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सूडान: युद्धापराध के मुलज़िमों को ‘न्याय के कटघरे में लाना होगा’

आईसीसी की मुख्य अभियोजक फ़तू बेन्सूडा सुरक्षा परिषद को वीडियो टेलीकॉन्फ्रेन्सिन्ग के ज़रिए सम्बोधित करते हुए.
UN Photo/Evan Schneider
आईसीसी की मुख्य अभियोजक फ़तू बेन्सूडा सुरक्षा परिषद को वीडियो टेलीकॉन्फ्रेन्सिन्ग के ज़रिए सम्बोधित करते हुए.

सूडान: युद्धापराध के मुलज़िमों को ‘न्याय के कटघरे में लाना होगा’

क़ानून और अपराध रोकथाम

अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की मुख्य अभिजोयक फ़तू बेन्सूडा ने सुरक्षा परिषद से आग्रह किया है कि दारफ़ूर में युद्धापराध और मानवता के विरुद्ध अपराधों के मामलों में आरोपों का सामना कर रहे पूर्व राष्ट्रपति उमर अल-बशीर समेत अन्य लोगों पर मुक़दमा चलाने के लिए सूडान पर और दबाव बनाया जाना होगा. हाल ही में युद्धापराध के एक मुलज़िम ने मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में आत्मसमर्पण किया है. 

आईसीसी अभियोजक फ़तू बेन्सूडा ने बुधवार को 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद को वीडियो टैलीकॉन्फ्रेन्सिन्ग के ज़रिये सम्बोधित करते हुए कहा कि न्याय के लिए सूडान की जनता की वाजिब माँगों को पूरा करना प्राथमिकताओं में शामिल है. 

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उन्होंने माना कि पूर्व राष्ट्रपति  उमर अल-बशीर के अपदस्थ होने के एक साल बाद मौजूदा सूडान सरकार लोकतान्त्रिक भविष्य की दिशा में बढ़ने का प्रयास कर रही है. लेकिन इस दौरान कोविड-19 महामारी सहित अन्य चुनौतियों से निपटने में ध्यान बँटा हुआ है. 

आईसीसी अभियोजक ने ध्यान दिलाया कि दारफ़ूर के लिए न्याय लम्बे समय से पहुँच से दूर रहा है और अब इन हालात में बदलाव लाने का समय भी पहले ही निकल चुका है. 

“एक अवसर की उम्मीद बँधी है. हमें इसे सामूहिक रूप से लपकना होगा. आइये, हम मिलकर दारफ़ूर के पीड़ितों को अन्तत: न्याय दिलाने के लिए मिलकर काम करें.”

ग़ौरतलब है कि दारफ़ूर में सरकार, उसके सहयोगी मिलिशिया और अन्य विद्रोही गुटों में हिन्सक सन्घर्ष वर्ष 2003 में शुरू हुआ जिसमें तीन लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई और 27 लाख से ज़्यादा लोगों को अपना घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा. 

आईसीसी अभियोजक द्वारा सुरक्षा परिषद को अवगत कराए जाने से एक ही दिन पहले जन्जावीड मिलिशिया के कथित कमान्डर अली मोहम्मद अली अब्द-अर-रहमान उर्फ़ अली कुशयाब ने मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में  सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद उन्हें अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के सुपुर्द किया गया है. 

अली कुशयाब युद्धापराध और मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में आईसीसी द्वारा वान्छित था. 

पूर्व राष्ट्रपति उमर अल-बशीर भ्रष्टाचार के आरोपों में फ़िलहाल सूडान में ही दो साल की क़ैद की सज़ा काट कर रहे हैं. 

आईसीसी ने पहले वर्ष 2009 और फिर 2010 में उमर अल-बशीर के ख़िलाफ़ युद्धापराध व मानवता के विरुद्ध अपराधों के मामले में गिरफ़्तारी का वॉरन्ट जारी किया था ताकि द हेग स्थित न्यायालय में उन पर मुक़दमा चलाया जा सके. 

उनके अलावा तीन अन्य लोगों के ख़िलाफ़ वॉरन्ट जारी किए जा चुके हैं जिनमें दो फ़िलहाल सूडान सरकार की हिरासत में हैं. 

राजनैतिक सफ़र के प्रति आशावान

आईसीसी अभियोजक ने कहा कि सूडान में जारी राजनैतिक प्रक्रिया और दक्षिण सूडान की राजधानी जूबा में सरकार व विद्रोही गुटों के बीच बातचीत से दारफ़ूर के पीड़ितों को न्याय की उम्मीद बँधती है.   

उन्होंने सुरक्षा परिषद से अपील की है कि सैन्य बलों और गठबँधन सरकार को आईसीसी के साथ सम्पर्क मज़बूत बनाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा. साथ ही उनकी टीम व जाँचकर्ताओं को सूडानी क्षेत्र में आवाजाही की इजाज़त के सिलसिले में सहयोग मिलना अहम है. 

उमर अल-बशीर के अलावा आईसीसी अब्द-अर-रहीम हुसैन और अहमद हारून की गिरफ़्तारी के लिए प्रयासरत है.

माना जाता है कि ये दोनों मुलज़िम इस समय सूडान में हिरासत में हैं जबकि एक अन्य सन्दिग्ध का अभी पता नहीं चल पाया है. 

फ़तू बेन्सूडा ने उन रिपोर्टों पर चिन्ता जताई जिनमें दोनों सन्दिग्धों के कोविड-19 से संक्रमित होने की बात कही गई है और हिरासत के दौरान उनकी हरसम्भव स्वास्थ्य सहायता मुहैया कराए जाने की उम्मीद जताई. 

सूडान आईसीसी की स्थापना करने वाली रोम संविधि" (Rome Statue)  पर मुहर लगाने वाले देशों में शामिल नहीं है लेकिन अभियोजक ने ज़ोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1593 के तहत और आईसीसी जजों के आदेशानुसार सभी सन्दिग्धों को आईसीसी के हवाले करना सूडान की क़ानूनी ज़िम्मेदारी है.