यूक्रेन युद्ध से अन्य क्षेत्रों में गम्भीर कुपोषण संकट उत्पन्न होने का जोखिम

सूडान में बच्चों को कुपोषण के उपचार के रूप में मूंगफली आधारित एक ख़ुराक दी जाती है.
© UNICEF/Shehzad Noorani
सूडान में बच्चों को कुपोषण के उपचार के रूप में मूंगफली आधारित एक ख़ुराक दी जाती है.

यूक्रेन युद्ध से अन्य क्षेत्रों में गम्भीर कुपोषण संकट उत्पन्न होने का जोखिम

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र ने गुरूवार को कहा है कि यूक्रेन में युद्ध के कारण, दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की क़ीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ने से, आपदाओं वाले अन्य स्थानों पर लाखों-करोड़ों बच्चों के लिये “बहुत बड़े पैमाने पर गम्भीर कुपोषण के संकट” का जोखिम उत्पन्न हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ ने कहा है कि यूक्रेन पर रूसी महासंघ के हमले को लगभग छह सप्ताह हो गए हैं जिस दौरान मध्य पूर्व और उत्तर अफ़्रीका (MENA) क्षेत्रों में आयात प्रभावित हुए हैं, जहाँ 90 प्रतिशत खाद्य सामग्री विदेशों से आती है.

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यूनीसेफ़ ने कहा कि गेहूँ, भोजन पकाने में काम आने वाले तेल और ईंधन जैसे अनिवार्य खाद्य पदार्थों के दामों में भी बढ़ोत्तरी हुई है, और अगर यही हालात जारी रहे तो, इससे बच्चे गम्भीर रूप से प्रभावित होंगे, विशेष रूप में मिस्र, लेबनान, लीबिया, सूडान, सीरिया और यमन में.

क़ीमतें चुकाने में असमर्थ

मध्य पूर्व और उत्तर अफ़्रीका के लिये यूनीसेफ़ की क्षेत्रीय निदेशिका अदेले ख़ोद्र ने खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में अभूतपूर्व उछाल होने की चेतावनी दी है, जो संघर्ष वाले क्षेत्रों में रहने, राजनैतिक अस्थिरता, कोविड-19 महामारी और यूक्रेन में युद्ध के कारण, बहुत से परिवारों की क्षमता से बाहर है.

उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के कारण कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी होने की सम्भावना है. 

उन्होंने विशेष रूप से संकटों से प्रभावित देशों में, लाखों-करोड़ों बच्चों और महिलाओं की ज़रूरतें पूरी करने के लिये, कुपोषण की पहले से ही जाँच व उपचार किये जाने का आग्रह भी किया है.

“क्षेत्र में बच्चों के लिये व्यापक गम्भीर कुपोषण संकट उत्पन्न होने से रोकने के लिये ऐसा किया जाना बहुत ज़रूरी है.”

सतत भुखमरी

यूनीसेफ़ के अनुसार, मध्य पूर्व और उत्तर अफ़्रीका क्षेत्र में, 40 प्रतिशत से भी कम बच्चों को ही, उनके समुचित शारीरिक व मानसिक विकास के लिये ज़रूरी, पर्याप्त भोजन ख़ुराक मिल पाती है.

इस क्षेत्र में पहले ही, कुपोषण की उच्च दर मौजूद है जिसका अर्थ है कि लगभग 20 प्रतिशत बच्चों का आकार उनकी उम्र के अनुपात में कम है, और लगभग इतनी ही संख्या में बच्चे कम वज़न के शिकार हैं.

ये आँकड़े चिन्ताजनक होने के साथ-साथ, मौजूदा स्थिति इनसे भी ज़्यादा गम्भीर है क्योंकि मध्य पूर्व और उत्तर अफ़्रीका क्षेत्र में स्थित देश, यूक्रेन युद्ध से बहुत ज़्यादा प्रभावित हुए हैं.

वज़न और रक्त की कमी

यमन में एक क्लीनिक में बच्चों की कुपोषण जाँच
© UNICEF/Anwar Al-Haj
यमन में एक क्लीनिक में बच्चों की कुपोषण जाँच

यमन में, 45 प्रतिशत बच्चों का वज़न कम है और 86 प्रतिशत से ज़्यादा बच्चे रक्त की कमी के शिकार हैं, जिसके लिये आयरन (लौह तत्व) जैसे पोषक तत्वों की कमी ज़्यादा ज़िम्मेदार है. हालाँकि फ़ोलेट, विटामिन – बी12 और ए की कमी भी महत्वपूर्ण कारक हैं.

यूनीसेफ़ ने चेतावनी भरे शब्दों में ये भी कहा है कि सूडान में लगभग 14 प्रतिशत बच्चे बढ़वार में बाधा से प्रभावित हैं, लगभग 36 प्रतिशत बच्चों का वज़न आकार के अनुपात में कम है और लगभग 50 प्रतिशत बच्चे रक्त की कमी के शिकार हैं.

लेबनान में 94 प्रतिशत बच्चों को, उनकी ज़रूरत के अनुसार भोजन ख़ुराक नहीं मिलती है, जबकि 40 प्रतिशत महिलाएँ और पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को रक्त की कमी है.

सीरिया में केवल 25 प्रतिशत बच्चों को स्वस्थ ख़ुराक मिल पाती है जबकि वहाँ खाद्य पदार्थों की एक टोकरी की क़ीमत, वर्ष 2021 की तुलना में लगभग दुगनी हो गई है.