संकट में से अवसर: महामारी से उबरने के उपायों पर चर्चा के लिये उच्च स्तरीय यूएन फ़ोरम

6 जुलाई 2021

दुनिया भर से अनेक देशों की सरकारों, कारोबारों और सिविल सोसायटी की हस्तियाँ, टिकाऊ विकास पर इस वर्ष के उच्च स्तरीय राजनैतिक फ़ोरम में शिरकत करने की तैयारी कर रही हैं जो मंगलवार 6 जुलाई को शुरू हो रहा है. इसमें कोविड-19 महामारी के प्रभाव से उबरने के रास्तों पर चर्चा होगी. साथ ही इस जानलेवा स्वास्थ्य संकट को एक ज़्यादा टिकाऊ वैश्विक अर्थव्यवस्था की तरफ़ प्रमुख मोड़ देने के लिये, एक अवसर में तब्दील करने पर भी बातचीत होगी.

6 से 15 जुलाई तक आयोजित होने वाला ये एक मिश्रित सम्मेलन होगा जिसमें प्रतिनिधि ऑनलाइन और निजी रूप में शिरकत करेंगे. सम्मेलन में विशेष रूप से, अभूतपूर्व स्वास्थ्य संकट से उबरने की योजनाओं, कामयाबी और कमियों से सबक़ सीखने पर ध्यान रहेगा.

साथ ही, ये सम्मेलन ज़्यादा समावेशी, सक्षम-लचीले और स्वस्थ समाजों के निर्माण के लिये, सर्वश्रेष्ठ रास्ते के रूप में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की हिमायत करता है.

इस फ़ोरम का आयोजन संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के तत्वाधान में हो रहा है.

परिषद के अध्यक्ष मुनीर अकरम का कहना है, “देशों ने, अपने यहाँ महामारी का मुक़ाबला करने, इसके प्रभाव से निपटने और बेहतर पुनर्निर्माण के लिये जो कार्रवाइयाँ की हैं, उनके बारे में जानकारी साझा की जाएगी और कामयाबी व कमियों पर भी चर्चा होगी.”

“एक प्रमुख मुद्दा ये होगा कि देशों की सरकारें, कोविड-19 से निपटने के प्रयासों में क्या टिकाऊ विकास लक्ष्यों को एक ब्लूप्रिण्ट के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं, अगर हाँ तो किस तरह.”

सर्वाधिक निर्बलों की मदद

इस वर्ष 43 देश, अपने यहाँ, कोविड महामारी द्वारा बरपा तबाही के बावजूद, लोगों का जीवन बेहतर बनाने के बारे में की गई कार्रवाइयों की जानकारी देंगे. अभी तक 168 देश, वर्ष 2016 में हुए प्रथम फ़ोरम के बाद से, टिकाऊ विकास लक्ष्यों के बारें में हुई प्रगति की जानकारी प्रस्तुत कर चुके हैं.

उदाहरण के लिये, जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में, एण्टीगुआ और बारबूडा जैसे द्वीपीय देश ने, अपने यहाँ जलवायु वित्त सुविधा तक सिविल सोसायटी की पहुँच आसान बेहतर बनाने के वास्ते, 13 लाख डॉलर की एक परियोजना लागू की है. 

नॉर्वे में, जलवायु परिवर्तन का मुक़ाबला करने के लिये लागू किये गए उपायों की बदौलत, ग्रीन हाउस गैसों का कुल उत्सर्जन कम होकर, 1993 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है. 

बहुत से देशों में, स्वास्थ्य महामारी का मुक़ाबला करने के उपायों में, अपने नागरिकों की भलाई के लिये संसाधन निवेश करना और सबसे कमज़ोर हालात वाली आबादियों की मदद करने के लिये, सामाजिक संरक्षा प्रणालियों और श्रम बाज़ारों में बेहतरी लाना शामिल है.

मिस्र की 'शिष्ट जीवन' नामक योजना का उद्देश्य, ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले लाखों-करोड़ों लोगों का जीवन बेहतर बनाना है.

डेनमार्क ने अपने यहाँ सभी बच्चों को समान अवसरों के लिये बेहतर हालात सुनिश्चित करने के लिये “बच्चे सर्वप्रथम” नामक परियोजना शुरू की है.

साइप्रस ने कामगारों, स्वरोज़गार वाले लोगों, कमज़ोर हालात वाले समूहों और कारोबारों की मदद करने के लिये एक पैकेज शुरू किया है जिस पर लगभग 2 अरब 60 करोड़ योरो की रक़म ख़र्च करने का प्रावधान किया गया है.

वर्षों की प्रगति मिट गई

इन सकारात्मक कार्यक्रमों, योजनाओं और परियोजनाओं के बावजूद, आर्थिक व सामाजिक परिषद ने आगाह किया है कि कोविड-19 महामारी ने कुछ टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर वर्षों के दौरान हासिल की गई प्रगति को मिटा दिया है. 

इस फ़ोरम में शिरकत करने वाले प्रतिनिधि ऐसे क्षेत्रों की शिनाख़्त करेंगे जिन पर ज़्यादा ध्यान दिये जाने की ज़रूरत है. साथ ही, टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सर्वाधिक प्रभाव छोड़ने के लिये अनुकूल और कारगर नीतियों पर भी ध्यान दिया जाएगा.

महामारी का फैलाव शुरू होने से पहले के समय तक भी, टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में हुई प्रगति को असन्तोषजनक कहा गया था क्योंकि लगातार और व्यापक पैमान पर जारी विषमताएँ, भुखमरी, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा की उपलब्धता का अभाव, बढ़ती बेरोज़गारी, और अत्यन्त निर्धनता की स्थिति किसी से छुपी नहीं रही है.

ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस फ़ोरम में शिरकत करने वाले देश, इन मौजूदा मुद्दों को रेखांकित करने के माध्यम से, एक ऐसा पुनर्बहाली रास्ता तैयार करने पर बात करेंगे जो आम लोगों की भलाई पर केन्द्रित हो और जिसमें आर्थिक सुधारों, डिजिटल रूपान्तर, वैक्सीन समता और जलवायु कार्रवाई पर प्रमुख ज़ोर हो.

 

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