युद्धों में यौन हिंसा से, आबादियाँ आतंकित, ज़िन्दगियाँ तबाह और समुदायों में बिखराव

19 जून 2022

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को कहा है कि यौन हिंसा, युद्धक गतिविधियों की एक क्रूर रणनीति बन गई है और आबादियों को आतंकित करने वाले दमन से, लोगों की ज़िन्दगियाँ तबाह होती हैं व समुदाय तितर-बितर हो जाते हैं.

यूएन महासचिव ने, ‘संघर्ष में यौन हिंसा के उन्मूलन पर अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ पर कहा कि यौन हिंसा को अंजाम देने वाले तत्व, यदा-कदा ही, अपने कृत्यों के परिणाम भुगत पाते हैं. 

यह दिवस रविवार, 19 जून को मनाया जा रहा है.

यूएन प्रमुख ने कहा, “केवल पीड़ितों को ही जीवन भर कलंक व उत्पीड़न की मनोभावना सहन और वहन करनी पड़ती है, जो अक्सर दो मोर्चों से क्रूरता का सामना करते हैं, हानिकारक सामाजिक प्रथाओं का और पीड़ित को ही कलंकित करने यानि उन्हें ही ज़िम्मेदार ठहराए जाने का.”

समर्थन में एकजुट हों

बच्चे व सशस्त्र संघर्ष के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने ध्यान दिलाया कि 14 हज़ार 200 बच्चों की, यौन हिंसा के पीड़ितों के रूप में पुष्टि की गई है, मगर ये एक विशाल समस्या का एक छोटा सा अंश मात्र है.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा: हम समर्थन में एकजुटता के साथ खड़े हैं... बेहद निर्बल हालात वाली महिलाओं, लड़कियों, पुरुषों और लड़कों की सहायता के लिये, क्योंकि वो एक मानवीय संकट के बीच, गरिमा व शान्ति के साथ जीवन जीने के लिये संघर्षरत हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त सहायता मुहैया कराने पर ध्यान देना होगा जहाँ कमज़ोर संरक्षण व्यवस्थाएँ हैं.

इसका अर्थ है – अपराधियों को ज़िम्मेदार ठहराने के लिये राष्ट्रीय न्यायिक प्रणालियों को मज़बूत करना होगा, पीड़ितों को चिकित्सा व मनो-सामाजिक समर्थन व सहायता सुनिश्चित करनी होगी और पीड़ितों के अधिकार मज़बूत करने होंगे.

दक्षिण सूडान में संघर्ष सम्बन्धी यौन हिंसा के दर्ज मामलों में से लगभग एक चौथाई मामले, बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा के होते हैं.
© UNICEF/Mackenzie Knowles-Coursin
दक्षिण सूडान में संघर्ष सम्बन्धी यौन हिंसा के दर्ज मामलों में से लगभग एक चौथाई मामले, बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा के होते हैं.

इसके अतिरिक्त, पीड़ितों को संरक्षण, समानता और न्याय से वंचित करने वाली सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक बाधाओं को तोड़ने वाले - महिलाओं के नेतृत्व वाले सिविल सोसायटी संगठनों की सहायता करने की ज़रूरत है. 

साथ ही, संघर्ष के दौरान यौन हिंसा के लिये ज़िम्मेदार कारणों का समाधन निकालने की भी आवश्यकता है.

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा, “अधिक राजनैतिक संकल्प और वित्तीय संसाधनों के साथ, हम कथनी-और करनी के अन्तर को दूर कर सकते हैं, और संघर्ष के दौरान यौन हिंसा के अभिशाप का ख़ात्मा कर सकते हैं, सदैव के लिये.”

आने वाली पीढ़ियों को बचाएँ

संघर्ष में यौन हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन और विदेश मामलों व सुरक्षा नीति के लिये योरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि जोसेप बॉरेल ने भी, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से, संघर्ष सम्बन्धित यौन हिंसा का उन्मूलन करने में मदद करने का आहवान करते हुए एक वक्तव्य जारी किया है. 

वक्तव्य में, आने वाली पीढ़ियों को, इस अभिशाप से बचाने की भी पुकार लगाई गई है.

इस संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है, “ये समय केवल प्रतिक्रियात्मक रुख़ अपनाने से आगे बढ़ने का और यौन हिंसा के मूल में बैठे कारणों और उसके अदृश्य कारकों से निपटने का है... साथ ही पीड़ितों पर ही आरोप मढ़ने वाली हानिकारक सामाजिक रीतियों से भी निपटे जाने की ज़रूरत है जो तथाकथित इज़्ज़त, शर्म से जुड़ी होती हैं.”

