इसराइल: ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती

26 सितम्बर 2019

इसराइल के विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए एकजुट होना चाहिए. 

गुरूवार शाम को महासभा की जनरल डिबेट में शिरकत करते हुए इसराइली विदेश  मंत्री इसराइल कत्ज़ ने ईरान को मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा और "पूरे पृथ्वी ग्रह पर आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक" क़रार दिया. 

इसराइली विदेश मंत्री ने कहा, "ईरान अपने पिट्ठू आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल करता है - लेबनान में हिज़बुल्लाह, ग़ाज़ा में हमास और फ़लस्तीनी इस्लामी जेहाद, यमन में हूती और सीरिया व ईराक़ में शिया लड़ाके. ईरान इन सबका इस्तेमाल इसराइल और मध्य पूर्व में अन्य देशों के ख़िलाफ़ करता है."

"मैं  अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान को रोकने के प्रयासों में एकजुट होने का आहवान करता हूँ. विश्व ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की इजाज़त नहीं दे सकता. विश्व ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल नहीं बनाने दे सकता, और विश्व को ईरान को क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने से रोकना होगा."

इसराइली विदेश मंत्री कत्ज़ ने इसराइल को सभी नागरिकों - यहूदी व ग़ैर-यहूदियों -  के लिए एक वास्तविक लोकतंत्र क़रार दिया, जो सभी पड़ोसी देशों के साथ शांति चाहता है.

उन्होंने कहा, "हम फ़लस्तीनी प्राधिकरण से भड़काव रोकने, आतंकवाद को बढ़ावा और धन देने को रोकने का आहवान करते हैं. और यहूदियों के उनके अपने देश के अधिकार को पहचाने देने का भी आहवान करते हैं."

"हम फ़लस्तीनियों के आहवान करते हैं कि वो बिना किसी शर्त के सीधे बातचीत करने के लिए तैयार हो जाएँ."

विदेश मंत्री कत्ज़ ने भरोसा जताते हुए कहा कि मध्य पूर्व के देशों के पास ऐसे अवसर हैं जिनमें वो आपसी सहयोग करके अपनी अर्थव्यवस्थाओं को फ़ायदा पहुँचा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि इसराइल की 'स्पष्ट नीति' खाड़ी देशों के साथ सामान्य हालात रखने और अपने संबंध आगे बढ़ाने की है.

"खाड़ी देशों के साथ हमारा कोई संघर्ष नहीं है और ईरान के ख़तरे के ख़िलाफ़ सुरक्षा के लिए हमारे साझे हित हैं. ये हित नागरिक आबादी को फ़ायदा पहुँचाने के मिले-जुले कार्यक्रम चलाने में भी है." 

इसराइली विदेश मंत्री ने येरूशलम को इसराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने और वहाँ अमरीकी दूतावास स्थानांतरित करने के लिए अमेरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का शुक्रिया भी अदा किया. 

उन्होंने अन्य देशों से भी ऐसा ही करने का आग्रह भी किया. "यहूदियों को उनकी ऐतिहासिक गृहभूमि से कोई भी जुदा नहीं कर सकता. और कोई भी हमें येरुशलम - हमारी चिरकालिक राजधानी - से अलग नहीं कर सकता."

 

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