संयुक्त राष्ट्र के भीतर नस्लवाद का मुक़ाबला करने के लिये सम्वाद

20 नवंबर 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने संगठन के कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए इस विश्व संस्था में नस्लवाद का मुक़ाबला किये जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. गुरूवार को इस सम्बोधन में उन्होंने नस्लवाद पर विचार-विमर्श का एक सिलसिला भी शुरू किया.

यूएन महासचिव ने अपने सम्बोधन में कहा, “नस्लवाद हर सरकार, हर समाज, और हर संगठन के लिये चुनौतियाँ पेश करता है, इनमें हमारा अपना संगठन भी शामिल है.” 

“मैं बहुत स्पष्ट कर देना चाहता हूँ: संयुक्त राष्ट्र में नस्लवाद के लिये कोई स्थान नहीं है.”

संयुक्त राष्ट्र इस वर्ष 75 वर्ष का हो चुका है और ये संगठन देशों में नस्लवाद का मुक़ाबला करने में उनकी मदद करता है. इसके लिये क़ानूनी उपाय व औज़ार विकसित करने के साथ-साथ क्षमता निर्माण भी किया जाता है.

धारणाओं व पूर्वाग्रहों को चुनौती

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि कर्मचारियों की ये ज़िम्मेदारी है कि वो संगठन के भीतर नस्लवाद और नस्ल के आधार पर भेदभाव का सामना करें और उसकी जाँच-पड़ताल करें.

उन्होंने कहा, “ये सच है कि संगठन में ऐसे नियम लागू हैं जिनके तहत कर्मचारियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव प्रतिबन्धित है और किसी भी तरह के भेदभाव से कर्मचारियों को संरक्षा हासिल है, और इसमें नस्लवाद से संरक्षा भी शामिल है.”

आइये, साथ मिलकर, हम ये सुनिश्चित करें कि हर नस्ल, जातीयता, रंग, लिंग, धर्म, पंथ और यौन रुचि रखने वाले सभी लोगों के भीतर सुरक्षा और सम्बद्धता की भावना हो, और उन सभी को संयुक्त राष्ट्र की सफलता में योगदान करने का समान अवसर मिले.

“लेकिन हमें ये स्वीकार भी करना होगा कि संयुक्त राष्ट्र के भीतर नस्लवाद की मौजूदगी को पहचाने और उसे स्वीकार करने में, कभी-कभार हमारा बर्ताव धीमा रहा है.”

यूएन महासचिव ने कहा, “हम सभी को अपने प्रयासों की फिर से पड़ताल करनी होगी और ख़ुद से पूछना होगा कि, संगठन के भीतर नस्लवाद और नस्लभेद का मुक़ाबला करने के लिये, क्या हम, वाक़ई समुचित व उपयुक्त प्रयास कर रहे हैं ” 

यूएन प्रमुख ने कहा कि नस्लवाद एक जटिल सांस्कृतिक अवधारणा है, जिसकी जड़ें सदियों तक जारी रहे उपनिवेशवाद और दासता में समाई हुई हैं. इस चुनौती का मुक़ाबला करना कोई साधारण, या केवल एक बार करने वाली कार्रवाई भर नही है.

उन्होंने कहा, “नस्लवाद का मुक़ाबला करने के लिये सांस्कृतिक व ढाँचागत परिवर्तन की ज़रूरत है. इसके लिये ज़रूरत है कि हम सभी लम्बे समय से चली आ रही अवधारणाओं को फिर से पड़ताल करें, और हमारी अवचेतना में बैठे पूर्वाग्रहों पर सवाल उठाएँ.” 

“नस्लवाद का मुकाबला करने के लिये सकारात्मक रुख़ वा कार्रवाई की भी ज़रूरत है, जिसमें सामाजिक समरसता में निवेश किया जाना भी शामिल है.”

जागरूकता व कार्रवाई

यूएन महासचिव ने संगठन के भीतर नस्लवाद पर एक विचार-विमर्श के दौरान ये सम्बोधन किया. इसके साथ ही यूएन कर्मचारियों के लिये नस्लवाद को रोकने के उपायों पर अनेक घटनाओं व कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ है.

इस अभियान का नाम है – जागरूकता और कार्रवाई, और इसका उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि जो भी लोग संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में योगदान देते हैं, वो ख़ुद को एक व्यक्ति के रूप में और यूएन परिवार के एक सदस्य के रूप में, सम्मानित व मूल्यवान महसूस करें. 

उन्होंने कहा, “हमें एक दूसरे की बात सुनने में, और निराशा, क्रोध व तकलीफ़ को पहचानने में और ज़्यादा बेहतर होना होगा.”

नस्लवाद पर ये सम्वाद दुनिया भर में अनेक स्थानों पर मौजूद संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न केन्द्रों में भी आयोजित किया जाएगा जिसमें नस्लवाद के विभिन्न रूपों पर भी विचार होगा. और साथ ही इस भी चर्चा होगी कि नस्लवाद की रोकथाम और उसकी मौजूदगी का मुक़ाबला करने के लिये क्या कार्रवाई की जाए.

संयुक्त राष्ट्र भर से विभिन्न बड़ी हस्तियों और विशेषज्ञों के साथ-साथ, सिविल सोसायटी और निजी सैक्टर की हस्तियाँ भी इस सम्वाद में शिरकत करेंगी.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि ये सम्वाद आत्म मन्थन और बदलाव के लिये एक अहम अवसर मुहैया कराता है.

“आइये, साथ मिलकर, हम ये सुनिश्चित करें कि हर नस्ल, जातीयता, रंग, लिंग, धर्म, पंथ और यौन रुचि रखने वाले सभी लोगों के भीतर सुरक्षा और सम्बद्धता की भावना हो, और उन सभी को संयुक्त राष्ट्र की सफलता में योगदान करने का समान अवसर मिले.”

 

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