ICC: मध्य अफ़्रीकी गणराज्य के एक पूर्व 'सेलेका' कमाण्डर - सईद पर मुक़दमा शुरू

नैदरलैण्ड्स के हेग स्थित अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में 26 सितम्बर को अपने ऊपर मुक़दमा शुरू होने के समय, महामत सईद अब्देल कानी.
© ICC-CPI
नैदरलैण्ड्स के हेग स्थित अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में 26 सितम्बर को अपने ऊपर मुक़दमा शुरू होने के समय, महामत सईद अब्देल कानी.

ICC: मध्य अफ़्रीकी गणराज्य के एक पूर्व 'सेलेका' कमाण्डर - सईद पर मुक़दमा शुरू

कानून और अपराध की रोकथाम

मध्य अफ़्रीकी गणराज्य (CAR) में मानवता के विरुद्ध अपराधों और युद्धापराधों के लिये आदेश जारी करने के अभियुक्त एक पैरामिलिट्री कमाण्डर महामत सईद अब्देल कानी पर नैदरलैण्ड्स के हेग स्थिति अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में सोमवार को मुक़दमा शुरू हुआ है.

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मुख्यतः मुस्लिम बहुलता वाले लड़ाका संगठन सेलेका में शीर्ष स्तरीय कमाण्डर - महामत सईद अब्देल कानी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खण्डन किया है. ये आरोप, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य (CAR)की राजधानी बांगुई में, 2013 के समय हुए अत्याचारों से सम्बन्धित हैं.

क़ब्ज़ा

वर्ष 2012 के अन्तिम हिस्से और 2013 के शुरुआती हिस्से के दौरान इन अपराधों को अंजाम दिये जाने से पहले, सेलेका लड़ाका समूह ने राजधानी की तरफ़ बढ़त हासिल कर ली थी, जिस दौरान पुलिस थानों पर हमले किये गए, सैन्य ठिकानों पर क़ब्ज़ा किया गया, नगरों और क्षेत्रीय राजधानियों पर नियंत्रण किया गया, और राष्ट्रपति फ़्रांकॉइस बोज़िज़े के सन्दिग्ध समर्थकों को निशाना बनाया गया.

उन्होंने राजधानी बांगुई पर मार्च 2013 में नियंत्रण कर लिया था और लगभग 20 हज़ार की संख्या वाले बलों के साथ, घर भी लूटे.

इस दौरान राष्ट्रपति फ़्रांकॉइस बोज़िज़े का सहानुभूति रखने वालों को भी तलाश किया गया, जिन लोगों ने भागने की कोशिश की उन्हें पीछे से ही गोली मार दी गई, या कुछ अन्य लोगों को उनके घरों में ही मार दिया गया.

महामत सईद अब्देल कानी के गिरफ़्तारी वॉरण्ट में कहा गया है, “महिलाओं और लड़कियों का बलात्कार और उनके बच्चों व माता-पिता की मौजूदगी में ही सामूहिक बलात्कार किया गया; कुछ ज़ख़्मी पीड़ितों की मौत भी हो गई.”

आम लोगों को निशाना बनाया गया

वॉरण्ट के अनुसार, “सिविल आबादी के कुछ हिस्से को हत्याओं, बन्दीकरण, प्रताड़ना, बलात्कार, राजनैतिक, जातीय और धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के आधार पर निशाना बनाया गया, और ग़ैर-मुसलमानों व उन अन्य लोगों के घरों को लूटा गया या उन्हें ध्वस्त किया गया, जिन पर राष्ट्रपति बोज़िज़े की सरकार के समर्थक समझा गया.”

महामत सईद अब्देल कानी के आरोप पत्र में बन्दीकरण, प्रताड़ना, अत्याचार, जबरन गुमशुदगी और अन्य अमानवीय गतिविधियाँ शामिल हैं जिन्हें 2013 में अप्रैल से नवम्बर 2013 के दौरान अंजाम दिया गया.

आरोप पत्र के अनुसार महामत सईद अब्देल कानी ने, एक कुख्यात बन्दी केन्द्र के “दैनिक अभियानों की निगरानी की” जहाँ सेलेका लड़ाका संगठन द्वारा गिरफ़्तार किये गए लोगों को रखा जाता था.

भयावह परिस्थितियाँ

अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के वक्तव्य में लिखा गया है, “क़ैदियों को छोटी, प्रकाशहीन, भीड़ भरी कोठरियों में रखा जाता था जहाँ केवल शौचालय के रूप में एक बाल्टी दी जाती थी और बहुत कम भोजन या बिल्कुल भी भोजन नहीं दिया जाता था, जिससे क़ैदियों को अपना ख़ुद का मूत्र पीना पड़ता था.”

बन्दियों को रबर की पट्टियों वाले कौड़ों, रायफ़लों की बट से पीटा जाता था और कहा जाता था: ”हम तुम्हें एक-एक करके मारने जा रहे हैं.”

क़ैदियों को ऐसी दर्दनाक अवस्था में कई घण्टों तक रखा जाता था कि वो “ख़ुद ही अपनी मौत मांगते थे”. इस स्थिति को “अरबताचा” (arbatacha) कहा जाता था जिसमें क़ैदी के हाथों और टांगें को पीछे की तरफ़ इस तरह से बांधा जाता था कि उनकी टांगें उनकी कोहनियों से छूती थीं.

नैदरलैण्ड्स के हेग स्थित अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में महामत सईद अब्देल कानी का मुक़दमा शुरू होने के दिन का एक दृश्य.
© ICC-CPI
नैदरलैण्ड्स के हेग स्थित अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में महामत सईद अब्देल कानी का मुक़दमा शुरू होने के दिन का एक दृश्य.

जबरन जबरन स्वीकारोक्ति

आईसीसी के वॉरण्ट में कहा गया है कि महामत सईद अब्देल कानी ने इस तकनीक को कथित तौर पर, बन्दियों के स्वीकारोक्ति बयान हासिल करने के लिये बहुत प्रभावशाली बताया था. साथ ही, वॉरण्ट में यह भी लिखा गया है कि यह निर्णय लेने की ज़िम्मेदारी भी महामत सईद अब्देल कानी की थी कि किस क़ैदी को, एक भूमिगत कोठरी में भेजा जाए जो उसके दफ़्तर के नीचे स्थित थी.

न्यायालय का कहना है कि महामत सईद अब्देल कानी, CEDAD नामक एक अन्य बन्दीग्रह का अभियान कमाण्डर था जिसकी परिस्थितियों को “अमानवीय” बताया गया था, और वो वहाँ ऐसे लोगों की सूची रखी जाती थी जिन्हें गिरफ़्तार किया जाना था या गिरफ़्तारियों के आदेश दिये थे.

मुक़दमा जारी है.

Said case: Trial opening, 26 September – 1st session