यमन में बाल कुपोषण का गम्भीर संकट, पूरी पीढ़ी पर मँडराता जोखिम

27 अक्टूबर 2020

यमन में भुखमरी के कारण हाल के दिनों में कुपोषण से पीड़ित बच्चो की संख्या अभूतपूर्व दर से बढ़ रही है. यमन को दुनिया में सबसे ख़राब मानवीय संकट के रूप में देखा जाता है और देश में हिंसक संघर्ष और आर्थिक बदहाली को दुष्प्रभावों को दूर करने के लिये पर्याप्त धनराशि का अभाव हालात को और जटिल बना रहा है.   

खाद्य असुरक्षा के आकलन के लिये वैश्विक मानक, ‘Integrated Food Security Phase Classification (IPC)’ (आईपीसी) का नया विश्लेषण दर्शाता है कि कुछ इलाक़ों में हर चार में से एक बच्चा पर्याप्त भोजन के अभाव में हाल के दिनों में कुपोषण (Acute malnutrition) का शिकार हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के मुताबिक पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण के मामलेों की दक्षिणी यमन के कुछ हिस्सों में अब तक की सबसे अधिक दर दर्ज की गई . 

यूएन एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मंगलवार को जारी नए विश्लेषण में भुखमरी के कारण हाल के दिनों में  कुपोषण की चपेट में आये बच्चों की संख्या पाँच लाख 87 हज़ार बताई गई है, जोकि इस वर्ष जनवरी की संख्या से 10 फ़ीसदी अधिक है. 

राष्ट्रव्यापी संकट

आईपीसी के विश्लेषण में यमन के दक्षिणी इलाक़ों पर नज़र डाली गई है लेकिन उत्तरी इलाक़ों पर केंद्रित एक अन्य विश्लेषण को भी तैयार किया जा रहा है जिसमें ऐसे ही रूझान मिलने की सम्भावना जताई गई है. 

गम्भीर कुपोषण के कारण बच्चों के हैज़ा, मलेरिया और श्वसन तन्त्र के अन्य संक्रमणों में मौत होने की ख़तरा बढ़ जाता है, और यमन में ये सभी बीमारियाँ आम हैं. 

विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रवक्ता टॉमसन फिरी ने बताया कि आईपीसी के पूर्वानुमान के मुताबिक जिन इलाक़ों में विश्लेषण किया गया है, वहाँ वर्ष 2020 के अन्त तक 40 फ़ीसदी आबादी (32 लाख लोग) गम्भीर रूप से खाद्य असुरक्षा का शिकार होंगे. 

ग़ौरतलब है कि जिस समय इस रिपोर्ट के लिये आँकड़ों को तैयार किया जा रहा था, उस समय यह माना गया था कि खाद्य पदार्थों की क़ीमतें स्थिर रहेंगी, लेकिन अब ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है.

“खाद्य पदार्थों की क़ीमतें आसमान छू रही हैं और हिंसक संघर्ष से पहले की तुलना में दाम औसतन 140 प्रतिशत अधिक हैं.”

“सबसे ज़्यादा निर्बलों के लिये खाद्य क़ीमतों में मामूली बढ़ोत्तरी भी तबाहीपूर्ण होती है.”

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात वर्ष 2018 से भी ख़राब हैं जब सहायता राशि में 50 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी से अकाल जैसे हालात की रोकथाम कर पाना सम्भव हुआ था. 

बताया गया है कि कुछ परिवारों को तीन से चार मर्तबा विस्थापन के लिये मजबूर होना पड़ रहा है जिससे उनकी सहनशीलता और जीवन को फिर पटरी पर लाने की क्षमता पर असर पड़ता है. 

सहायता धनराशि का अभाव

यमन में मानवीय समन्वयक लिज़े ग्राण्डे ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र जुलाई से ही चेतावनी जारी करता रहा है यमन एक विनाशकारी खाद्य सुरक्षा संकट के कगार पर है. 

“अगर युद्ध अभी ख़त्म नहीं होता है तो हम एक अपरिवर्तनीय स्थिति में पहुँच जायेंगे और यमन में युवा बच्चों की एक पूरी पीढ़ी के खो जाने का जोखिम है.”

जिनीवा में मानवीय राहत मामलों में समन्वय कार्यालय के प्रवक्ता येन्स लार्क ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यमन को मदद की ज़रूरत है. 

उन्होंने कहा कि कईं महीने पहले ही चेतावनी जारी कर दी गई थी कि यमन एक चोटी के सिरे की ओर बढ़ रहा है. अब उस सिरे से हम लोगों को नीचे गिरता देख रहे हैं.

“वे पाँच साल से कम उम्र के बच्चे हैं. उनमें से एक लाख पर मौत का जोखिम है, ऐसा हमें बताया गया है. दुनिया मदद कर सकती है. दुनिया उनकी मदद मानवीय राहत योजना के ज़रिये कर सकती है.” 

यूएन एजेंसी के मुताबिक यमन के लिये तीन अरब 30 करोड़ डॉलर की अपील की गई थी लेकिन उसका महज़ 42 फ़ीसदी ही उपलब्ध हो पाया है जबकि 2020 के दस महीने पूरे होने वाले हैं. 

सहायता राशि का यह स्तर अन्य वर्षों के स्तर की तुलना में कम है, इसलिये दुनिया मदद कर सकती है और धनराशि प्रदान करने का समय यही है. 

यमन की कुल आबादी का 80 फ़ीसदी, यानी दो करोड़ 40 लाख लोगों को किसी ना किसी रूप में मानवीय सहायता और संरक्षण की आवश्यकता है.

इनमें एक करोड 22 लाख बच्चे हैं. यमन के कुल 333 ज़िलो में से 230 पर अकाल का ख़तरा मँडरा रहा है. 

 

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