बेलारूस: मानवाधिकारों के बग़ैर टिकाऊ विकास सम्भव नहीं - यूएन प्रतिनिधि का ब्लॉग

7 अक्टूबर 2020

बेलारूस में अगस्त 2020 में विवादों में घिरे राष्ट्रपति चुनावों के बाद से ही व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा बलों द्वारा हिंसक दमनात्मक कार्रवाई हुई है. इन चुनावों में राष्ट्रपति एलेक्ज़ैण्डर लुकाशेन्को की सत्ता में फिर वापसी हुई है. इस ब्लॉग में, बेलारूस में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडैण्ट कोऑर्डिनेटर (आर.सी.) योआना कज़ाना-विसनीओवियेस्की ने देश में मौजूदा अशान्ति के दौरान संगठन के कामकाज को कुछ इस तरह बयान किया है.

संयुक्त राष्ट्र और बेलारूस के सभी अन्तरराष्ट्रीय साझीदारों के लिये, देशों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का दायरा व स्तर हैरान कर देने वाला था.

यह पहली बार है जब एक स्थायित्व वाले देश में, जहाँ लोग अपने राजनैतिक मत अभिव्यक्त करने में संकोच करते हैं, वहाँ इस हद तक चुनाव लड़ा जा रहा है.

साथ ही प्रदर्शनकारियों व पत्रकारों के दमन की गहनता भी अभूतपूर्व है. पिछले आठ हफ़्तों में 13 हज़ार लोग गिरफ़्तार किये गए हैं जिनमें से अधिकतर लोगों को चुनाव के बाद के पहले हफ़्ते में हिरासत में लिया गया.

इतिहास की किताबों में यह ऐसे दर्ज होगा जैसाकि बेलारूस में पहले कभी नहीं हुआ है.

एक और अनपेक्षित घटना - लोगों का सामाजिक रूप से संगठित होना और टैक्नॉलॉजी का इस्तेमाल है जिससे वास्तविक समय में लोगों का एक दूसरे से सम्पर्क करना और अपने प्रदर्शनों को आयोजन कर पाना सम्भव हुआ.

सोशल मीडिया और मोबाइल इण्टरनेट राजनैतिक सक्रियतावाद का चेहरा बदल रहे हैं और अब पहले से कहीं ज़्यादा संख्या में लोग ख़ुद को अभिव्यक्त कर रहे हैं, व ऑनलाइन संगठित हो रहे हैं.

मानवाधिकारों को बढ़ावा

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका अन्तरराष्ट्रीय मानकों को बढ़ावा देना और सार्वभौमिक मानवाधिकारों के सम्मान की पैरवी करना है.

यूएन ने तत्काल प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए स्थानीय प्रशासन को उनके अन्तरराष्ट्रीय दायित्वों की याद दिलाई: यातना व अन्य क्रूर, अमानवीय और बुरा बर्ताव पूरी तरह प्रतिबन्धित है, व कभी भी न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता.

बेलारूस में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडैण्ट कोऑर्डिनेटर योआना कज़ाना-विसनीओवियेस्की.
UNDP-Belarus
बेलारूस में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडैण्ट कोऑर्डिनेटर योआना कज़ाना-विसनीओवियेस्की.

संकट की शुरुआत से ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव, यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त और देश में यूएन की प्रतिनिधि के तौर पर मैंने स्वयँ कई आधिकारिक बयान जारी किये हैं और बेलारूस में एजेंसियों से लोगों के शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने और ख़ुद को अभिव्यक्त करने के अधिकार का सम्मान करने का आग्रह किया है.

चुनाव के बाद सात हज़ार से ज़्यादा लोगों को सामूहिक रूप से हिरासत में लिये जाने और जेलों में यातना दिये जाने के आरोप सामने आए.

इसके मद्देनज़र यूएन ने स्थानीय सरकार से हर उस व्यक्ति को रिहा करने का आग्रह किया जिसे अपने मानवाधिकार का इस्तेमाल करने के लिये हिरासत में लिया गया था.

साथ ही बन्दियों को यातना और अन्य प्रकार का बुरा बर्ताव रोकने, मानवाधिकार हनन के सभी मामलों की जाँच किये जाने और गुमशुदा लोगों के बारे में ठोस जानकारी देने का आग्रह किया गया.

समय बीतने के साथ हमें परेशान कर देने वाली रिपोर्टें मिलती रहीं, यातना व बुरे बर्ताव की.

यह सुनिश्चित करना अहम है कि ये मामले पूरी तरह से दर्ज किये जाएँ, ताकि जाँच हो सके और भविष्य में ऐसे कृत्यों के लिये जवाबदेही तय हो सके.

इस सम्बन्ध में सामयिक मेडिकल जाँच भी महत्वपूर्ण है, और अन्य मानवाधिकार संगठनों द्वारा इन मामलों में जुटाई जाने वाली जानकारी भी.

यूएन रैज़िडैण्ट कोऑर्डिनेटर के तौर पर और मेरे कार्यालय में वरिष्ठ मानवाधिकार सलाहकार ओमेर फ़िशर के साथ, हमने ये सन्देश सीधे तौर पर हमारे राष्ट्रीय समकक्षों को पहुँचाया.

सबसे पहले तो बेलारूस में विदेश मामलों के मन्त्री, गृह मन्त्रालय और इस संकट से निपटने में जुटे अन्य राज्यसत्ता संस्थाओं तक.