इन दोनों हस्तियों ने यूक्रेन युद्ध के भी आम लोगों पर हो रहे असर पर, गम्भीर सदमे का इज़हार किया है, और यौन हिंसा के बढ़ते आरोपों व दिल दहला देने वाली आपबीतियों पर भी गम्भीर चिन्ताएँ व्यक्त की हैं.

संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है, “हम ऐसे अपराधों की कड़ी निन्दा करते हैं और हिंसा का तुरन्त ख़ात्मा किया जाने की पुकार लगाते हैं.”

बढ़ता सैन्यकरण

दोनों हस्तियों ने, अफ़ग़ानिस्तान से लेकर गिनी, माली, म्याँमार, और अन्यत्र, सैन्य तख़्तापलट और सैन्य नियंत्रण की महामारियों की तरफ़ भी ध्यान आकर्षित किया है, जिन्होंने महिलाधिकारों पर हुई प्रगति को पलट दिया है.

और अन्यत्र भी देशों में युद्ध जारी हैं व नए संकट बढ़ रहे हैं जिनमें मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सीरिया और यमन शामिल हैं.

हर एक स्थान पर संघर्ष सम्बन्धित यौन हिंसा का बेहद चिन्ताजनक स्तर देखा जाता है जिसका प्रयोग एक राजनैतिक हथियार के रूप में, उत्पीड़न और अग्रिम मोर्चों पर मौजूद हस्तियों व कार्यकर्ताओं के विरुद्ध बदले की कार्रवाई के लिये किया जाता है.

संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है, “एक ऐसा संरक्षणात्मक वातावरण विकसित करना बहुत अहम है जो प्रथम दृष्टया ही यौन हिंसा होने से रोके और ऐसे मामलों की सुरक्षित सूचना पंजीकरण सम्भव बनाए और समुचित कार्रवाई भी सुनिश्चित करे.”

शरीर बने युद्ध क्षेत्र

संयुक्त राष्ट्र के जनसंख्या कोष (UNFPA) की प्रमुख नतालिया कैनेम ने ध्यान दिलाया है कि जब युद्ध शुरू होते हैं, तो यौन हिंसा का आतंक और विनाश भी शुरू हो जाता है.

उन्होंने कहा, “महिलाओं व लड़कियों के शरीर युद्धक्षेत्र बन जाते हैं. बलात्कार का प्रयोग भी उसी तरह युद्ध के एक शस्त्र के रूप में किया जाता है जिस तरह कोई बम किसी इमारत को ध्वस्त कर देता है, या कोई टैंक जिस तरह किसी भीड़ को अपना शिकार बनाता है.”

उन्होंने कहा कि यह महिलाओं को ख़ामोश करती है और उन्हें शर्मशार होने के बोझ तले दबाती है, उनमें डर और असुरक्षा का बीज बोती है और एक दीर्घकालीन विकलांगता, यौन संक्रमणों, आमदनियों के नुक़सान, स्वास्थ्य-देखभाल लागतें और पीडितों व उनके परिजन के लिये कलंक के रूप में, एक विनाशकारी विरासत छोड़ती है.

मानवाधिकार हनन

नतालिया कैनेम ने याद दिलाया कि यौन हिंसा एक मानवाधिकार उल्लंघन है और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के अन्तर्गत एक अपराध भी, जिसकी कभी भी अनदेखी नहीं होनी चाहिये, ना ही उसके लिये माफ़ी मिलनी चाहिये और ना ही इसकी गम्भीरता को कम किया जाना चाहिये. “असल में तो, ये अपराध बिल्कुल होना ही नहीं चाहिये.”

उन्होंने कहा, “यह स्थिति, तमाम स्थानों पर, तमाम समाजों में मौजूद लैंगिक विषमता व लिंग आधारित हिंसा के स्तर और व्यापकता की ओर ध्यान दिलाती है, जोकि अस्वीकार्य है और एक ऐसी स्थिति है, जो केवल संकटों और संघर्षों में और ज़्यादा बढ़ती है.”

किसी भी तरह के हालात की परवाह किये बिना, महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षित रहने, शान्ति व गरिमा के साथ जीवन जीने, और अपनी स्वतंत्रता व समानता का आनन्द लेने का मूलभूत अधिकार है.

 

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