भारत: बच्चों में होने वाले एचआईवी संक्रमण से जंग - ब्लॉग

23 अक्टूबर 2020

भारत में यूएनएड्स ने अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर बच्चों में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम पर काफ़ी प्रगति की है, लेकिन कोविड-19 ने इसके रास्ते में अनेक चुनौतियाँ भी पेश की हैं. इसी मुद्दे पर, भारत में यूएनएड्स के देश निदेशक, डॉक्टर बिलाली कमारा का ब्लॉग...

इस चुनौतीपूर्ण क्षण में, जब पूरा विश्व इतिहास की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आपातस्थिति - कोविड-19 महामारी - का सामना कर रहा है, ऐसे में इस रुकावट के बावजूद जो प्रगति हो रही है, वही हमारी असली ताक़त हैं.

राष्ट्रीय एड्स नियन्त्रण संगठन (NACO), भारत सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मन्त्रालय और यूएनएड्स के तकनीकी समर्थन से जारी 2019 के एचआईवी आँकडों के मुताबिक, पिछले 9 वर्षों में भारत में बच्चों में नए एचआईवी संक्रमणों में 66.1% की गिरावट आई है, और एड्स से सम्बन्धित मौतों में 65.3% की कमी दर्ज की गई है.

एचआईवी से संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या भी 2010 में 31 हज़ार से घटकर 2019 में 20 हज़ार हो गई है. मातृ-से-शिशु संचरण (EMTCT) प्रक्रिया संकेतकों के उन्मूलन पर, कुल मिलाकर, प्रसवपूर्व कवरेज का विस्तार हुआ है और समय के साथ एचआईवी परीक्षण बढ़ा है, और ये लक्ष्य सीमा के भीतर है. माँ से बच्चों में संचरण (पीएमटीसीटी) की रोकथाम की ज़रूरतों पर विचार करने के लिये उपचार का विस्तार भी किया गया है.

इस प्रयास में शामिल होना  भारत में UNAIDS के लिये बहुत गर्व की बात है और हम यूनीसेफ़ व विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर, विशेष रूप से NACO के साक्ष्य आधारित नेतृत्व के लिये, भारत को अपनी तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं. आज, हम एचआईवी संचरण के उन्मूलन में इस महत्वपूर्ण प्रयास में देश के साथ एकजुट हैं.

UNAIDS India
एक डॉक्टर नवजात शिशु और उसकी माँ की जाँच कर रही हैं.

NACO के नेतृत्व में, दिसम्बर 2020 तक EMTCT के लक्ष्य तय समय सीमा हासिल करने के लिये, जून 2019 में "EMTCT रणनीति-सह-कार्य योजना की फास्ट-ट्रैकिंग" उल्लेखित की गई थी.

फास्ट-ट्रैकिंग योजना ने सभी राष्ट्रीय, राज्य और साझीदारों के सामूहिक प्रयासों को एक रणनैतिक तरीक़े से, ज़िला स्तर पर केन्द्रित करके, नवीनतम साक्ष्यों पर आधारित करते हुए जुटाया और सुदृढ़ किया, जिससे सभी राज्य व केन्द्र शासित प्रदेश सम्पूर्ण EMTCT लक्ष्य प्राप्त कर सकें.

इसके अतिरिक्त, मार्च 2020 में, हमने कोविड-19 महामारी द्वारा उत्पन्न चुनौतियों को कम करने के प्रयास भी शुरू किये.
 
भारत ने, वर्ष 2010 से 2019 तक सूचना, शिक्षा और संचार कार्यक्रमों के माध्यम से, एचआईवी के प्रभाव को कम करने में माँ से बच्चों में संचरण (PMTCT) की रोकथाम को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की है. इसके अलावा, एचआईवी परीक्षण के लिये अभिनव वितरण तन्त्र के साथ एचआईवी सेवाओं तक पहुँच (समुदाय आधारित परीक्षण, साथी का परीक्षण व इण्डेक्स टेस्टिंग), काउंसलिंग, देख-रेख, उपचार व उपचार बाद सेवाओं में भी बढ़ोत्तरी की गई.

