75वाँ सत्र: यूएई ने जताई उम्मीद, इसराइल के साथ समझौते से शान्ति वार्ता में मिलेगी मदद

29 सितम्बर 2020

संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मन्त्री शेख़ अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाहयान ने कहा है कि इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सम्बन्धों को बहाल करने वाले ऐतिहासिक समझौते से अरब क्षेत्र में भावी पीढ़ियों के लिए शान्ति और उज्ज्वल भविष्य के प्रयासों को मज़बूती मिलनी चाहिये. यूएई के विदेश मन्त्री ने मंगलवार को यूएन महासभा के 75वें सत्र की जनरल डिबेट को दिये वीडियो सन्देश में ये बात कही है.  

शेख़ अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाहयान ने अपने देश के उन कूटनैतिक प्रयासों को रेखांकित किया जिनके ज़रिये फ़लस्तीनी क्षेत्र पर क़ब्ज़े को ख़ारिज करने के प्रयासों को पुष्ट करने में मज़बूती दी गई है. साथ ही मध्य पूर्व में दो-राष्ट्र समाधान के लिये पुरज़ोर समर्थन को दोहराया गया है.  

उन्होंने अगस्त 2020 में हुए इस समझौते का ज़िक्र करते हुए कहा, “इसराइल के साथ, अमेरिका के समर्थन प्राप्त ऐतिहासिक शान्ति समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ ही मेरा देश आधिपत्य जमाने के निर्णय को रोक देने में सफल रहा है, और इससे क्षेत्र में व्यापक शान्ति हासिल करने की वृहद सम्भावनाएँ खुली हैं.”

“हम आशा करते हैं कि यह शान्ति समझौता फ़लस्तीनियों व इसराइलियों के लिये शान्ति हासिल करने के लिये फिर से वार्ता शुरू करने का एक अवसर है.”

“फ़लस्तीनी लोगों को समर्थन के लिये और दो राष्ट्र समाधान के लिये हमारा रुख़ मज़बूत है.”

शेख़ अब्दुल्लाह ने स्पष्ट किया कि संयुक्त अरब अमीरात शान्ति समझौते के ज़रिये भावी पीढ़ियों के लिये एक समृद्धि भरा रास्ता सृजित करने के प्रयास जारी रखेगा, जोकि एक स्थिरतापूर्ण क्षेत्र और युद्ध व ग़रीबी के बजाय एक बेहतर वास्तविकता के आकाँक्षी हैं. 

ग़ौरतलब है कि यूएन महासभा के ऐतिहासिक 75वें सत्र में उच्चस्तरीय खण्ड की चर्चा मंगलवार को समाप्त हो रही है.

कोविड-19 से बचाव के लिये ऐहतियाती उपायों के कारण ये उच्चस्तरीय सप्ताह वर्चुअली आयोजित किया गया जिसके लिये राष्ट्राध्यक्षों व सरकार प्रमुखों ने पहले से रिकॉर्ड किये गए अपने वीडियो सन्देश भेजे. 

ये वीडियो सन्देश न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महासभा हॉल में बड़े पर्दे पर प्रसारित किये गए.

वैश्विक महामारी कोविड-19 संकट एक ऐसे समय में पैदा हुआ है जब संयुक्त राष्ट्र अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे कर रहा है. 

नई दिशा की ओर

शेख़ अब्दुल्लाह ने इसके मद्देनज़र विश्व नेताओं से इस महत्वपूर्ण लम्हे का सहारा लेते हुए चुनौतियों को महान अवसरों में बदलने का आहवान किया है. उनके मुताबिक समन्वित अन्तरराष्ट्रीय जवाबी कार्रवाई और बुद्धिमतापूर्ण नेतृत्व के ज़रिये इसे सम्भव बनाया जा सकता है.

“पहला शुरुआती बिन्दु मौजूदा राजनैतिक संकटों को सुलझाने और नए टकरावों को उभरने से रोकने पर प्रयास केन्द्रित किया जाना होना चाहिये, विशेषत: महामारी के फैलाव के दौरान.” 

विदेश मन्त्री ने कहा कि संकटों को सुलझाते समय, ख़ासतौर पर अरब क्षेत्र में, एकजुट अन्तरराष्ट्रीय रुख़ की आवश्यकता होती है जिसमें राजसत्ता की सम्प्रभुता के हनन और अन्दरूनी मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को ख़ारिज किया जाए. 

साथ ही हूती, दाएश, अल क़ायदा और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे गुटों से उत्पन्न ख़तरे से निपटने के लिये संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में राजनैतिक समाधानों की ज़रूरत होगी. 

“यमन, सीरिया, लीबिया, इराक़ और अन्य देशों में तनाव, सभी अरब मामलों में खुले हस्तक्षेप से सम्बन्धित हैं, उन देशों द्वारा जो कलह और मनमुटाव भड़काते हैं, या फिर जिन्हें अरब क्षेत्र और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका में अपना दबदबा और औपनिवेशिक शासन फिर से क़ायम करने का ऐतिहासिक भ्रम है.”

“इसका नतीजा बर्बर युद्ध रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “इस सन्दर्भ में हम अरब मामलों में क्षेत्रीय हस्तक्षेप को ख़ारिज करने के अपने रुख़ के प्रति ध्यान दिलाते हैं और सम्प्रभुता के पूर्ण सम्मान का आग्रह करते हैं, जोकि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है.” 

शेख़ अब्दुल्लाह ने चरमपंथी गुट इस्लामिक स्टेट (दाएश) के ख़िलाफ़ कार्रवाई में हो रही प्रगति को बरक़रार रखने की अहमियत पर बल दिया है.

इस क्रम में मुक्त कराए गए इलाक़ों का पुनर्निर्माण करने, क़ानून के राज को मज़बूती प्रदान करने और समुदायों की आतंकवाद व चरमपंथ से रक्षा करने के प्रयासों को समर्थन देना होगा. 

 

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