तिमोर-लेस्ते: बाढ़ से भारी तबाही, यूएन एजेंसियाँ भी मदद करने में सक्रिय

5 अप्रैल 2021

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, तिमोर-लेस्ते में, बाढ़ और भूस्खलन का सामना करने के प्रयासों में सक्रिय मदद कर रही हैं. देश भर में आई बाढ़ और भूस्खलन से व्यापक तबाही हुई है और प्रभावित स्थानों में राजधानी दीली भी शामिल है.

मीडिया ख़बरों के अनुसार, देश भर में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई है और अन्य अनेक लापता हैं.

राजधानी दीली के बहुत से इलाक़े पानी में डूबे गए हैं और कुछ इलाक़ों में तो बाढ़ के पानी का स्तर दो मीटर तक ऊँचा है.

बुनियादी ढाँचे को भी भारी नुक़सान होने की ख़बरें हैं जिनमें सड़कों, पुलों और चिकित्सा केन्द्रों को नुक़सान शामिल है.

बुरी तरह प्रभावित कुछ इलाक़ों में, संचार नैटवर्क और बिजली आपूर्ति भी बाधित हुए हैं.

तिमोर-लेस्ते में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय अधिकारी (आरसी) रॉय त्रिवेदी ने कहा कि यूएन एजेंसियाँ और उनके साझीदार संगठन, देश की सरकार के राष्ट्रीय प्रयासों में सहायता कर रही हैं.

उन्होंने कहा, “प्रमुख राहत उपायों के तहत, हम तिमोर-लेस्त के लोगों और वहाँ की सरकार को, ज़रूरत की इस घड़ी में, पूरी सहायता मुहैया कराने के लिये मुस्तैद हैं.”

रॉय त्रिवेदी ने कहा, “हम समुदायों, विशेष रूप में महिलाओं और बच्चों के बारे में बहुत चिन्तित हैं क्योंकि प्राकृतिक हादसों व आपदाओं में, वो ही सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं."

"इस आपदा का सामना करने के प्रयासों में तमाम सम्भव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये हम, अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे.”

ऐसी चिन्ताएँ भी उभरी हैं कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण, कोविड-19 की रोकथाम व उसका सामना करने के प्रयासों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि राजधानी दीली में, एक प्रमुख प्रयोगशाला और दो एकान्तवास केन्द्रों को नुक़सान पहुँचा है. एक चिकित्सा आपूर्ति डिपो भी बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ बताया गया है.

ऐसी भी आशंकाएँ हैं कि अगर बारिश में कमी नहीं आई तो स्थिति और भी ज़्यादा ख़राब हो सकती है.

इस बाढ़ व भूस्खलन से सीमा पार इंडोनेशिया में भी कुछ नुक़सान होने की ख़बरें हैं जहाँ 40 से ज़्यादा लोगों के मौत होने की ख़बरें हैं.

परिवारों को सहायता

तिमोर-लेस्ते में, यूएन विश्व खाद्य कार्यक्रम के देश निदेशक डैगेंग लियू के अनुसार, “इस समय प्राथमिकता, सबसे ज़्यादा प्रभावित परिवारों को सुरक्षित बचाने और कहीं और बसाना जारी रखने की है.”

उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाक़ों से परिवारों को बचाकर जहाँ बसाया जा रहा है, उन स्थानों पर खाद सामग्री व भोजन पकाने का इन्तज़ाम करने की भी ज़रूरत है. साथ ही, प्रभावित लोगों को बचाव केन्द्रों तक पहुँचाने के लिये वाहनों की भी ज़रूरत है.

सोमवार तक, राजधानी दीली में, लगभग 11 बचाव केन्द्रों पर तकरीबन तीन हज़ार लोग ठहरे हुए थे.

डैगेंग लियू ने बताया, “विश्व खाद्य कार्यक्रम ने, अन्य यूएन एजेंसियों को, अपने सामान की आपूर्ति करने के वास्ते परिवहन साधन उपलब्ध कराए हैं, और एक बार नुक़सान का अन्दाज़ा होने के बाद, हम राहत व सहायता कार्यों में अपनी भूमिका निभाने के लिये मुस्तैद हैं.”

 

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