हमने इन मुद्दों को लिखित में भी उठाया है, विशेष रूप से गुमशुदा व्यक्तियों के सवाल को. मुझे इस बात से प्रोत्साहन मिला है कि गृह मन्त्रालय ने हमारे ख़त का उत्तर दिया और हमें स्थानीय प्रशासन से और अधिक जानकारी धीरे-धीरे मिल रही है.

राज्यसत्ता के साथ सम्वाद के अतिरिक्त, हम मौजूदा हालात में नागरिक समाज साझीदारों के साथ चर्चा जारी रखे हुए हैं. मानवाधिकार एनजीओ और एसीडीजी साझीदार समूह ने सुरक्षा बलों द्वारा हिंसा, कार्रवाई के अभाव, और मानवाधिकार हनन के आरोपों की जाँच में देरी पर चिन्ता ज़ाहिर की है.

अगस्त 2020 में मिन्स्क और बेलारूस के अन्य शहरों में सामूहिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया है.
Kseniya Golubovich
अगस्त 2020 में मिन्स्क और बेलारूस के अन्य शहरों में सामूहिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया है.

यूएन में हमें पीड़ितों और उनके वकीलों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं: इनमें से अधिकाँश लोगों को अपनी शिकायतें सीधे प्रशासन तक पहुँचाने पर उपयुक्त जाँच होने का भरोसा नहीं हैं.

पिछले अनेक वर्षों से बेलारूस में संयुक्त राष्ट्र उन संगठनों को समर्थन देता रहा है जो हिंसा के पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक व क़ानूनी सहायता प्रदान करते हैं. इस प्रकार की सहायता की माँग में भारी इज़ाफ़ा हुआ है और हम इन समस्याओं से निपटने में जुटे राष्ट्रीय साझीदारों व एनजीओ संगठनों की क्षमता विकसित करने में सहयोग देते रहेंगे.

बेलारूस में कोविड-19

योरोप के अन्य देशों की तरह बेलारूस में भी कोविड-19 के मामलों में उभार देखने को मिल रहा है. सामूहिक प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर रखे जाने से संक्रमण का ख़तरा बढ़ गया है.

वर्ष 2020 की पहली छमाही में हमने अपनी प्राथमिकताएँ फिर से निर्धिारित करते हुए अपने कामकाज में बदलाव किया है.

कुल मिलाकर हम राष्ट्रीय जवाबी कार्रवाई के लिये 75 लाख डॉलर प्रदान कर रहे हैं – इस धनराशि के ज़रिये स्वास्थ्य प्रणाली को सहारा दिया जाएगा और महामारी के सामाजिक व आर्थिक प्रभावों से निपटने का प्रयास किया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र ने अपना कार्यालय बन्द नहीं किया, हालाँकि बहुत से कर्मचारी अपने घरों से काम कर रहे हैं. हमारा ध्यान कोविड-19 पर जवाबी कार्रवाई पर केन्द्रित है और हमने दीर्घकालीन विकास मुद्दों पर भी काम जारी रखा है.

उदाहरण के तौर पर, हमने बेलारूस में वर्ष 2035 तक दीर्घकालीन विकास रणनीति के लिये नीतिगत परामर्श और ठोस सुझाव पेश किए हैं.

सम्वाद ही रास्ता

संयुक्त राष्ट्र के नज़रिये में बेलारूस को ज़्यादा महत्वाकाँक्षी विकास योजना का लक्ष्य रखना चाहिये. इसके तहत युवाओं और वृद्ध होती जनसंख्या की ज़रूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिये, अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मज़बूती मिलनी चाहिये, और नई टैक्नॉलॉजी व अवसर अपनाए जाने चाहिये जिससे टिकाऊ आर्थिक वृद्धि में मदद मिल सके और निर्धनों व हाशिएकरण का शिकार लोगों को लाभ मिल सके.

मिन्स्क में हिरासत में लिये गये प्रदर्शनकारियों को रिहा किये जाने का एक दृश्य.
Kseniya Golubovich
मिन्स्क में हिरासत में लिये गये प्रदर्शनकारियों को रिहा किये जाने का एक दृश्य.

बेलारूस में अगले पाँच वर्षों के लिये हमारी मौजूदगी के दौरान सहयोग की यही परिकल्पना है.

कोविड-19, जलवायु परिवर्तन और राजनैतिक उठापठक के दौरान बेलारूस एक बेहद प्रतिस्पर्धात्मक वैश्विक व क्षेत्रीय माहौल का सामना कर रहा है.

ऐसे में देश के लिये आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता सम्वाद, महत्वाकाँक्षी सुधारों व नवाचारी विकास एजेण्डा है, जिसके मूल में मानवाधिकारों के प्रति वास्तविक सम्मान को रखा जाए.

मानवाधिकारों के बिना टिकाऊ विकास सम्भव नहीं है. बेलारूस में संयुक्त राष्ट्र इन ज़रूरतों को पूरा करने के लिये अपना कार्य जारी रखेगा, भले ही यह एक चुनौतीपूर्ण व तनाव भरा समय होगा, विशेष रूप से हमारी टीम में शामिल बेलारूस के नागरिकों के लिये.

हमसे अक्सर पूछा जाता है, "यूएन और क्या कर सकता है?"

मैं कहूँगी कि बेलारूस के लिये इस जटिल हालात में हमारे सामने उपलब्ध औज़ारों के साथ, हम हरसम्भव प्रयास कर रहे हैं. सदभावना, नई ऊर्जा, सम्वाद में शामिल होने की इच्छा और सभी पक्षों द्वारा पेशेवर प्रयासों से मुझे निश्चिन्तता है कि बेलारूस विकास की ओर आगे बढ़ना जारी रखेगा.

 

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