दुनिया, 2030 एजेण्डा के मार्ग में, अहम पड़ाव पर, यूएन उप प्रमुख

10 मार्च 2021

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि दुनिया इस समय टिकाऊ विकास एजेण्डा 2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के मार्ग पर, बहुत अहम पड़ाव पर खड़ी है. यूएन उप प्रमुख ने ये बात योरोपीय संसद की उपाध्यक्ष हाएदी हउतला के साथ एक वर्चुअल वार्ता के दौरान, बुधवार को कही.

यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा कि कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने और टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने के लिये, बहुपक्षीय तालमेल बहुत अहम है.

उन्होंने योरोपीय संघ के साथ, संयुक्त राष्ट्र की रणनैतिक साझेदारी की अहमियत को भी रेखांकित किया.

आमिना जे मोहम्मद ने कहा, “2030 एजेण्डा के लक्ष्य हासिल करने के लिये, वैश्विक कार्रवाई करने का, ये एक अति महत्वपूर्ण दौर है. संयुक्त राष्ट्र, टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर, योरोप के साथ अपनी साझेदारी और ज़्यादा मज़बूत करने के लिये इच्छुक है, और ये काम, पहले से कहीं ज़्यादा तात्कालिक है.”

कार्रवाई दशक

योरोपीय संसद की उपाध्यक्ष हाएदी हउतला के साथ हुई चर्चा, मुख्य रूप से, कार्रवाई दशक पर केन्द्रित रही, जिसे 2030 एजेण्डा और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये महत्वाकांक्षी वैश्विक प्रयास समझा जाता है.

इस एजेण्डा के तहत, दुनिया भर में ग़रीबी मिटाने और 2030 तक टिकाऊ विकास हासिल करने के लक्ष्य भी शामिल हैं.

2030 एजेण्डा प्राप्ति की समय सीमा ख़त्म होने में, 10 वर्ष से भी कम समय बचा है, लेकिन दुनिया इस मंज़िल से अभी बहुत दूर है. जिन लक्ष्यों में ये पिछड़ापन है, उनमें जलवायु और पर्यावरण, सामाजिक-आर्थिक विषमताएँ और मानवाधिकार शामिल हैं.

हाएदी हउतला ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में, कुछ प्रगति हासिल की गई है, मसलन मातृत्व व बाल स्वास्थ्य में कुछ सुधार हुआ है, बिजली की उपलब्धता बढ़ी है, और सरकार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी बढ़ा है.

“लेकिन इन क्षेत्रों में हुई प्रगति, कुछ अन्य क्षेत्रों में पिछड़ेपन के कारण धुंधली पड़ जाती है, मसलन बढ़ती खाद्य असुरक्षा, प्राकृतिक पर्यावरण को नुक़सान, और लगातार व गहराई से जड़ जमाए हुई असमानताएँ.”

कोविड-19 महामारी, 2030 एजेण्डा की दिशा में हासिल की गई प्रगति के लिये, और भी ज़्यादा जोखिम पैदा कर रही है.

यूएन उप प्रमुख आमिना जे मोहम्मद ने कहा, “महामारी ने दुनिया भर में लगभग 25 लाख लोगों की ज़िन्दगियाँ ख़त्म कर दी हैं, और ऐसा भीषण सामाजिक-आर्थिक संकट पैदा कर दिया है जिसने दशकों की प्रगति को ही ख़तरे में डाल दिया है.”

उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास समूह की अध्यक्षा भी हैं.

“महामारी ने योरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में, पहले से ही मौजूद विषमताओं को उजागर करने के साथ-साथ, और भी गहरा कर दिया है, लेकिन साथ ही, इसने टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्रासंगिकता व तात्कालिकता को भी रेखांकित किया है.”

साहसिक नीतियों के विकल्प

यूएन उप प्रमुख ने कहा कि कोविड-19 से उबरने के प्रयास, दरअसल टिकाऊ विकास लक्ष्यों में संसाधन निवेश करने का एक अच्छा मौक़ा है.

इनमें जलवायु परिवर्तन और जैवविविधता से, लोगों व पर्यावरण की रक्षा करना, और वर्ष 2050 तक नैट शून्य उत्सर्जन की स्थिति हासिल करना शामिल हैं.

उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि एक बेहतर भविष्य के निर्माण का लक्ष्य हासिल करने के लिये, साहसिक नीतिगत विकल्पों की ज़रूरत है, जिनमें टिकाऊ विकास लक्ष्य, लैंगिक समामता और जलवायु पर पेरिस समझौते के लक्ष्यों को, महामारी से पुनर्बहाली की योजनाओं व प्रयासों के केन्द्र में रखा जाए.“

यूएन उप प्रमुख ने योरोपीय संघ द्वारा हाल ही में किये गए - 'योरोपीय हरित समझौता' जैसे  फ़ैसलों का स्वागत किया, जिसके तहत योरोपीय संघ को, वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता की स्थिति हासिल करने का संकल्प व्यक्त किया गया है.

 

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