भारत में पिछले अनेक वर्षों से सभी गर्भवती महिलाओं के लिये एचआईवी परीक्षण मुफ़्त किये जाने की सुविधा दी गई है और एचआईवी की रोकथाम के लिये “सभी को उचित उपचार” की नीति के तहत गर्भवती माताओं को भी निशुल्क राष्ट्रव्यापी सुविधा दी जाती है.

भारत में प्रतिवर्ष कुल 3 करोड़ गर्भवती महिलाओं में से लगभग 20 हज़ार एचआईवी संक्रमित महिलाओं के निदान की बहुत बड़ी चुनौती से निपटने के लिये, पिछले दो सालों से यूनीसेफ़ ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नाको के साथ मिलकर उच्च दर वाले ज़िलों में (एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं के घनत्व के सन्दर्भ में) रोग उन्मूलन की दिशा में अन्तिम कार्रवाई के तहत, संक्रमित महिलाओं की पहचान करने के लिये मिलकर काम किया है. 

भारत में जब वर्ष 2002 में माता से शिशु में संचरण के रोकथाम के एचआईवी कार्यक्रम (EMTCT) या माता-पिता के ज़रिये बाल संप्रेषण की समाप्ति कार्यक्रम (PMTCT या PPTCT) शुरू किया गया, तभी से नीति, कार्यक्रम सम्बन्धी और क्रियान्वयन रणनीतियों की एक श्रृँखला भी उत्तरोत्तर शुरू की गई.

इसके परिणामस्वरूप, आज सभी गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क एचआईवी परीक्षण व अन्य सभी सेवाओं समेत, प्रसवपूर्व क्लीनिकों तक पहुँच हासिल है. साथ ही, माँ से शिशुओं में एचआईवी संचरण रोकने के लिये जीवन-पर्यन्त मुफ़्त उपचार की भी व्यवस्था की गई है. यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के नेतृत्व में, ग्राम स्वास्थ्य दिवस जैसे ज़मीनी कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों और गाँव व ज़िला स्तर के श्रमिकों ने सम्भव बनाया है.

दरअसल, उच्च दर वाले ज़िलों में संसाधनों पर ध्यान केन्द्रित करने में यूनीसेफ़ द्वारा प्रचारित किया जा रहा दृष्टिकोण, एनएसीओ और यूएनएड्स के एचआईवी रणनैतिक सूचना प्रभाग द्वारा उन स्थानों को बेहतर ढंग से समझने और आबादी को प्रभावित करने के लिये है, ताकि इन क्षेत्रों में तकनीकी सहायता व एचआईवी सेवाएँ उपलब्ध करवाई जा सकें.

ख़ासतौर पर उपचार संतृप्ति कवरेज में वृद्धि और सामान्य होने के लिये एचआईवी परीक्षण और उपचार शुरू करने की आवश्यकता है. समय-समय पर डेटा की निगरानी और यूनीसेफ़-डब्लयूएचओ-यूएनएड्स के साथ मिलकर नाको की समीक्षा व ‘योजना भारत’ और ‘साथी’ जैसे कार्यान्वयन भागीदार इस कार्रवाई के मुख्य आधार हैं. 2019 तक इन सभी हितधारकों को यह बहुत स्पष्ट था कि सफलता के बावजूद,अन्तिम लक्ष्य हासिल के लिये अभी बहुत लम्बा रास्ता तय करना है.

हम डेटा-चालित और निर्णय लेने के तरीक़ों का उपयोग करते हुए आश्वस्त हैं कि भारत में एड्स, 2030 के अन्त तक, बच्चों के स्वास्थ्य के लिये ख़तरा नहीं रहेगा.

 

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