कोविड-19 से उबरने के लिये टिकाऊ कामकाजी दुनिया की दरकार

8 जुलाई 2020

पचास से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों व सरकार अध्यक्षों के साथ-साथ वैश्विक रोज़गार कम्पनियों व श्रम संगठनों के नेताओं ने बुधवार को इस विषय पर वर्चुअल विचार-विमर्श में शिरकत की कि कामकाज व श्रम की दुनिया को कोविड-19 महामारी के प्रभावों से किस तरह उबारा जाए.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा महामारी के आर्थिक व सामाजिक प्रभावों का मुक़ाबला करने के उपायों की तलाश के तहत इस पाँच दिवसीय वर्चुअल वैश्विक सम्मेलन का आयोजिन किया है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरश ने एक वीडियो सन्देश में प्रतिभागी नेताओं से कहा कि महामारी के बाद की दुनिया को बेहतर बनाने के वैश्विक प्रयासों में उनकी भूमिका बहुत अहम है.

उन्होंने कहा, “हम एक साथ मिलकर, इस संकट से और भी ज़्यादा मज़बूत होकर उबर सकते हैं, जहाँ बेहत कामकाज व रोज़गार होंगे और सभी के लिए एक ज़्यादा उज्ज्वल, ज़्यादा बराबरी वाला और हरित भविष्य हो.”

संकट ने उजागर कीं कमज़ोरियाँ

कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में करोड़ों कामकाजी लोगों व कारोबारों में व्याप्त गहरी कमज़ोरियों को सामने ला दिया है. 

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के आँकड़े बताते हैं कि इस स्थिति के कारण इस वर्ष की दूसरी तिमाही में दुनिया भर में कामकाजी घण्टों में 14 प्रतिशत की कमी आई है; दूसरे शब्दों में कहें तो 40 करोड़ पूर्णकालिक कामकाज ख़त्म हो गए हैं.

इससे भी आगे, दुनिया भर के ज़्यादातर कामकाजी लोग यानी लगभग 93 प्रतिशत संख्या ऐसे देशों में रह रही है जहाँ किसी ना किसी रूप में कामकाजी स्थलों को सिकुड़ना पड़ा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़ों के अनुसार बुधवार, 8 जुलाई तक दुनिया भर में कोविड-19 महामारी से लगभग एक करोड़ 16 लाख लोग संक्रमित हो चुके थे, और 5 लाख 40 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी.

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि एक तरफ़ तो अनेक देशों में तो इस महामारी का भीषण दौर शुरू हो रहा है, जबकि अन्य अनेक देश संक्रमण की फिर वापसी के जोखिम को देखते हुए अपनी अर्थव्यवस्थाएँ फिर से शुरू करने में घबरा रहे हैं.

यूएन प्रमुख ने कहा, “हमें ये बात स्पष्ट तरीक़े से समझनी होगी: ये कोई स्वास्थ्य या कामकाज व रोज़गार और अर्थव्यस्था के बीच किसी एक विकल्प को चुनने का मामला नहीं है, ये सभी एक दूसरे में गुँथे हुए हैं. या तो हम इन सभी मोर्चों पर विजयी रहेंगे या फिर सभी मोर्चों पर नाकाम हो जाएंगे.”

उन्होंने फिर से वैश्विक एकजुटता की महत्ता पर ज़ोर दिया क्योंकि कोई भी देश अकेले दम पर इस संकट से नहीं उबर सकता. 

“ये वैश्विक सम्मेलन सरकारों, कामकाजी लोगों और रोज़गारदाताओं के प्रतिनधियों के लिये एक अवसर है – कारगर उपाय व रणनीतियों को आकार देने का.”

उन्होंने कहा, “ऐसे उपाय व कार्रवाई करने का जिनसे अर्थव्यस्था और रोज़गार क्षेत्र में दम आ सके. ऐसे समाधान जो उद्योगों, अच्छे कामकाज व आय को बढ़ावा दे सकें. ऐसे तरीक़े जिनके ज़रिये कामकाजी लोगों के हित सुरक्षित हों और सामाजिक संरक्षण का दायरा बढ़े.” 

“ऐसी योजनाएँ जिनके ज़रिए लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सामाजिक मेल-मिलाप को मज़बूती मिल सके. ऐसे प्रस्ताव जो सबसे नाज़ुक हालात में रहने वाले और कमज़ोर लोगों को सुरक्षा प्रदान करें और अति-महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों का भरपूर ख़याल रखें – जैसेकि स्वास्थ्य और देखभाल सेवाओं में काम करने वाले लोग जो कोविड-19 का मुक़ाबला करने के प्रयासों में अग्रिम मोर्चों पर काम कर रहे हैं. और इन सभी से ऊपर, ऐसी पहलें शुरू करना जो एकता और एकजुटता पर टिकी हों.”

एक बेहतर कामकाजी दुनिया

प्रतिभागियों इस सम्मेलन को अपने वीडियो सन्देशों के ज़रिये सम्बोधित किया जिनमें उन्होंने ये जानकारी साझा की कि उनके देश या संगठन इस स्वास्थ्य संकट का सामना किस तरह कर रहे हैं. 

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाय राइडर ने इस सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा, “मुझे इसमें ज़रा भी सन्देह नहीं है कि इन सन्देशों से हमें इस महामारी पर पार पाने के प्रयासों में मूल्यवान दिग्दर्शन व प्रोत्साहन मिलेगा, साथ ही कामकाजी दुनिया पर इसके प्रभावों का सामना तत्काल व असरदार तरीक़े से करने में भी.”

 

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