दरकती दुनिया को कोविड-19 से ख़तरा, शान्ति की पुकार

17 सितम्बर 2020

जापान में प्रचलित एक सिद्धान्त के अनुसार टूटी हुई वस्तुओं में भी ख़ूबियाँ तलाश की जाती हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को यूएन मुख्यालय में 21 सितम्बर को मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस से पहले गुरूवार को आयोजित एक वार्षिक कार्यक्रम में वैश्विक आग्रह किया कि ऐसे समय जब दुनिया दरक रही है, कोविड-19 से उबरने की प्रक्रिया के दौरान इसी सिद्धान्त को अपनाए जाने की आवश्यकता है.  

महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के परिसर में जापानी शान्ति घण्टी (Peace Bell) के समक्ष मौजूद होकर कहा कि कोरोनावायरस ने शान्ति के लिये जोखिम पैदा कर दिया है. 

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि इसके मद्देनज़र मार्च 2020 में कोविड-19 को वैश्विक महामारी के रूप में परिभाषित किये जाने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने वैश्विक युद्धविराम के लिये एक अपील जारी की थी. 

“युद्धग्रस्त इलाक़ों से परे, यह महामारी हर प्रकार की विषमताओं को उजागर कर रही है और उनका दुरुपयोग कर रही है, समुदायों और देशों को एक दूसरे के ख़िलाफ़ कर रही है.”

महासचिव ने विश्व भर में युद्ध और हिंसा का शिकार हुए पीड़ितों की स्मृति में शान्ति घण्टी बजाने से पहले एक मिनट का मौन रखा. 

ठहराव का वार्षिक लम्हा

यूएन प्रमुख के मुताबिक यूएन महासभा के उच्चस्तरीय खण्ड से पहले शान्ति घण्टी समारोह ठहराव का एक वार्षिक लम्हा है. 

ग़ौरतलब है कि महासभा के 75वें सत्र के दौरान उच्चस्तरीय खण्ड की शुरुआत अगले सप्ताह होगी लेकिन कभी खचाखच भरे रहने वाले महासभा के गलियारे और सम्मेलन कक्ष इस वर्ष कोविड-19 के कारण वीरान हैं.

इस वर्ष महासभा की जनरल डिबेट यानि आम चर्चा वर्चुअली यानि डिजिटल माध्यमों के ज़रिये आयोजित की जा रही है. 

महासचिव ने वैश्विक एकजुटता के लिये अपनी अपील दोहारते हुए कहा कि हमें बन्दूकों को शान्त करने और हमारे साझा दुश्मन, यानि वारयस पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है.  

इस महामारी ने दुनिया को ऐसे समय अपनी चपेट में लिया है जब संयुक्त राष्ट्र अपनी स्थापना की 75वीं वर्षगाँठ के लिये तैयारियों में जुटा है. संगठन की स्थापना के उद्देश्य के मूल में युद्ध की रोकथाम और शान्ति को बढ़ावा देना था. 

यूएन प्रमुख ने शान्ति घण्टी को एकता का प्रतीक बताया जिसे दुनिया भर से लोगों द्वारा पदकों और सिक्कों के दान की मदद से तैयार किया गया था. यह शान्ति घण्टी जापान ने वर्ष 1954 में संयुक्त राष्ट्र को एक उपहार के रूप में भेंट की थी.   

पहले से बेहतर ढँग से उभरना 

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि जापानी संस्कृति में प्राकृतिक कमियों और खोट को भी सम्मान की नज़र देखा जाता है. 

यह भावना किन्तसुगी नामक कला के एक रूप में प्रदर्शित होती है जिसमें मिट्टी के टूटे हुए बर्तनों को लाख के साथ मिलाकर नया आकार दिया जाता है.    

उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप जो वस्तु तैयार होती है वह नई से भी बेहतर होती है. उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस से पहले इस सिद्धान्त को हमारी दरकती दुनिया पर लागू करने की ज़रूरत है. 

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“आइये, हम वो कमज़ोरियाँ और विषमताएँ दूर करें जो शान्ति के ख़िलाफ़ काम करती हैं, ताकि हम इस संकट का मुक़ाबला करने में पहले से मज़बूत बनकर उभर सकें.”

शान्ति घण्टी समारोह का सीधा प्रसारण किया गया जिसमें महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के साथ यूएन महासभा के नए अध्यक्ष और तुर्की के राजनयिक वोल्कान बोज़किर ने भी शिरकत की. 

महासभा प्रमुख वोल्कान बोज़किर ने कहा कि वैश्विक महामारी ने स्वास्थ्य, सुरक्षा और लोगों के जीवन जीने के तरीक़े को ख़तरे में डाल दिया है. 

“आज हम अलग और मास्क पहने खड़े हैं. इस महामारी से अनेक लोगों को अनपेक्षित स्तर पर पीड़ा और मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. लेकिन इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित सबसे निर्बल समुदाय के लोग हुए हैं और वो अब भी पीड़ा में हैं, हिंसक संघर्ष में भी और इस बीमारी के कारण भी.”

 

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ये तो हम सभी जानते हैं कि बचपन एक इंसान के वजूद और आकार की बुनियाद होता है. साथ ही बचपन में सही परवरिश और शिक्षा ही उसके भविष्य का रास्ता तय करने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. लेकिन क्या किया जाए जब लड़ाई-झगड़े और प्राकृतिक आपदाएँ करोड़ों बच्चों से उनका बचपन और भविष्य दोनों ही छीन लें.