक वक्तव्य में बताया कि यूएन के लिए सेवारत अफ़ग़ान कर्मचारियों, महिलाओं व पुरुषों, को ऑफ़िस नहीं आने के लिए कहा गया है.

हालाँकि उन कर्मचारियों को फ़िलहाल, अपवादस्वरूप, इस निर्देश से बाहर रखा गया है, जो बहुत अहम दायित्व निभा रहे हैं.

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यूएन ने क्षोभ प्रकट किया कि तालेबान द्वारा थोपी गई यह पाबन्दी, महिलाओं व लड़कियों के विरुद्ध लिए गए उन सख़्त फ़ैसलों की कड़ी में एक नया क़दम है, जिससे सार्वजनिक व दैनिक जीवन में उनकी भागेदारी पर गहरा असर हुआ है.

ग़ौरतलब है कि अगस्त 2021 में अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर तालेबान की वापसी के बाद से ही, देश में महिलाओं व लड़कियों के लिए शिक्षा, रोज़गार समेत अन्य क्षेत्रों में सख़्त पाबन्दियाँ लगाई गई हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने तालेबान के नवीनतम आदेश की निन्दा करते हुए कहा कि यह यूएन चार्टर समेत अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अन्तर्गत ग़ैरक़ानूनी है.

वक्तव्य में कहा गया है कि इस पाबन्दी के ज़रिए, तालेबान प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र को एक ऐसा दुखद निर्णय लेने के लिए मजबूर करने की कोशिश की है, जिसमें दो विकल्प हैं: अफ़ग़ान लोगों के समर्थन में यहाँ मौजूदगी बनाई रखी जाए या फिर अपने सिद्धान्तों व मानकों के पक्ष में मज़बूती से खड़ा हुआ जाए, जिन्हें पूरा करना हमारा दायित्व है.

“यह स्पष्ट होना चाहिए कि अफ़ग़ान लोगों के लिए इस संकट के किसी भी प्रकार के नकारात्मक नतीजे, [तालेबान] प्रशासन की ज़िम्मेदारी होगी.”

अभियान संचालन की समीक्षा

वक्तव्य के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में यूएन की विशेष प्रतिनिधि और मिशन प्रमुख रोज़ा ओटुनबायेवा ने संगठन के कामकाज की समीक्षा किए जाने की बात कही है, जोकि 5 मई तक जारी रहेगी.

इस अवधि में, अफ़ग़ानिस्तान में यूएन, तालेबान प्रशासन के साथ सभी स्तरों पर, सैद्धान्तिक व सृजनात्मक सम्पर्क व बातचीत में हिस्सा लेना जारी रखेगा, अभियान में आवश्यकता अनुसार फेरबदल किए जाएंगे और सभी सम्भावित नतीजों के लिए आपात तैयारी में तेज़ी लाई जाएगी.

बताया गया है कि यूएन द्वारा जीवनरक्षक, सामयिक मानवीय राहत गतिविधियों को मानव कल्याण सिद्धान्तों के अनुरूप जारी रखे जाने के प्रयास किए जाएंगे.

इस क्रम में, पाबन्दियों के दायरे और उनके नतीजों की समीक्षा की जाएगी और अवरोध नज़र आने पर गतिविधियाँ रोक दी जाएंगी.

संगठन ने अगस्त 2021 के बाद, देश में अपनी उपस्थिति बनाए रखने का निर्णय लिया था, ताकि अभूतपूर्व पीड़ा सह रहे लोगों तक सहायता पहुँचाई जा सके.

इससे पहले, दिसम्बर 2022 में तालेबान ने ग़ैर-सरकारी संगठनों में महिलाओं के कामकाज पर पाबन्दी लगा दी थी, जिससे महिलाओं व लड़कियों तक राहत पहुँचाने के कार्य में बाधा उत्पन्न हुई थी.