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कोविड-19: ‘ग़लत दिशा’ में आगे जा रहे हैं अनेक देश

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के संक्रमण के तेज़ी से बढ़ते मामलों से चिन्तित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने चेतावनी जारी की है कि बहुत से देश ग़लत दिशा में आगे जा रहे हैं और आने वाले दिनों में वहाँ हालात और भी ज़्यादा ख़राब हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि व्यापक रणनैतिक कार्रवाई और स्थानीय लोगों द्वारा ऐहतियाती उपायों के पालन से संक्रमण की कड़ी को तोड़ना सम्भव है लेकिन कई देशों में स्थिति की गम्भीरता के अनुरूप क़दम नहीं उठाए जा रहे हैं. 

भुखमरी के बढ़ते दायरे से टिकाऊ विकास लक्ष्य के लिए गहराती चुनौती

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि बीते पाँच वर्षों में भुखमरी व कुपोषण के विभिन्न रूपों का शिकार लोगों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है और कोविड-19 महामारी से यह समस्या और भी ज़्यादा विकराल रूप धारण कर सकती है. मौजूदा  हालात में टिकाऊ विकास एजेण्डा के तहत भुखमरी का अन्त करने का लक्ष्य पाने का रास्ता और भी ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक सेहतमन्द आहार को किफ़ायती बनाने और करोड़ों लोगों तक उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने से स्वास्थ्य ख़र्चों को घटाने में मदद मिल सकती है. 

आपात हालात में लड़कियों व महिलाओं को ज़्यादा संरक्षण की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उप-उच्यायुक्त (OHCHR) नाडा अल-नशीफ़ ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 और हिंसक संघर्ष के सामूहिक प्रभाव के कारण वर्ष 2022 तक 20 करोड़ से ज़्यादा लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी. उन्होंने सोमवार को मानवाधिकार परिषद को जानकारी देते हुए आगाह किया कि महिलाओं व लड़कियों के लिए हालात विशेष तौर पर चिन्ताजनक है. 

महिलाओं और लड़कियों के यौन व प्रजनन स्वास्थ्य पर मँडराता ख़तरा

वैश्विक महामारी कोविड-19 सभी लोगों को प्रभावित कर रही है लेकिन इसका असर हर किसी पर एक जैसा नहीं है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शनिवार, 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ पर अपने सन्देश में आगाह किया है कि कोरोनावायरस संकट के कारण स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ा है और महिलाओं व लड़कियों के यौन व प्रजनन स्वास्थ्य  की उपेक्षा हो रही है जो गहरी चिन्ता का विषय है. 

तुर्की द्वारा ऐतिहासिक 'आया सोफ़िया' का दर्जा बदले जाने पर यूनेस्को ने जताया खेद

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने तुर्की के उस फ़ैसले पर गहरा खेद जताया है जिसमें किसी विचार-विमर्श के बिना ही प्राचीन ‘आया सोफ़िया’ (Hagia Sophia) धरोहर को मस्जिद मे बदलने की बात कही गई है. ग़ौरतलब है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एरदोआन ने इस सिलसिले में शुक्रवार को एक आधिकारिक आदेश पर हस्ताक्षर किये हैं. इससे पहले यूएन एजेंसी ने तुर्की से अपने दायित्वों का निर्वहन करने और ‘आया सोफ़िया” का दर्जा विश्व धरोहर सूची में एक संग्रहालय के तौर पर बनाए रखने की अपील की थी.

वन्यजीव अपराधों से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को बढ़ता ख़तरा

मादक पदार्थों एवँ अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) ने शुक्रवार को एक नई रिपोर्ट जारी की है जिसमें वन्यजीवों की तस्करी से प्रकृति, जैवविविधिता के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिये बढ़ते ख़तरे के प्रति आगाह किया गया है. अध्ययन के मुताबिक वन्यजीवों की तस्करी के लिए अब डिजिटल साधनों का भी सहारा लिया जा रहा है. 

सर्वजन के लिये जल व स्वच्छता – त्वरित कार्रवाई के लिए नया फ़्रेमवर्क

वर्ष 2030 तक सभी के लिये जल और साफ़-सफ़ाई की सुलभता सुनिश्चित कराने के इरादे से गुरुवार को एक नई व्यवस्था शुरू की गई है. 'Global Acceleration Framework for SDG-6' नामक इस प्रणाली का उद्देश्य टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेण्डा को हासिल करने के प्रयासों में तेज़ी लाना है और इसे 30 से ज़्यादा यूएन संस्थाओं और 40 अन्तरराष्ट्रीय संगठनों ने विकसित किया है. 

प्लास्टिक के प्रकोप से निपटने की मुहिम में युवाओं का साथ

एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक (Single use plastic) और उसके दुष्प्रभावों से पर्यावरण को भारी नुक़सान पहुँचता है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक पहल प्लास्टिक प्रदूषण पर रोक लगाने के इरादे से दुनिया के अनेक देशों में युवाओं को इसके ख़तरों के प्रति जागरूक बनाने पर केन्द्रित है. इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए स्कूलों, समुदायों और व्यवसायों को प्लास्टिक के इस्तेमाल पर निर्भरता घटाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

बढ़ता वैश्विक तापमान जलवायु लक्ष्य पूरा करने में 'बड़ी चुनौती'

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के नए आँकड़ों के अनुसार आने वाले पाँच वर्षों में वार्षिक वैश्विक तापमान, पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में कम से कम 1° सैल्सियस बढ़ने की आशंका है, जिससे वैश्विक जलवायु परिवर्तन के लक्ष्य खटाई में पड़ सकते हैं. 

महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ लैंगिक हिंसा का ख़ात्मा ज़रूरी

महिला पत्रकारों को अपने कामकाज के दौरान विशेष ख़तरों का सामना करना पड़ता है, संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताया है कि सरकारों को महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए और अधिक क़दम उठाने की ज़रूरत है.