'अक्षय ऊर्जा की जीवन रेखा, विश्व को निकाल सकती है जलवायु संकट से बाहर'
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) का कहना है कि वर्ष 2021 के दौरान, जलवायु परिवर्तन के चार प्रमुख संकेतकों – ग्रीनहाउस गैस की सघनता, समुद्री जल स्तर में वृद्धि, महासागरों का बढ़ता तापमान और अम्लीकरण (रासायनिक वृद्धि) ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है. यूएन एजेंसी के अनुसार यह दर्शाता है कि मानव गतिविधियों के कारण भूमि, महासागर व वातावरण में व्यापक बदलाव हो रहे हैं, जिसके टिकाऊ विकास व पारिस्थितिकी तंत्रों पर दीर्घकालीन दुष्परिणाम होंगे.
#Climatechange affects everyone and everything on the planetGreenhouse gas levels, ocean heat and acidification, sea level rise at record levels in 2021We can still limit the the damage#ClimateActionNow for the sake of future generations#StateofClimatehttps://t.co/IRebfExc6e pic.twitter.com/RHGmKJhNXM
WMO
बुधवार को जारी की गई ‘WMO State of the Global Climate in 2021’ रिपोर्ट बताती है कि पिछले सात वर्षों ने अब तक के सर्वाधिक गर्म साल होने का रिकॉर्ड स्थापित किया है.
बदलती जलवायु का प्रत्यक्ष रूप, रोज़मर्रा के जीवन में चरम मौसम की घटनाओं में देखने को मिलता है, जिनकी वजह से सैकड़ों अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है और मानव जीवन व कल्याण को भी भीषण क्षति पहुँची है.
साथ ही, खाद्य व जल सुरक्षा के लिये चुनौतियाँ उत्पन्न हुई है और विस्थापन बढ़ा है – 2022 में इसमें वृद्धि हुई है.
वर्ष 2021 के आरम्भ औक अन्त में ला नीन्या प्रभाव के कारण, 2021 सात सबसे गर्म सालों में से ‘केवल’ एक ही साबित हुआ. ला नीन्या की वजह से शीतलन प्रभाव देखा गया, मगर बढ़ते तापमान के रुझान में बदलाव नहीं आया है.
2021 में औसत वैश्विक तापमान में पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में लगभग 1.11 °C अधिक देखा गया है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु व्यवधान से निपटने में मानवता की विफलताओं पर क्षोभ व्यक्त करते हुए ध्यान दिलाया कि हालात की गम्भीरता के मद्देनज़र, आसानी से लागू किये जा सकने वाले उपाय जल्द अपनाए जाने होंगे.
इस क्रम में, ऊर्जा प्रणालियों की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को समाप्त करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिये जाने पर बल दिया है.
नवीकरणीय ऊर्जा के लिये योजना
यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि पवन और सौर ऊर्जा जैसी अक्षय ऊर्जा टैक्नॉलॉजी एकदम तैयार हैं, और अधिकांश मामलों में कोयला व अन्य जीवाश्म ईंधनों की तुलना में सस्ती हैं.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने ऊर्जा स्रोतों में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने के लिये पाँच महत्वपूर्ण उपाय सुझाए हैं, जिन्हें उन्होंने 21वीं सदी की शान्ति परियोजना क़रार दिया है.

- नवीकरणीय ऊर्जा टैक्नॉलॉजी को वैश्विक सार्वजनिक कल्याण के रूप में देखा जाना
इसका अर्थ है कि ज्ञान के आदान-प्रदान और टैक्नॉलॉजी हस्तान्तरण के रास्ते में अवरोधों को दूर करना, जिनमें बौद्धिक सम्पदा के विषय में रुकावटें भी हैं.
उन्होंने बैट्री भण्डारण के लिये सरकारों के नेतृत्व में एक वैश्विक गठबन्धन की पुकार लगाई है, जिसके तहत टैक्नॉलॉजी कम्पनियों, विनिर्माताओं, वित्त पोषकों को नवाचार व तैनाती के लिये एक साथ आना होगा.
- नवीकरणीय ऊर्जा टैक्नॉलॉजी के लिये कच्चे माल की उपलब्धता और ज़रूरी पुर्ज़ों व सामग्री की आपूर्ति श्रंखला का विस्तार
यूएन प्रमुख ने कहा है कि नवीकरणीय ऊर्जा टैक्नॉलॉजी और कच्चे माल के लिये आपूर्ति श्रंखला, कुछ ही देशों में केन्द्रित है. इस अवरोध पर पार पाने के लिये व्यापक स्तर पर अन्तरराष्ट्रीय समन्वय स्थापित किये जाने का आग्रह किया गया है.
- जीवाश्म ईंधन आधारित लालफ़ीताशाही में सुधार और नए ढाँचे का निर्माण
यूएन प्रमुख ने सरकारों से सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं को स्वीकृति देने की प्रक्रिया को गति प्रदान करने, उसे सुसंगत बनाने, ग्रिड का आधुनिकीकरण करने, महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य स्थापित करने का आहवान किया है, ताकि निवेशकों, विकासकों, उपभोक्ताओं व उत्पादकों को निश्चितता का एहसास कराया जा सके.
- जीवाश्म ईंधन से अनुदान को दूर हटाना
हर वर्ष, दुनिया भर में सरकारों द्वारा क़रीब 500 अरब डॉलर का अनुदान दिया जाता है ताकि जीवाश्म ईंधन की क़ीमतों को कृत्रिम रूप से कम रखा जा सके. यह रक़म, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की तुलना में तीन गुना ज़्यादा है, जिसे रोके जाने की अपील की गई है.
- नवीकरणीय ऊर्जा में तीन गुणा निजी व सार्वजनिक निवेश
यूएन प्रमुख ने जोखिम ढाँचे में बदलाव करने और नवीकरणीय वित्त पोषण का दायरा व स्तर बढ़ाने के लिये लचीलेपन का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि यह समय, देर होने से पहले ही नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने का है.

