कोविड-19: सामाजिक व आर्थिक जीवन पर असर की समीक्षा

21 अप्रैल 2020

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था के सभी क्षैत्रों में कर्मचारियों व नियोक्ताओं (Employers) पर हानिकारक असर हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने कोविड-19 संकट से सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों परअसर को एक नई श्रृंखला के तहत समझने का प्रयास किया है, साथ ही विभिन्न देशों में महामारी के दंश को कम करने के लिए किए गए उपाय भी सामने रखे हैं. 

यूएन एजेंसी की  रिपोर्ट दर्शाती है कि स्वास्थ्य और अन्य आपात सेवाओं में अग्रिम मोर्चे पर जुटे कर्मचारियों को संक्रमण का जोखिम अन्य की तुलना में ज़्यादा है, जबकि किराना स्टोर, विमान परिचारक दल और ऑटोकर्मियों के स्वास्थ्य और आजीविका के साधनों पर महामारी के कारण ख़तरा पैदा हो गया है.  

रिपोर्ट में लोगों के रोज़गार छिनने और सभी क्षेत्रों में उत्पादन गिरने व गतिविधियाँ ठप होने की बात कही गई है जिससे विकासशील देशों में सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा और ग़रीबी में बढ़ोत्तरी होगी. 

ताज़ा विश्लेषण में सरकारों, नियोक्ताओं और कर्मचारियों द्वारा उठाए गए उन क़दमों की भी जानकारी दी गई है जिनके ज़रिए वायरस पर क़ाबू पाने और उद्यमों, आजीविकाओं और अर्थव्यवस्थाओं को होने वाले नुक़सान को सीमित रखने का प्रयास किया जा रहा है. 

इन उपायों के केंद्र में चार तात्कालिक उद्देश्य हैं: कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए; उद्यमों, रोज़गारों व आय को समर्थन उपलब्ध कराया जाए;अर्थव्यवस्था व रोज़गार के साधनों को नई स्फूर्ति मिले; और प्रभावित क्षेत्रों को उबारने में सामाजिक संवाद पर निर्भरता हो.

असर पर एक नज़र 

- यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हुआ है. योरोपीय संघ के पर्यटन उद्योग के अनुमान के मुताबिक महामारी के कारण हर महीने एक अरब यूरो का नुक़सान हो रहा है. 

- जहाज़रानी सैक्टर में 20 लाख से ज़्यादा नाविक कार्यरत हैं और इस सैक्टर में भी रोजग़ार के अवसरों पर असर पड़ा है.  बहुत से देशों ने क्रूज़ ज़हाज़ों में यात्रा करने के ख़िलाफ़ सलाह जारी की है जिसके फलस्वरूप अनेक क्रूज़ कंपनियों ने अपनी गतिविधियाँ रोक दी हैं. इससे क्रूज़ सैक्टर में काम कर रहे लगभग ढाई लाख नाविक प्रभावित हुए हैं.

- ऑटो उद्योग भी आर्थिक गतिविधियों में आए व्यवधान से मुश्किल का सामना कर रहा है क्योंकि कर्मचारियों से घर पर रहने के लिए कहा गया है. इससे आपूर्ति श्रृंखला पर ख़ासा असर पड़ा है और फ़ैक्ट्रियां बंद हो गई हैं. 

- यात्रा संबंधी पाबंदियों और वैश्विक मंदी की आशंका के कारण ‘अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात एसोसिएशन’ का अनुमान है कि यात्री राजस्व में 252 अरब डॉलर की गिरावट आ सकती है. 

- टैक्सटाइल, कपड़ा, चमड़ा और जूता-चप्पल उद्योग में ऐहतियात उपायों  के कारण उपभोक्ता मांग में कमी आई है. बांग्लादेश में ऑर्डर रद्द किए जाने से तीन अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है और 31 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.  

- कृषि और खाद्य सुरक्षा भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. केनया के मोम्बासा में चाय की सबसे बड़ी नीलामी अस्थाई रूप से स्थगित कर दी गई है. यहीं से कई पूर्वी अफ़्रीकी देशों में चाय का व्यापार होता है जिसका असर स्थानीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका है.  

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इन चुनौतियों से निपटने के लिए और प्रभावित सैक्टरों की मदद के लिए देशों ने अनेक क़दम उठाए हैं: इनके तहत आर्थिक सहायता पैकेज की उपलब्धता, टैक्स अदायगी पर कुछ समय के लिए रोक, समय-सीमाएँ बढ़ाया जाना, सामाजिक सुरक्षा में योगदान और कर्मचारियों के लिए अनुदान और क़र्ज़ गारंटियाँ दी गई हैं.

- स्पेन में 40 करोड़ यूरो के उधार की व्यवस्था की गई है जिसका दायरा बढ़ाकर इसमें सभी व्यवसायिक उद्यमों को शामिल किया गया है. 

- जापान में सरकार स्थानीय कार निर्माताओं के साथ मिलकर काम कर रही है जिसके ज़रिए कंपनियों और ऑटो पुर्ज़े मुहैया कराने वाले आपूर्तिकर्ताओं के बीच सूचना का आदान-प्रदान संभव बनाया गया है. 

- ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों में स्वास्थ्य ख़र्चों में बढ़ोत्तरी के अलावा पुलिस बल के लिए भी अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराए गए हैं ताकि पाबंदियाँ सख़्ती से लागू की जा सकें. इसके तहत उन्हें प्रशिक्षण और निजी बचाव सामग्री उपलब्ध कराई गई है. 

- अर्जेंटीना में स्वास्थ्यकर्मियों और सरकार के बीच एक सहमति हुई है जिसके तहत ऐहतियाती तौर पर अलग रखे जाने के दौरान उन्हें पूरा वेतन मिलने की गारंटी दी गई है. साथ ही इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को निशुल्क परिवहन की भी सुविधा मिलेगी. 

- श्रीलंका के कुछ क्षेत्रों में सरकार के आदेश के बाद टैक्सटाइल फ़ैक्ट्रियाँ बंद हुई है लेकिन कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश सुनिश्चित किया गया है.  

- कंबोडिया में काम बंद होने से प्रभावित कर्मचारी अपने वेतन का 40 फ़ीसदी हिस्सा अपने नियोक्ता से और 20 फ़ीसदी अतिरिक्त हिस्सा सरकार से प्राप्त कर सकते हैं. 

इसके अलावा रिपोर्ट सार्वजनिक आपात सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के साहस को बयां करती है जो इस महामारी से लड़ाई के प्रयासों में सबसे आगे रहकर कार्रवाई का हिस्सा हैं.

साथ ही उन शिक्षकों, नाविकों, दुकानदारों और अन्य ज़रूरी सेवाएं मुहैया करा रहे कर्मचारियों के बारे में बताया गया है जो कठिन समय में भी जीवन को सामान्य बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं. 

 

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