कोविड-19: महामारी की चुनौती के बावजूद शान्ति व सुरक्षा के अनवरत प्रयास

4 जून 2020

अफ़्रीका और मध्य पूर्व में संयुक्त राष्ट्र के तीन मिशनों के सैन्य प्रमुखों ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए बताया कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान यूएन मिशन की ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के साथ-साथ शान्तिरक्षकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी ध्यान रखने के प्रयास किए जा रहे हैं.
 

माली, दक्षिण सूडान और इसराइल व सीरिया के बीच गोलान में तैनात यूएन दलों के फ़ोर्स कमाण्डरों ने एक वर्चुअल बैठक के दौरान सुरक्षा परिषद को मौजूदा हालात से अवगत कराया है. 

शान्ति अभियानों के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ज्याँ पियरे लाकोआ ने बताया कि ये सैन्य अधिकारी ज़मीनी हालात को ध्यान में रखकर ही उपयुक्त उपाय अपना रहे हैं. 

उनके मुताबिक कोविड-19 के फैलाव को रोकने के संकल्प के साथ शान्ति व सुरक्षा उद्देश्यों की पूर्ति का काम जारी है: युद्धविराम के लिए राजनैतिक प्रक्रियाओं को सहारा देना, आम लोगों की रक्षा सुनिश्चित करना और क्षमता-निर्माण को बढ़ावा देना.  

माली

माली में संयुक्त राष्ट्र मिशन (MINUSMA) वहाँ की सरकार के साथ मिलकर कोविड-19 से मुक़ाबला करने के प्रयासों में एकरूपता लाने का प्रयास कर रहा है.

फ़ोर्स कमाण्डर डेनिस जिलेनस्पोर्र के मुताबिक अब तक जो उपाय किये गये हैं उनमें  एकान्तवास के लिए सख़्त नीति लागू करना, हवाई अभियानों को प्राथमिकता देना और आम जनता के साथ सम्पर्क को सीमित करना है. 

माली में यूएन मिशन के मुख्य उद्देश्यों में वर्ष 2015 के शान्ति समझौते को लागू करना और आम नागरिकों की सुरक्षा करना शामिल है.

यूएन मिशन इसके समानान्तर ही पहले से कहीं अधिक मुस्तैदी बरतने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है और महीने में कुछ समय के लिए कुछ मुख्य इलाक़ों में इन्फ़ैन्ट्री यूनिट तैनात की जा रही है. 

मई में उत्तरी माली में एक बम हमले में तीन शान्तिरक्षकों की मौत हो गई थी और चार शान्तिरक्षक घायल हुए थे. इसके मद्देनज़र यूएन शान्तिरक्षकों की हमलों से सुरक्षा के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं.

फ़ोर्स कमान्डर ने बताया कि ज़्यादा सक्रियता के साथ रात के समय में भी गश्त और हवाई अभियान शुरू किये गये हैं और हमलों के ख़तरों से निपटने के लिए मदद मुहैया कराई जा रही है. 

दक्षिण सूडान

दक्षिण सूडान में हाल के दिनों में अन्तर-सामुदायिक हिन्सा में तेज़ी और कोविड-19 संक्रमण के फैलाव के जोखिम के बावजूद यूएन मिशन (UNMISS) में शामिल सैन्य दस्ता अपने कार्य में जुटा है.

यूएन मिशन के फ़ोर्स कमान्डर लैफ़्टिनेन्ट जनरल शैलेश तिनाइकर ने बताया कि महामारी के मद्देनज़र मौजूदा प्रक्रियाओं में बदलाव किया गया है ताकि बीमारियों से शान्तिरक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.    

ख़ासतौर पर उन इलाक़ों में जहाँ उनकी उपस्थिति ज़रूरी है – जैसे घरेलू विस्थापितों के लिए बनाए गये शिविरों में. 

फ़ोर्स कमान्डर ने यूएन मिशन के अन्तर्गत उन अन्य तरीक़ों के बारे में भी जानकारी दी जिनके ज़रिये नागरिकों के सुरक्षा के उपाय किये जाते हैं. 

इसके तहत अशान्त इलाक़ों में शान्तिरक्षकों को एक बार में तीन महीनों के लिए तैनात किया जाता है. इस दौरान वे एक मुख्य अस्थाई शिविर स्थापित करते हैं और वहाँ से बाहरी इलाक़ों में गश्त अभियान चलाते हैं. 

इसके अलावा स्थानीय समुदायों में भरोसा क़ायम करने, हिन्सा से दूरी बरतने और घरेलू विस्थापितों को घर लौटने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है. 

लैफ़्टिनेन्ट जनरल शैलेश तिनाइकर ने बताया कि इनमें से अधिकान्श हिन्सक सन्घर्ष जटिल हैं. “हमें सफलता मिलती है, हम लोगों की ज़िन्दगियाँ भी बचाते हैं लेकिन अगर बुनियादी और अन्तर्निहित मुद्दों का निपटारा ना किया जाए तो उनके भविष्य में फिर सिर उठाने की सम्भावना हमेशा बनी रहती है.”

गोलान

‘यूनाइटेड नेशन्स डिसइन्गेजमेन्ट ऑब्ज़र्वर फ़ोर्स’ (UNDOF) की कार्यवाहक फ़ोर्स कमान्डर मॉरीन ओब्रायन ने बताया कि महामारी एक बड़ी चुनौती साबित हुई है लेकिन इससे गोलान के सीमावर्ती इलाक़ों में यूएन मिशन का काम प्रभावित नहीं हुआ है.

ब्रिगेडियर जनरल ओब्रायन के मुताबिक इसराइल और सीरिया अब पाबन्दियाँ हटा रहे हैं और इन हालात में यूएन दल विचार कर रहा है कि किस तरह आम लोगों को इलाक़ों में परियोजनाओं के लिए सुरक्षित ढँग से प्रवेश करने की अनुमति दी जा सकती है. 

सीरिया में करफ़्यू और आवाजाही पर लगी पाबन्दियाँ हटा ली गई हैं जिससे रात में गश्त लगाना सम्भव हुआ है. उन्होंने आशा जताई है कि इसराइल के क़ब्ज़े वाली गोलान पहाड़ियों के निरीक्षण का कार्य जल्द ही फिर से शुरू हो जाएगा. 

ब्रिगेडियर जनरल ओब्रायन ने स्पष्ट किया है कि एक जटिल और सम्वेदनशील माहौल में काम करना मुश्किल है और यूएन टीम के अभियान वाले इलाक़ों में हमले भी होते रहे हैं.

 

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