जलवायु आपात स्थिति
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की यह रिपोर्ट ऐसे समय में प्रकाशित हुई है जब चरम मौसम से हाल के दिनों में करोड़ों लोग प्रभावित हुए हैं.
हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में सूखे के कारण आपात स्थिति है, दक्षिण घातक बाढ़ से जूझ रहा है जबकि भारत और पाकिस्तान भीषण गर्मी में झुलस रहे हैं.
बताया गया है कि यूएन एजेंसी की नवीनतम रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में वार्ता दस्तावेज़ के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जोकि इस वर्ष मिस्र में आयोजित होगा.
यूएन मौसम विज्ञान एजेंसी के महासचिव पैटेरी टालस ने कहा कि कुछ ही समय में एक और सर्वाधिक गर्म साल देखने को मिल सकता है.
“हमारी जलवायु हमारी आँखों के सामने बदल रही है. मानव-जनित ग्रीनहाउस गैस में एकत्र ताप के कारण, ग्रह आने वाली कई पीढ़ियों तक गर्म होता रहेगा.”
कुछ हिमनद में पिघलाव इतना भीषण है कि उसे उलट पाना सम्भव नहीं है, जिसके दीर्घकालीन दुष्परिणाम होने की आशंका है. उन्होंने सचेत किया कि इस संकट को टालने के लिये वातावरण में एकत्र कार्बन को हटाया जाना होगा.

रिपोर्ट के कुछ अहम निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
- ग्रीनहाउस गैस सघनता का स्तर वर्ष 2020 में 413.2 पार्ट्स प्रति मिलियन पहुँच गया जोकि अब तक का सर्वाधिक स्तर है, और पूर्व-औद्योगिक काल (1850-1900) के स्तर की तुलना में 149 फ़ीसदी अधिक है.
- वैश्विक वार्षिक औसत तापमान को वर्ष 2021 में, पूर्व-औद्योगिक काल के औसत की तुलना में 1.11 (±0.13 °C) डिग्री सेल्सियस अधिक आँका गया है.
साल के आरम्भ और अन्त में ला नीन्या के शीतलन प्रभाव के कारण यह अन्य वर्षों की तुलना में कम है. वर्ष 2015 से 2021, पिछले सात वर्षों ने अब तक के सर्वाधिक गर्म साल होने का रिकॉर्ड बनाया है.
- महासागर ताप रिकॉर्ड स्तर पर है. महासागर के ऊपरी 2000 मीटर की गहराई तक तापमान का वर्ष 2021 में बढ़ना जारी रहा और यह भविष्य में भी जारी रहने की सम्भावना है. डेटा दर्शाता है कि पिछले दो दशकों में महासागरों के गर्म होने की गति में तेज़ी आई है.
- मानव-जनित कार्बन डाइ ऑक्साइड के कुल वैश्विक उत्सर्जन का 23 फ़ीसदी महासागरों द्वारा सोखा जा रहा है, जिससे महासागर अम्लीकरण होता है और समुद्री जीवन व पारिस्थितिकी सेवाओं पर असर पड़ता है. खाद्य सुरक्षा, पर्यटन व तटीय संरक्षण के नज़रिये से भी यह चिन्ताजनक है.
- औसत समुद्री जल स्तर वर्ष 2021 में रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गया. वर्ष 2013-2021 की अवधि में यह औसतन 4.5 मिलिमीटर प्रति वर्ष की दर से बढ़ा है. 1993-2002 की तुलना में जल स्तर में वृद्धि की यह दोगुनी रफ़्तार है, जिसकी वजह, जमे हुए पानी की परतों को पहुँच रही क्षति में आई तेज़ी है.