कोविड-19: जवाबी कार्रवाई के तहत 'वैश्विक टीकाकरण योजना' की पुकार

17 फ़रवरी 2021

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी पर जवाबी कार्रवाई के तहत टीकाकरण की शुरुआत आशा का स्रोत है, लेकिन वैक्सीन की न्यायसंगत उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाना होगा. यूएन प्रमुख ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए एक वैश्विक टीकाकरण योजना को पेश किये जाने का आहवान करते हुए वैज्ञानिक विशेषज्ञता, उत्पादन और वित्तीय क्षमता के सभी पक्षकारों को एक साथ लाने पर ज़ोर दिया है.   

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने हिंसक संघर्ष व असुरक्षा से ग्रस्त इलाक़ों में कोविड-19 वैक्सीन की न्यायसंगत सुलभता के सन्दर्भ में बुधवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित किया.  

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि वैश्विक युद्धविराम के लिये उनकी अपील का उद्देश्य पीड़ाओं को हरना, कूटनीति के लिये जगह बनाना और मानवीय पहुँच को सुनिश्चित करना है, जिसमें विश्व भर में टीकों का वितरण भी है. 

यूएन प्रमुख ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी, विश्व में भारी उथलपुथल का कारण बनी है, अर्थव्यवस्थाएँ तबाह हुई हैं और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में जारी प्रयासों को झटका लगा है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि महामारी की वजह से अस्थिरता बढ़ी है और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2532 को लागू करने के प्रयासों में बाधा आई है, जिसका उद्देश्य टकराव की रोकथाम करना और हिंसक संघर्षों का निवारण करना है.  

दुनिया भर में अब तक 10 करोड़ 90 लाख संक्रमणों की पुष्टि हो चुकी है और 24 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.  

कोरोनवायरस से बचाव के लिये अनेक देशों में टीकाकरण मुहिम को तेज़ी से आगे बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं. यूएन प्रमुख ने कहा कि कोरोनावायरस संकट पर पार पाने में ये प्रयास उम्मीद बँधाते हैं. 

टीकाकरण प्रयास

लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अनुसार तीन-चौथाई टीके, महज़ 10 देशों में ही दिये जा रहे हैं, जबकि 130 देशों में अब तक वैक्सीन की एक ख़ुराक भी नहीं दी जा सकी है.उन्होंने कहा 

यूएन प्रमुख ने कहा कि मौजूदा आँकड़े, टीकाकरण के प्रयासों में न्यायसंगतता के अभाव और विषमता को दर्शाते हैं. 

उन्होंने कहा कि हिंसक संघर्ष और असुरक्षा से प्रभावित का शिकार लोगों के पीछे छूट जाने का जोखिम सबसे ज्यादा है जब महामारी दुनिया में फैल रही हो तो कोई भी तब तक सुरक्षित नहीं है जब तक हर कोई हर जगह सुरक्षित नहीं है 

संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली ‘कोवैक्स’ मुहिम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया को तत्काल एक वैश्विक वैक्सीन टीकाकरण योजना (Global Vaccination Plan) की आवश्यकता है जिसमें वैज्ञानिक विशेषज्ञता, उत्पादन और वित्तीय क्षमताओं वाले सभी पक्षकारों को साथ लाया जा सके. 

उन्होंने भरोसा जताया कि जी-20 समूह इस सम्बन्ध में एक आपात टास्क फोर्स को गठित करने में अहम भूमिका निभा सकता है ताकि वैश्विक टीकाकरण योजना को तैयार करने, उसे लागू करने और उसके लिये वित्तीय इन्तजाम करना सम्भव हो सके.

इस टास्क फ़ोर्स में उन सभी देशों को शामिल करने की बात कही गई है जिनमें वैक्सीनों को विकसित करने या लाइसेन्स उपलब्ध होने की स्थिति में वैक्सीन उत्पादन की क्षमता है.

इसके साथ-साथ, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी, साझीदार संगठन वैक्सीनल अलायंस (GAVI) और अन्य अन्तरराष्ट्रीय तकनीकी संगठनों व वित्तीय संस्थाओं को शामिल किये जाने का सुझाव दिया गया है. 

महासचिव गुटेरेश ने भरोसा दिलाया है कि इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली पूर्ण रूप से संगठित प्रयासों के लिये तत्पर है.

ऐतिहासिक प्रयास 

कोविड-19 की रोकथाम उपायों के तहत संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) वैक्सीन वितरण के काम में सहायता प्रदान कर रहा है, और इस वर्ष के अन्त तक दो अरब ख़ुराकों का इन्तज़ाम किये जाने की योजना है. 

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फ़ोर ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा, “यह ऐतिहासिक प्रयास, ऐतिहासिक समर्थन पाने का हक़दार है.”

उन्होंने कहा कि हिंसक संघर्ष की आँच में झुलस रहे परिवारों व समुदायों को कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में ज़रूरी मदद पहुँचाई जानी होगी.

यूनीसेफ़ प्रमुख ने बताया कि सुरक्षा परिषद का समर्थन यह सुनिश्चित करने के लिये ज़रूरी है कि राष्ट्रीय टीकाकरण योजनाओं में सभी लोगों को शामिल किया जा सके. भले ही उनका कोई भी दर्जा हो, या फिर वे सरकारी नियन्त्रण के बाहर वाले इलाक़ों में रहने को मजबूर हों. 

यूनीसेफ़ की शीर्ष अधिकारी हेनरीएटा फ़ोर ने महासचिव गुटेरेश की वैश्विक युद्धविराम को दोहराते हुए कहा कि जवाबी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिये इसकी बहुत ज़रूरत है. 

उनके मुताबिक ख़सरा, पोलियो और अन्य बीमारियों के लिये टीकाकरण अभियान, महामारी के कारण रुक गया था जिसे फिर से शुरू किये जाने की आवश्यकता है. 

उन्होंने आगाह किया कि एक घातक बीमारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में, अन्य बीमारियों के ख़तरे से निपटने हुई प्रगति से पीछे नहीं हटा जा सकता.

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